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बिलासपुर सराफा मार्केट आधे दिन बंद, व्यापारियों का पैदल मार्च; सोने की शुद्धता के कथित मामले पर केंद्र से निष्पक्ष जांच की मांग

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
8 Min Read

‘सस्ता सोना’, ‘Zero Making Charge’ और ‘Exchange Offer’ पर उठे सवाल; 22 कैरेट HUID वाले आभूषण को 20 कैरेट बताए जाने के कथित मामले के बाद गरमाया मुद्दा
बिलासपुर। सोने की कीमतों के बीच बिलासपुर का सराफा बाजार अब सोने की शुद्धता, ज्वेलरी कारोबार में पारदर्शिता और बड़े ब्रांडेड शोरूम के आकर्षक ऑफर्स को लेकर चर्चा में है। छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के आह्वान पर बिलासपुर सराफा मार्केट आधे दिन बंद रहा और व्यापारियों ने पैदल मार्च कर अपनी मांगों को सामने रखा। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से भेजकर देशभर में ज्वेलरी कारोबार की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


एसोसिएशन ने स्थानीय सराफा व्यापारियों और पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्था लागू करने की मांग भी की है। इसी बीच बिलासपुर के एक बड़े ज्वेलरी शोरूम से जुड़े अगस्त माह के कथित मामले ने सोने की शुद्धता की जांच और ग्राहकों को दी जाने वाली जानकारी को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।


आधे दिन बाजार बंद, व्यापारियों ने किया पैदल मार्च
सराफा कारोबारियों ने बाजार बंद रखकर अपनी मांगों और चिंताओं को सामने रखा। इसके बाद व्यापारियों ने पैदल मार्च किया। एसोसिएशन का कहना है कि ज्वेलरी कारोबार में प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है, लेकिन ग्राहक को सोने की वास्तविक शुद्धता, कीमत, मेकिंग चार्ज और ऑफर्स की शर्तों की स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। साथ ही लंबे समय से कारोबार कर रहे स्थानीय व्यापारियों और पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के हितों की सुरक्षा भी आवश्यक है।

