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सिम्स में 78 वर्षीय महिला के एक किलो वजनी अंडाशय कैंसर ट्यूमर की सफल सर्जरी, आयुष्मान योजना से मिला मुफ्त इलाज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने पहली बार 78 वर्षीय महिला के अंडाशय में विकसित करीब एक किलो वजनी कैंसरयुक्त ट्यूमर की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह ऑपरेशन कई विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने किया। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रही हैं।
दर्रीघाट निवासी महिला पिछले पांच-छह महीने से पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द और तेजी से बढ़ रही पेट की गांठ से परेशान थीं। पहले वे एक निजी अस्पताल पहुंचीं, जहां जांच के बाद ऑपरेशन और इलाज का खर्च दो से तीन लाख रुपए बताया गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजन इलाज नहीं करा सके। इसके बाद मरीज को सिम्स लाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जांच के बाद आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और ऑपरेशन निःशुल्क किया।
15×12×10 सेंटीमीटर का कैंसर ट्यूमर, आसपास के अंगों पर पड़ रहा था दबाव
जांच में पता चला कि मरीज रजोनिवृत्ति के बाद की अवस्था में थीं और उनके बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का लगभग एक किलो वजनी कैंसरयुक्त ट्यूमर विकसित हो चुका था। ट्यूमर इतना बड़ा था कि आसपास के महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव पड़ने लगा था।
रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने सोनोग्राफी जांच में इस ट्यूमर की पुष्टि की। जांच के आधार पर चिकित्सकों ने इसे अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाला मामला माना।
एक साथ हुई कई जटिल सर्जरी
विशेषज्ञों की बहुविषयक टीम ने मरीज का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद 3 अगस्त 2026 को ऑपरेशन किया। इस दौरान एक साथ कई जटिल शल्य प्रक्रियाएं की गईं—
कैंसर की चरण निर्धारण (स्टेजिंग) सर्जरी
ट्यूमर भार कम करने (डेबल्किंग) की सर्जरी
गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालना
बाईं मूत्रवाहिनी (यूरेटर) की मरम्मत
बाईं मूत्रवाहिनी में डबल-जे स्टेंट प्रत्यारोपण
इन डॉक्टरों की रही अहम भूमिका
गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम में डॉ. संगीता रमन जोगी (विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर), डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा ने ऑपरेशन का नेतृत्व किया।
जनरल सर्जरी विभाग से डॉ. रघुराज सिंह (प्रोफेसर), डॉ. बी.डी. तिवारी (असिस्टेंट प्रोफेसर) और डॉ. गरिमा ने सहयोग दिया।
एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा ने ऑपरेशन को सुरक्षित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन के दौरान था भारी खतरा
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि इतने बड़े अंडाशय ट्यूमर की सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने के साथ मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और आंत जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। ऐसे मामलों में उच्च स्तरीय शल्य कौशल, सटीक एनेस्थीसिया प्रबंधन और ऑपरेशन के दौरान लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है। विशेषज्ञ टीम ने सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए ट्यूमर को सुरक्षित निकाल लिया।
दुर्लभ और उच्च जोखिम वाला मामला
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का अंडाशय कैंसर ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ और उच्च जोखिम वाली स्थिति होती है। ऐसे मामलों में समय पर सटीक जांच, विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों का समन्वय और आधुनिक कैंसर सर्जरी मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि सिम्स में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता के कारण अब ऐसे जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है। वहीं आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, जिससे उन्हें उच्चस्तरीय इलाज निःशुल्क मिल रहा है।
परिजनों ने जताया आभार
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार संतोषजनक बनी हुई है और वे चिकित्सकीय निगरानी में स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। सफल जीवनरक्षक उपचार और आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क इलाज मिलने पर मरीज के परिजनों ने सिम्स के डॉक्टरों और पूरे स्वास्थ्यकर्मी दल के प्रति आभार व्यक्त किया।
फैक्ट फाइल
मरीज की उम्र: 78 वर्ष
निवासी: दर्रीघाट, बिलासपुर
समस्या: बाएं अंडाशय में कैंसरयुक्त ट्यूमर
ट्यूमर का आकार: 15×12×10 सेमी
वजन: लगभग 1 किलोग्राम
ऑपरेशन की तिथि: 3 अगस्त 2026
इलाज: आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क
वर्तमान स्थिति: मरीज स्वस्थ, चिकित्सकीय निगरानी में स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं

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