चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस से कार्यकर्ताओं का पलट सवाल- अपने संगठन में ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ क्यों नहीं?
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव अब संगठन के भीतर ही राजनीतिक बहस का मुद्दा बनते जा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। आरोप है कि चुनाव शुरू होने के बाद नियमों और फैसलों में बदलाव किए गए, जिससे कुछ दावेदारों के सामने असमंजस और असमान अवसर की स्थिति बनी।
सबसे ज्यादा सवाल सिंगल विधानसभा वाले जिलों को लेकर उठ रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव अधिकारियों की ओर से पहले स्पष्ट किया गया था कि इन जिलों में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव नहीं होगा। इसी आधार पर कई कार्यकर्ताओं ने अपनी रणनीति बदली, कुछ ने नामांकन नहीं किया और कुछ नामांकन निरस्त हुए। अब नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद उन्हीं स्थानों पर चुनाव कराने का फैसला सामने आया है।







सोशल मीडिया पर मचा हुआ है बवाल।
राजनीतिक सवाल यही है कि जब नियमों के आधार पर उम्मीदवारों ने अपनी तैयारी की, तो नियम बदलने के बाद उन्हें बराबरी का नया अवसर क्यों नहीं दिया गया?
कांग्रेस की सियासत पर ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का सवाल
इस मामले ने कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कांग्रेस लगातार देश में लोकतंत्र, पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव की पैरवी करती है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी के नेता सवाल उठाते रहे हैं।
अब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इसी तर्क को संगठन के भीतर सामने रखते हुए सवाल किया है- अगर लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरूरी हैं तो इसकी शुरुआत अपने संगठन से क्यों नहीं होनी चाहिए?
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बाहर चुनावी संस्थाओं पर सवाल और भीतर संगठनात्मक चुनाव में नियमों को लेकर अस्पष्टता- यह स्थिति राजनीतिक रूप से असहज करने वाली है।
मैपिंग से लेकर रेफरल और आरक्षण तक सवाल
विवाद केवल सिंगल विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं है। कार्यकर्ताओं ने मैपिंग, ब्लॉक परिसीमन, रेफरल नियम और आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन विषयों पर लगातार स्पष्टीकरण मांगा गया, ई-मेल और शिकायतें भेजी गईं, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
यही वजह है कि अब मामला केवल चुनाव लड़ने या हार-जीत का नहीं रह गया है। कार्यकर्ता इसे संगठन के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बता रहे हैं।
‘आंतरिक चुनाव’ कहकर सवालों से बचना कितना उचित?
जब चुनाव प्रक्रिया को लेकर मीडिया से जानकारी मांगी जाती है तो इसे युवा कांग्रेस का आंतरिक मामला बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि संगठन का चुनाव आंतरिक हो सकता है, लेकिन क्या अपने ही कार्यकर्ताओं के सवाल भी आंतरिक रखे जाएंगे?
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के मुताबिक है तो नियमों, बदलावों और फैसलों को स्पष्ट करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। इससे भ्रम भी दूर होगा और संगठन की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
अब राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर नजर
कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व से पूरे मामले की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में जहां-जहां नियम बदले गए हैं, वहां सभी उम्मीदवारों को समान अवसर दिया जाए। खासकर सिंगल विधानसभा वाले क्षेत्रों में दोबारा नामांकन का अवसर देने की मांग जोर पकड़ रही है।
फिलहाल युवा कांग्रेस का यह चुनाव सिर्फ संगठनात्मक चुनाव नहीं रह गया है। यह कांग्रेस के लिए अपने ही संगठन में लोकतंत्र, पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बनता दिखाई दे रहा है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि लड़ाई किसी व्यक्ति या पद के खिलाफ नहीं, बल्कि इस सवाल पर है कि संगठन के भीतर भी वही लोकतांत्रिक मापदंड लागू होंगे या नहीं, जिनकी मांग कांग्रेस देश की राजनीति में करती रही है।

वर्जन — डॉ. स्मृति रंजन लेंका, प्रभारी, छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस
“युवा कांग्रेस का चुनाव संगठन का आंतरिक मामला है। चुनाव से जुड़ी सभी जानकारियां मीडिया के साथ साझा करना संभव नहीं है। चुनाव प्रक्रिया संगठन के निर्धारित नियमों के अनुसार ही संचालित की जा रही है।”