‘सस्ता सोना’ और ‘जीरो मेकिंग चार्ज’ पर सवाल
बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम द्वारा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ‘सस्ता सोना’, ‘Zero Making Charge’ और ‘Exchange Offer’ जैसे विज्ञापन और ऑफर्स दिए जा रहे हैं। सराफा एसोसिएशन ने इन ऑफर्स की वास्तविक शर्तों और अंतिम कीमत की गणना को लेकर पारदर्शिता की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी ऑफर को देखने के बाद ग्राहक के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसे आभूषण की अंतिम कीमत किस आधार पर चुकानी है, मेकिंग चार्ज की वास्तविक स्थिति क्या है और आभूषण की शुद्धता कितनी है।
22 कैरेट HUID वाले आभूषण को 20 कैरेट बताए जाने का दावा
विवाद का एक प्रमुख बिंदु बिलासपुर के Malabar Gold & Diamonds शोरूम से जुड़ा अगस्त माह का कथित मामला है। एसोसिएशन के मुताबिक, एक ग्राहक के 22 कैरेट HUID युक्त स्वर्ण आभूषण की शोरूम में जांच के दौरान उसे 20 कैरेट बताया गया।
एसोसिएशन का दावा है कि इसके बाद संबंधित सराफा व्यापारी द्वारा आभूषण की दोबारा जांच कराई गई, जिसमें भी कथित तौर पर वही स्थिति सामने आई। इसी मामले को एसोसिएशन ने सोने की शुद्धता की जांच और ग्राहक को दी जाने वाली जानकारी से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग के आधार के रूप में उठाया है।
हालांकि, यह मामला सराफा एसोसिएशन की ओर से उठाया गया कथित मामला है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
HUID और हॉलमार्क व्यवस्था पर भी चर्चा
सराफा कारोबारियों ने सोने की शुद्धता को लेकर HUID और हॉलमार्क व्यवस्था को ग्राहक के भरोसे का महत्वपूर्ण आधार बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि किसी HUID युक्त आभूषण की शुद्धता को लेकर अलग-अलग जांच में अंतर सामने आने का दावा किया जाता है, तो ऐसे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए।
व्यापारियों का कहना है कि जांच की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे ग्राहक के मन में आभूषण की शुद्धता को लेकर किसी तरह का संशय न रहे और ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों की साख भी प्रभावित न हो।
प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा ज्ञापन
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से भेजा है। इसमें पूरे देश में ज्वेलरी कारोबार की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में स्थानीय सराफा व्यापारियों और पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्था लागू करने की मांग भी शामिल है। एसोसिएशन का कहना है कि ग्राहक हित और पारंपरिक कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन जरूरी है।
बड़े ब्रांडेड शोरूम से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
सराफा एसोसिएशन ने कहा है कि ज्वेलरी बाजार में बड़े ब्रांडेड शोरूम का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। विज्ञापन और आकर्षक ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है। ऐसे माहौल में स्थानीय सराफा व्यापारियों और पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ी है।
एसोसिएशन के मुताबिक, स्थानीय सराफा व्यापारी और पारंपरिक स्वर्ण कारीगर लंबे समय से इस कारोबार का हिस्सा रहे हैं। इसलिए ऐसी नीति की आवश्यकता है, जिसमें ग्राहक हित, कारोबार में पारदर्शिता और पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के हित—तीनों का संतुलन बना रहे।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें
देशभर में ज्वेलरी कारोबार की निष्पक्ष जांच।
सोने की शुद्धता की जांच में पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था।
ग्राहक को सोने की वास्तविक शुद्धता की स्पष्ट जानकारी।
ज्वेलरी की कीमत और मेकिंग चार्ज की पारदर्शी जानकारी।
‘Zero Making Charge’ और ‘Exchange Offer’ जैसे विज्ञापित ऑफर्स की वास्तविक शर्तें स्पष्ट करने की व्यवस्था।
स्थानीय सराफा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा।
पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के हितों के लिए ठोस कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्था।
HUID और हॉलमार्क व्यवस्था के प्रति ग्राहकों का भरोसा कायम रखने की प्रभावी व्यवस्था।
जिस कथित मामले ने बढ़ाई चर्चा
आभूषण: 22 कैरेट HUID युक्त बताया गया
शोरूम में जांच: एसोसिएशन के मुताबिक 20 कैरेट बताए जाने का दावा
दोबारा जांच: संबंधित व्यापारी द्वारा पुनः जांच कराए जाने पर भी कथित तौर पर यही स्थिति सामने आने का दावा
मामला: बिलासपुर के Malabar Gold & Diamonds शोरूम से जुड़ा अगस्त माह का कथित मामला
स्थिति: एसोसिएशन की ओर से उठाया गया मामला, स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
सवाल ऑफर का नहीं, पारदर्शिता का
सराफा एसोसिएशन ने ‘सस्ता सोना’, ‘Zero Making Charge’ और ‘Exchange Offer’ जैसे ऑफर्स को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि ग्राहक के लिए केवल विज्ञापन आकर्षक होना पर्याप्त नहीं है। उसे यह भी स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि ऑफर की वास्तविक शर्तें क्या हैं, आभूषण की अंतिम कीमत किस तरह तय होगी, मेकिंग चार्ज कितना है और सोने की शुद्धता क्या है।
व्यापारियों का कहना
सराफा कारोबारियों के मुताबिक सोने के कारोबार की सबसे बड़ी पूंजी ग्राहक का विश्वास है। किसी आभूषण की शुद्धता को लेकर अलग-अलग जांच में अंतर की बात सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। एसोसिएशन का कहना है कि किसी एक संस्थान को निशाना बनाना उद्देश्य नहीं है, बल्कि पूरे ज्वेलरी कारोबार में शुद्धता, कीमत, मेकिंग चार्ज और विज्ञापित ऑफर्स को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करना उद्देश्य है।

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