Latest news

छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 12 की कमान ‘नारी शक्ति’ के हाथ, नई तबादला सूची के बाद 12 जिलों में महिला कलेक्टर; सक्ती, कवर्धा और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी को मिली नई महिला IAS—कानून-व्यवस्था से विकास तक संभाल रहीं जिले की कमान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक तस्वीर में महिला नेतृत्व की मौजूदगी अब दूर से दिखाई देने लगी है। प्रदेश के 33 जिलों में 12 जिलों की कलेक्टरी महिला IAS अधिकारियों के हाथों में है। 18 अगस्त को जारी प्रशासनिक फेरबदल के बाद तीन और जिलों—सक्ती, कबीरधाम (कवर्धा) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी—की कमान महिला अधिकारियों को सौंपे जाने से जिला प्रशासन में महिला नेतृत्व का दायरा और स्पष्ट हुआ है।
यह बदलाव महज तबादलों और पदस्थापना की सूची नहीं है। जिला प्रशासन की सबसे अहम कुर्सी पर बैठी ये अधिकारी कानून-व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व प्रशासन और आम लोगों से जुड़े फैसलों में सीधे नेतृत्व कर रही हैं।
नई पोस्टिंग ने बदली तस्वीर, तीन जिलों में महिला कलेक्टर
18 अगस्त की प्रशासनिक तबादला सूची में जयश्री जैन को सक्ती, तुलिका प्रजापति को कबीरधाम (कवर्धा) और तनुजा सलाम को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का कलेक्टर नियुक्त किया गया है।
इन नई पदस्थापनाओं के साथ प्रदेश के उन जिलों की संख्या बढ़कर 12 हो गई, जहां कलेक्टर की जिम्मेदारी महिला IAS अधिकारियों के पास है।


33 में 12 जिले—कहां कौन संभाल रहा प्रशासन
जिलामहिला कलेक्टरकोंडागांवनुपूर राशि पन्नाबेमेतराप्रतिष्ठा ममगईनारायणपुरनम्रता जैनसूरजपुररैना जमीलबालोददिव्या मिश्रासक्तीजयश्री जैनकवर्धातुलिका प्रजापतिसारंगढ़पद्मिनी भोई साहूमोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकीतनुजा सलामबलरामपुरचंदन संजय त्रिपाठीमनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुरसंतन देवी जांगड़ेकोरियारोक्तिमा यादव
एक नजर में आंकड़ा: हर चार में से एक से ज्यादा जिले महिला कलेक्टर के पास
33 जिलों वाले छत्तीसगढ़ में 12 जिलों की कमान महिला अधिकारियों के पास होने का अर्थ है कि लगभग 36 प्रतिशत जिलों में महिला IAS अधिकारी जिला प्रशासन का नेतृत्व कर रही हैं।
यानी प्रदेश के प्रशासनिक नक्शे पर हर तीन जिलों में करीब एक जिले की कमान महिला अधिकारी के हाथ में है। यह तस्वीर जिला स्तर पर महिला नेतृत्व की मजबूत होती भूमिका को सामने लाती है।
सिर्फ राजधानी नहीं, दूरस्थ जिलों तक महिला नेतृत्व
इस बदलाव की खास बात यह है कि महिला कलेक्टरों की मौजूदगी केवल बड़े या प्रमुख शहरी जिलों तक सीमित नहीं है।
नारायणपुर, कोंडागांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जैसे भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से अलग-अलग चुनौतियों वाले जिलों में भी महिला IAS अधिकारी जिला प्रशासन की कमान संभाल रही हैं।
इससे महिला नेतृत्व की तस्वीर राजधानी और बड़े शहरों से निकलकर राज्य के मैदानी और दूरस्थ इलाकों तक दिखाई देती है।
कानून-व्यवस्था से लेकर विकास की फाइलों तक अहम जिम्मेदारी
कलेक्टर जिले में सरकार और प्रशासन के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होता है। महिला कलेक्टर भी अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था, राजस्व प्रशासन, विकास योजनाओं की निगरानी, सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में नेतृत्व कर रही हैं।
जिला प्रशासन की रोजमर्रा की व्यवस्था से लेकर आपदा प्रबंधन, चुनावी दायित्व, राजस्व मामलों और शासन की योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग तक कलेक्टर की भूमिका व्यापक होती है।
ऐसे में 12 जिलों में महिला IAS अधिकारियों की मौजूदगी प्रशासनिक व्यवस्था में महिला नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है।
नारी शक्ति की प्रशासनिक तस्वीर—12 नाम, 12 जिले
कोंडागांव में नुपूर राशि पन्ना, बेमेतरा में प्रतिष्ठा ममगई, नारायणपुर में नम्रता जैन, सूरजपुर में रैना जमील, बालोद में दिव्या मिश्रा, सक्ती में जयश्री जैन, कवर्धा में तुलिका प्रजापति, सारंगढ़ में पद्मिनी भोई साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में तनुजा सलाम, बलरामपुर में चंदन संजय त्रिपाठी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में संतन देवी जांगड़े और कोरिया में रोक्तिमा यादव—ये 12 नाम अब प्रदेश के प्रशासनिक नक्शे पर महिला नेतृत्व की पहचान बन रहे हैं।
इनमें से कुछ अधिकारी अपेक्षाकृत नए जिलों और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, तो कुछ ऐसे जिलों का प्रशासन देख रही हैं जहां विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानून-व्यवस्था और जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे प्रशासन के सामने प्रमुख रहते हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रशासन में नेतृत्व का बड़ा संदेश
जिला प्रशासन की कमान संभाल रहीं महिला IAS अधिकारियों की यह संख्या सरकारी सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की तस्वीर भी पेश करती है। प्रशासनिक सेवा में प्रवेश के बाद अब महिला अधिकारी जिला स्तर पर निर्णय लेने वाली शीर्ष भूमिकाओं में दिखाई दे रही हैं।
यह तस्वीर उन युवतियों के लिए भी प्रेरक है जो सिविल सेवा को अपना करियर बनाना चाहती हैं। कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंची ये अधिकारी दिखाती हैं कि प्रशासनिक नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका अब प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निर्णय और क्रियान्वयन के केंद्र में है।
तबादला सूची से आगे की कहानी
18 अगस्त की तबादला सूची ने सिर्फ तीन जिलों के नए कलेक्टरों के नाम नहीं बदले, बल्कि प्रदेश के प्रशासनिक नक्शे पर महिला नेतृत्व का एक नया पैटर्न भी सामने रखा।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।