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हे गजराज हमें माफ करना… छत्तीसगढ़ में 1 साल में 15 से अधिक हाथियों की गई जान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 कोरबा जिले में फिर मिला एक हाथी का पानी में तैरता हुआ शव, करंट लगाकर मारने की जताई जा रही है आशंका

00 वन्यजीव संरक्षण को लेकर खड़े हुए बड़े सवाल

बिलासपुर। पिछले एक साल में छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत के लगातार बढ़ते मामलों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करंट, अवैध शिकार, सड़क दुर्घटनाओं और मानव-हाथी संघर्ष जैसे कारण इन मौतों के मुख्य कारक बने हैं। राज्य के जंगलों में सिकुड़ते आवास और बढ़ते खनन व शहरीकरण ने हाथियों को भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर धकेल दिया है। परिणामस्वरूप, वे करंट बिछाए गए तारों, शिकारियों और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। बीते 12 महीनों में 15 हाथियों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण की वर्तमान रणनीतियों पर विचार करने को मजबूर कर दिया है।

कोरबा जिले में एक दंतैल हाथी को करंट लगाकर मार डालने की आशंका जताई जा रही है। गया। हाथी का शव नाले में डूबा हुआ मिला है। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे शिकारियों का हाथ है। वन विभाग मौके पर पहुंचा है। मामला कोरबा वन मंडल के कुदमुरा रेंज अंतर्गत गीतकुंवरी क्षेत्र का है।

मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार की सुबह ग्रामीण जंगल की ओर निकले थे। इस दौरान उन्होंने मरे हुए हाथी को देखा। इस दौरान गांव में सूचना मिलते ही लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी को किसी ने करंट लगाकर मारा होगा, जितने पानी में हाथी डूबा है, उसमें उसकी जान नहीं जा सकती है। कीचड़ में भी फंसने की आशंका नहीं है। ऐसे में उसकी हत्या की गई है। वन विभाग के अधिकारी आए हैं, जांच करेंगे।

बीते 1 साल में 15 हाथियों की मौत

छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले 12 महीनों में राज्य में 15 हाथियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से कई मौतें करंट लगने, अवैध शिकार और सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुई हैं।

यह प्रमुख घटनाएं

कोरबा (दिसंबर 2024): करंट लगाकर मारे गए दंतैल हाथी का शव नाले में मिला।

महासमुंद (अक्टूबर 2024): दो हाथियों की करंट लगने से मौत।

रायगढ़ (जुलाई 2024): खेत की सीमा पर लगाए गए बिजली के तारों की चपेट में आने से हाथी की मौत।

सरगुजा (मार्च 2024): जंगल में एक मादा हाथी का शव मिला, शिकार की आशंका।

धरमजयगढ़ (फरवरी 2024): ट्रेन से टकराने के कारण एक हाथी की मौत।

मानव-हाथी संघर्ष के कारण

छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत का एक बड़ा कारण मानव-हाथी संघर्ष है। जंगलों के अंधाधुंध कटान और खनन गतिविधियों के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं। भोजन और पानी की तलाश में हाथी गांवों और खेतों की ओर बढ़ते हैं, जिससे वे शिकारियों और दुर्घटनाओं का शिकार बन जाते हैं।

प्रमुख समस्याएं और चुनौतियां

  1. करंट लगना:
    हाथियों की मौतों में सबसे अधिक मामले बिजली के तारों के कारण हुए हैं। खेतों और जंगलों के किनारे बिछाए गए अवैध बिजली के तार जानलेवा साबित हो रहे हैं।
  2. शिकार:
    कुछ क्षेत्रों में हाथी दांत के लिए शिकार किया जा रहा है। सरगुजा और कोरबा जैसे इलाकों में शिकारियों की गतिविधियां बढ़ी हैं।
  3. सड़क और ट्रेन दुर्घटनाएं:
    हाथी गलियारों के पास रेलवे ट्रैक और सड़कों के कारण कई हाथियों की जान जा चुकी है।
  4. प्राकृतिक कारण:
    पानी की कमी, बीमारी और आहार की अनुपलब्धता के कारण भी हाथियों की मौत हो रही है।

वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल

वन विभाग ने हाथियों की मौतों को रोकने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. निगरानी बढ़ाना: संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है।
  2. अवैध शिकार पर रोक: शिकारियों की गिरफ्तारी और दंडित करने की प्रक्रिया तेज की गई है।
  3. बिजली के तारों की जांच: अवैध बिजली के तार हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
  4. सामुदायिक जागरूकता: स्थानीय समुदायों को हाथियों के संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

क्या है पर्यावरणविदों की राय

पर्यावरणविदों का मानना है कि हाथियों के आवास को संरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं की जरूरत है। जंगलों का कटान रोकने, खनन गतिविधियों को सीमित करने और हाथी गलियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

स्थानीय समुदाय की भूमिका

ग्रामीणों को हाथियों के प्रति संवेदनशील बनाने और उनके संरक्षण में भागीदार बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए:

वैकल्पिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना।

मानव-हाथी संघर्ष से बचने के लिए बफर जोन विकसित करना।

मुआवजा योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना।

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