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स्वास्थ्य संचालनालय में महिला कर्मचारी की गरिमा और नाबालिग की निजता पर उठे सवाल, PMO से लेकर राष्ट्रीय आयोगों तक शिकायत

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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संचालक संजीव झा समेत तीन अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग; जन्म प्रमाणपत्र और संबंधित दस्तावेजों के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
रायपुर, 26 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में पदस्थ एक महिला कर्मचारी की शिकायत ने सरकारी कार्यालय में प्रशासनिक प्रक्रिया, महिला की गरिमा और नाबालिग की निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महिला ने आरोप लगाया है कि एक व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में उनके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं और उनकी नाबालिग पुत्री के जन्म प्रमाणपत्र तथा उसमें सुधार के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का कथित तौर पर विवादित संदर्भ में इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले में संचालनालय के संचालक संजीव झा, संयुक्त संचालक प्रेमलता चंदेल और डॉ. निधि अत्रिवाल की भूमिका की अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
महिला ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि मामले की जांच ऐसी स्वतंत्र व्यवस्था से कराई जानी चाहिए, जो शिकायत में नामित अधिकारियों के प्रत्यक्ष नियंत्रण और प्रभाव से मुक्त हो। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।
कार्यालय में स्पष्टीकरण की कार्रवाई पर सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवाद से जुड़े आरोपों के संदर्भ में उन्हें कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने की स्थिति का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि इस दौरान उनके चरित्र और उनकी नाबालिग पुत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
महिला ने इस कार्रवाई के औचित्य और प्रशासनिक आधार पर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट करने की मांग की है कि उनसे स्पष्टीकरण लेने का निर्णय किस परिस्थिति में लिया गया, इसके पीछे क्या नियम या आदेश थे और पूरी प्रक्रिया में निर्धारित प्रशासनिक मर्यादाओं का पालन किया गया या नहीं।
उनकी मांग है कि संबंधित फाइलों, आदेशों, नोटशीटों और पत्राचार की जांच कर यह पता लगाया जाए कि कार्रवाई किसके निर्देश पर शुरू हुई और उसका वास्तविक प्रशासनिक उद्देश्य क्या था।
नाबालिग के जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कैसे हुआ?
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू महिला की नाबालिग पुत्री के जन्म संबंधी निजी अभिलेखों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुत्री के जन्म प्रमाणपत्र और उसमें सुधार के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का विवादित आरोपों के संदर्भ में उपयोग किया गया।
महिला ने सवाल उठाया है कि ये दस्तावेज किस स्रोत से प्राप्त किए गए, इन्हें प्राप्त करने का उद्देश्य क्या था और क्या इनका इस्तेमाल किसी आवश्यक एवं वैध प्रशासनिक प्रयोजन तक सीमित रहा? उन्होंने यह भी जांचने की मांग की है कि कहीं इन निजी दस्तावेजों को अनावश्यक रूप से अन्य व्यक्तियों के साथ साझा तो नहीं किया गया।
यह पहलू इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि मामला एक नाबालिग बच्ची के जन्म और पारिवारिक विवरणों से संबंधित है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे अभिलेखों को अपमानजनक संदर्भ में प्रस्तुत किए जाने से बच्ची की निजता, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बच्ची की पहचान और संवेदनशील जानकारी के अनावश्यक सार्वजनिक प्रसार को रोकने की मांग की है।
तीन अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
शिकायत में संचालक संजीव झा, संयुक्त संचालक प्रेमलता चंदेल और डॉ. निधि अत्रिवाल की भूमिका की जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता चाहती हैं कि यह तथ्य अभिलेखों से स्पष्ट हो कि संबंधित कार्यालयीन कार्रवाई किस अधिकारी के निर्देश पर हुई, किन नियमों के तहत की गई और निर्णय लेने की प्रक्रिया में किस स्तर की भूमिका रही।
महिला ने प्रशासनिक अधिकारों के कथित अनुचित इस्तेमाल की आशंका जताते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित दस्तावेजों, आदेशों, पत्राचार और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाना चाहिए।
पीएमओ, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय आयोगों से हस्तक्षेप की मांग
महिला ने प्रधानमंत्री कार्यालय, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के साथ राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मामले में संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। शिकायत में मुख्य रूप से छह मांगें रखी गई हैं—
1. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच: शिकायत में नामित अधिकारियों के प्रत्यक्ष नियंत्रण और प्रभाव से मुक्त जांच व्यवस्था बनाई जाए, ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।
2. संबंधित अभिलेखों का संरक्षण: मामले से जुड़ी फाइलों, नोटशीटों, आदेशों, पत्राचार, स्पष्टीकरणों और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध रहें।
3. निजी दस्तावेजों की पड़ताल: नाबालिग के जन्म प्रमाणपत्र और उसमें सुधार के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत, प्राप्ति, उपयोग तथा कथित प्रसार की जांच की जाए।
4. प्रशासनिक जवाबदेही तय हो: लागू सेवा नियमों, निष्पक्ष प्रक्रिया और गोपनीयता से संबंधित दायित्वों के पालन की समीक्षा की जाए। यह भी स्पष्ट हो कि पूरी कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।
5. दोष प्रमाणित होने पर कार्रवाई: यदि जांच में किसी अधिकारी के स्तर पर नियमों का उल्लंघन, अनियमितता या अधिकारों का अनुचित उपयोग प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार विभागीय एवं अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए।
6. महिला और बच्ची की निजता की सुरक्षा: शिकायतकर्ता की गरिमा और उनकी नाबालिग पुत्री की पहचान एवं संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
शिकायतकर्ता ने कहा—बिना जांच किसी को दोषी ठहराने की मांग नहीं
महिला ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया है कि वह किसी अधिकारी को बिना जांच दोषी घोषित करने की मांग नहीं कर रही हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि मामले की जांच पद और प्रभाव से परे होकर की जाए तथा प्रत्येक प्रशासनिक निर्णय का आधार संबंधित अभिलेखों से स्पष्ट हो।
उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अधिकारों का दुरुपयोग सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उनकी नाबालिग पुत्री से जुड़े निजी अभिलेखों के इस्तेमाल और कथित प्रसार की परिस्थितियों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
इस पूरे मामले में कुछ बुनियादी सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना जरूरी है—
महिला कर्मचारी से व्यक्तिगत आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण लेने की प्रशासनिक आवश्यकता क्या थी और उसका वैधानिक आधार क्या था?
नाबालिग के जन्म संबंधी निजी अभिलेख किसने, किस स्रोत से और किस उद्देश्य से प्राप्त किए?
क्या संबंधित दस्तावेजों का उपयोग केवल आवश्यक एवं सीमित प्रशासनिक उद्देश्य के लिए किया गया?
क्या दस्तावेजों को अन्य व्यक्तियों के साथ साझा किया गया? यदि हां, तो किस आधार पर और किन परिस्थितियों में?
क्या पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता, गोपनीयता और लागू सेवा नियमों का पालन हुआ?
संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या रही और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो क्या कार्रवाई की जाएगी?
अब जांच और प्रशासनिक जवाबदेही पर निगाह
स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय से जुड़ी इस शिकायत में महिला की गरिमा, नाबालिग की निजता और सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के साथ-साथ दस्तावेजों के इस्तेमाल की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की मांग की है।

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