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गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में जमीन आवंटन का फैसला वापस, विरोध के बीच 5 एकड़ जमीन का प्रस्ताव निरस्त

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर | गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर की करीब पांच एकड़ जमीन अग्रवाल समाज को महाराजा अग्रसेन की स्मृति में उद्यान एवं प्रेरणा स्मारक विकसित करने के लिए आवंटित करने के प्रस्ताव को विश्वविद्यालय ने वापस ले लिया है। विद्यापरिषद की स्थायी समिति की 2 अगस्त को हुई 247वीं बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया था। इसके बाद सतनामी समाज और NSUI की ओर से प्रस्ताव का विरोध किया गया। सोमवार को सतनामी समाज के धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब की मौजूदगी में सामाजिक पदाधिकारियों, बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों, अधिकारियों-कर्मचारियों और राजमहंतों की बैठक हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय की विद्यापरिषद की स्थायी समिति की 248वीं बैठक बुलाई गई, जिसमें पूर्व में लिए गए निर्णय को अपास्त कर दिया गया।


धर्मगुरु बालदास साहेब की बैठक के बाद कुलपति से मिला प्रतिनिधिमंडल
सतनामी समाज की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब ने बिलासपुर में सामाजिक चिंतकों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों-कर्मचारियों, प्रोफेसरों और वरिष्ठ सामाजिकजनों के साथ आवश्यक बैठक की। बैठक में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमि के आवंटन अथवा हस्तांतरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग रखी गई।
समाज की ओर से कहा गया कि परमपूज्य बाबा गुरु घासीदास के सिद्धांतों के अनुरूप विश्वविद्यालय की भूमि का उपयोग जनहित और विद्यार्थियों के व्यापक हित में होना चाहिए। साथ ही भविष्य में भी विश्वविद्यालय की भूमि के इस तरह के आवंटन की प्रक्रिया नहीं किए जाने की बात कही गई।
इसके बाद डॉ. बसंत अंचल, कमल डहरिया, डॉ. एसएल निराला, दिनेश लहरे, जितेंद्र पाटले, डॉ. मोहन शेंडे, डॉ. पीएल आदिले, सुरेश दिवाकर, एचआर मनहर, दशेराम खांडे और जीपी भास्कर सहित प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल और कुलपति के बीच चर्चा के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से पूर्व में लिए गए भूमि आवंटन संबंधी निर्णय को निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को निरस्तीकरण प्रस्ताव की प्रति भी उपलब्ध कराई गई।
10 अगस्त की बैठक में 247वीं बैठक का निर्णय अपास्त
विश्वविद्यालय की विद्यापरिषद की स्थायी समिति की 248वीं बैठक 10 अगस्त को हुई। इसमें 2 अगस्त को हुई 247वीं बैठक के विषय क्रमांक 7 में लिए गए उस निर्णय को अपास्त कर दिया गया, जिसमें अग्रवाल समाज को उद्यान विकसित करने और महाराजा अग्रसेन वाटिका के निर्माण के लिए भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव था।
इस निर्णय के बाद सतनामी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर में गुरु घासीदास के विचारों और संदेशों को स्थायी रूप से प्रदर्शित करने से संबंधित प्रस्ताव भी कुलपति के समक्ष रखे।
42 अमृत वाणियां और 7 दिव्य संदेश लगाने का प्रस्ताव
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर में गुरु घासीदास जी की 42 अमृत वाणियां और 7 दिव्य संदेश स्थायी रूप से अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शित करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में भव्य और सम्मानजनक जय स्तंभ स्थापित करने की बात भी रखी गई।
समाज की ओर से कहा गया कि देशभर से विश्वविद्यालय में पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को गुरु घासीदास जी के सिद्धांतों और विचारों से प्रेरणा मिल सके, इसके लिए परिसर में उनके संदेशों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, कुलपति ने इन प्रस्तावों को सहर्ष स्वीकार किया और विश्वविद्यालय परिसर को गुरु घासीदास जी के आदर्शों के अनुरूप विकसित करने की बात कही।
कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को विश्वविद्यालय में स्थापित गुरु घासीदास शोध पीठ की गतिविधियों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि शोध पीठ से कई रिसर्च पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं।
सतनामी समाज ने कुलपति से माफी की मांग की
बैठक में धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब और उपस्थित बुद्धिजीवियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति से इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगने की बात कही। समाज की ओर से कहा गया कि जिस गुरु घासीदास जी के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है, उनके विचारों और सिद्धांतों के अनुरूप विश्वविद्यालय की भूमि एवं परिसर का उपयोग होना चाहिए।
NSUI ने भी किया प्रदर्शन, प्रशासनिक भवन के गेट तोड़ने का आरोप


भूमि आवंटन के मुद्दे को लेकर NSUI ने भी विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। संगठन ने अग्रवाल समाज को जमीन देने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन का उपयोग गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
NSUI जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता विश्वविद्यालय पहुंचे और कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन ने जमीन आवंटन से संबंधित प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया, संबंधित फाइल और बैठक की कार्यवाही की जांच की मांग की।
NSUI का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन लेने में देरी हुई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक भवन के दोनों गेट तोड़ दिए। बाद में अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन स्वीकार किया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
‘विरोध किसी समाज के खिलाफ नहीं’
NSUI जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा कि संगठन का विरोध किसी समाज विशेष के खिलाफ नहीं है। मुद्दा विश्वविद्यालय की जमीन के गैर-शैक्षणिक उपयोग का है। उन्होंने कहा कि केवल प्रस्ताव को निरस्त करना पर्याप्त नहीं है। जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया, संबंधित फाइल और बैठक की कार्यवाही की जांच होनी चाहिए तथा कुलपति से पूरे मामले में जवाब मांगा जाना चाहिए।
बैठक में ये सामाजिकजन रहे मौजूद
सतनामी समाज की बैठक में जितेंद्र पाटले, डॉ. एसएल निराला, डॉ. केके बंजारे, चंद्रशेखर बंजारे, सुरेश दिवाकर, विजय डहरिया, देवेंद्र गढ़ेवाल, आरएस टंडन, मधुकर घृतलहरे, नरेश घृतलहरे, अनिल बघेल, नेमसिंह बारमते, दिलहरण बंजारे, रंजीत खांडे, डॉ. मोहन शेंडे, हिरावन बंजारे, राजमहंत दशेराम खांडे, जीपी भास्कर, एचआर मनहर, एसएल जोगी, डॉ. आदिले, दिनेश लहरे, मोहन महिलांग, सुखीराम सांडे, कन्हैया मधुकर, सुकृता कुर्रे, अंजू कुर्रे, रामभजन और एसएन शिव सहित अन्य सामाजिकजन उपस्थित रहे।

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