00 वीडियो सामने आने से शिकारी से भी खतरा
00 वन विभाग के लिए चुनौती बना अचानकमार की बाघिन का रहवास
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पेंड्रा और मरवाही के जंगलों में पिछले दो महीने से एक बाघिन का मूवमेंट वन विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) से रेस्क्यू कर लाई गई यह बाघिन बार-बार अपने पुराने ठिकानों की ओर लौटने की कोशिश कर रही है। वन विभाग की टीम इसे एटीआर में सुरक्षित रखने के लिए लगातार निगरानी कर रही है, लेकिन बाघिन का लगातार भटकना इस ओर इशारा करता है कि उसे उपयुक्त रहवास नहीं मिल पा रहा है। अब उसकी दहाड़ रिहायशी इलाकों तक गूंजने लगी है, जिससे लोग दहशत में है। वही बाघिन के दाहिने का वीडियो सामने आने से शिकार होने का भी खतरा बढ़ जाता है।
मरवाही के जंगलों से रेस्क्यू की गई बाघिन फिलहाल गौरेला के बानघाट क्षेत्र में देखी गई है, जो एटीआर से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है। वन विभाग ने दोपहर 12 बजे उसका लोकेशन ट्रैक किया, लेकिन उसके बाद वह स्थिर रही। यह बाघिन पहले भी अपने पुराने ठिकानों—अनूपपुर, मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी के जंगलों—से गुजर चुकी है। बस्ती की ओर रुख करने की घटनाओं ने वन विभाग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
क्या है बाघिन के भटकने की वजह
1. प्राकृतिक आवास की कमी:
एटीआर जैसे संरक्षित क्षेत्र में रहवास की कमी बाघिन के मूवमेंट का बड़ा कारण है। घने जंगल, पानी के स्रोत और शिकार की अनुपलब्धता उसे असहज बना रहे हैं।
2. मनुष्यों से बढ़ती नजदीकी:
बाघिन का बस्तियों की ओर बढ़ना मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ा सकता है। पिछले महीने मरवाही में एक फार्महाउस में बाघिन देखी गई थी, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया था।
3. पुराने ठिकानों की तलाश:
वन्यजीव अपनी स्थायी जगह से गहरे जुड़े होते हैं। बाघिन का बार-बार अपने पुराने क्षेत्रों की ओर लौटने का प्रयास इसी का प्रमाण है।
वन विभाग के प्रयास:
वन विभाग और कानन पेंडारी की रेस्क्यू टीम लगातार बाघिन पर नजर रखे हुए हैं। एटीआर की ओर उसके मूवमेंट को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि यदि बाघिन को सुरक्षित और स्थिर आवास नहीं मिला तो यह चुनौती और गंभीर हो सकती है।



