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बिलासपुर सिम्स में एक साथ बदले दोनों घुटने, मोबाइल बेयरिंग इम्प्लांट से दर्द से राहत और बेहतर चाल की उम्मीद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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आधुनिक तकनीक से जटिल सर्जरी को अंजाम, अस्थि रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने संभाली जिम्मेदारी; सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास पर जोर
बिलासपुर। घुटनों के असहनीय दर्द और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रहे मरीजों के उपचार की दिशा में छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में आधुनिक चिकित्सा तकनीक के जरिए महत्वपूर्ण सर्जरी की गई। सिम्स के अस्थि रोग विभाग में मोबाइल बेयरिंग इम्प्लांट तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक मरीज के दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सा की भाषा में इसे बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट कहा जाता है। इस जटिल शल्य प्रक्रिया का उद्देश्य मरीज को घुटनों के दर्द से राहत दिलाना और उसकी चलने-फिरने की क्षमता में सुधार लाना है।
खास बात यह है कि दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण एक ही सर्जिकल प्रक्रिया में किया गया। सिम्स में आधुनिक इम्प्लांट तकनीक के इस्तेमाल से की गई यह सर्जरी संस्थान में जोड़ प्रत्यारोपण सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, सर्जरी के बाद मिलने वाला लाभ मरीज की शारीरिक स्थिति, इम्प्लांट की सही स्थिति, घुटने के लिगामेंट के संतुलन और नियमित पुनर्वास पर निर्भर करता है।
मोबाइल बेयरिंग तकनीक क्या है, कैसे करती है काम?
घुटना प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाली मोबाइल बेयरिंग तकनीक की खासियत इम्प्लांट के भीतर मौजूद पॉलीएथिलीन की विशेष गद्दी है। पारंपरिक फिक्स्ड बेयरिंग इम्प्लांट में यह गद्दी अपनी जगह पर स्थिर रहती है, जबकि मोबाइल बेयरिंग डिजाइन में इसे सीमित रूप से घूमने या खिसकने की सुविधा दी जाती है।
इस डिजाइन का उद्देश्य घुटने के जोड़ की गति को अधिक स्वाभाविक बनाने और प्रत्यारोपित जोड़ पर पड़ने वाले दबाव को बेहतर तरीके से वितरित करने में मदद करना है। हालांकि, हर मरीज में इसके परिणाम समान नहीं होते। बेहतर नतीजों के लिए सही मरीज का चयन, इम्प्लांट का सटीक प्रत्यारोपण और घुटने के लिगामेंट का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने की सर्जरी
सिम्स के अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ए.आर. बेन के नेतृत्व में यह सर्जरी की गई। ऑपरेशन को डॉ. तरुण सिंह और डॉ. रौनक ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। पीजी रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. आकर्ष गुप्ता और डॉ. राहुल ने भी सर्जरी तथा मरीज की देखभाल में योगदान दिया।
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया प्रबंधन की जिम्मेदारी डॉ. मधुमिता मूर्ति और उनकी टीम ने संभाली। इस तरह की जटिल शल्य प्रक्रिया में अस्थि रोग विशेषज्ञों के साथ एनेस्थीसिया टीम का समन्वय महत्वपूर्ण होता है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की हृदय गति, रक्तचाप, ऑक्सीजन स्तर और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक मानकों की लगातार निगरानी की गई, ताकि सर्जरी के दौरान उसकी स्थिति पर नजर रखी जा सके।
सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी भी उपचार का अहम हिस्सा
दोनों घुटनों के प्रत्यारोपण के बाद मरीज की देखभाल केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहती। दर्द को नियंत्रित करना, घुटनों की गति धीरे-धीरे बढ़ाना और आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चिकित्सकीय निगरानी में मरीज को उसकी स्थिति के अनुरूप पुनर्वास कराया जाता है। इसमें घुटनों को मोड़ने-सीधा करने के अभ्यास, बैठने और खड़े होने की प्रक्रिया तथा धीरे-धीरे चलने का प्रशिक्षण शामिल हो सकता है। इन गतिविधियों की शुरुआत और उनकी तीव्रता मरीज की स्थिति तथा चिकित्सकीय आकलन के अनुसार तय की जाती है।
नियमित फिजियोथेरेपी और विशेषज्ञों की सलाह का पालन करने से मरीज को दैनिक गतिविधियों में दोबारा भाग लेने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण होने के कारण पुनर्वास की योजना मरीज की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
अधिष्ठाता बोले- सुरक्षित और आधुनिक उपचार प्राथमिकता
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में मरीजों को सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। जटिल जोड़ प्रत्यारोपण में विशेषज्ञ चिकित्सकों और एनेस्थीसिया टीम के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ मरीज की जरूरत के अनुरूप उपचार और सर्जरी के बाद पुनर्वास पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और वे बेहतर स्वास्थ्य के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
चिकित्सा अधीक्षक ने भी बताई टीमवर्क की अहमियत
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि संस्थान में विभिन्न विभागों के समन्वय से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण एक जटिल शल्य प्रक्रिया है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों, एनेस्थीसिया टीम और पुनर्वास सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जटिल सर्जरी के दौरान उपचार की गुणवत्ता के साथ मरीज की स्थिति की निगरानी और ऑपरेशन के बाद व्यवस्थित देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
जोड़ प्रत्यारोपण सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम
सिम्स के अस्थि रोग विभाग में मोबाइल बेयरिंग इम्प्लांट तकनीक से दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण आधुनिक जोड़ प्रत्यारोपण सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस सर्जरी में विशेषज्ञ चिकित्सकों, एनेस्थीसिया टीम और पीजी रेजिडेंट चिकित्सकों ने समन्वय के साथ भूमिका निभाई।
आधुनिक इम्प्लांट के साथ सटीक शल्य प्रक्रिया, मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार और व्यवस्थित पुनर्वास पर जोर देकर दर्द कम करने तथा गतिशीलता में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। मरीज की आगे की रिकवरी और दैनिक गतिविधियों में वापसी का आकलन उसकी चिकित्सकीय स्थिति तथा पुनर्वास की प्रगति के आधार पर किया जाएगा।

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