


बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े इंटर्न, पीजी रेजिडेंट और युवा चिकित्सकों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर 5 अगस्त से प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। आंदोलन की शुरुआत पहले चरण में प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार से होगी। आंदोलन का आह्वान जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ ने किया है।
जेेडीए का कहना है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट और युवा चिकित्सक दिन-रात, अवकाश और त्योहारों में भी मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन वर्षों से लंबित उनकी न्यायोचित मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संगठन के अनुसार आंदोलन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भी हुई चर्चा, फिर भी नहीं निकला समाधान
जेेडीए ने बताया कि 17 सूत्रीय मांगों को लेकर कई बार शासन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर मांगों पर विस्तार से चर्चा भी की गई, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद अब तक कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
आंदोलन शुरू करने से पहले सिम्स बिलासपुर के डीन को विधिवत आवेदन देकर इसकी सूचना भी दी गई है। डीन ने आवेदन को उच्च अधिकारियों तक भेजने का आश्वासन दिया है।
17 सूत्रीय मांगों में स्टाइपेंड से लेकर वेतन विसंगति तक शामिल
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में इंटर्न, पीजी और सुपर स्पेशलिटी रेजिडेंट्स के लिए सम्मानजनक स्टाइपेंड, बॉन्डेड सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की वेतन विसंगति दूर करना, बॉन्ड व्यवस्था का तर्कसंगत समाधान, बॉन्ड राशि में कमी, पूर्व सेवा का समायोजन, सुपर स्पेशलिटी कैडर की स्थापना, आयुष्मान भारत प्रोत्साहन राशि का भुगतान, संविदा चिकित्सकों का वेतन पुनरीक्षण, डीए, टीए, एचआरए और एनपीए जैसे वैधानिक भत्ते, नियमित वेतन पुनरीक्षण प्रणाली, जूनियर और सीनियर रेजिडेंट्स की लंबित समस्याओं का समाधान, समयबद्ध बॉन्ड पोस्टिंग तथा छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों के अधिकारों की रक्षा सहित सभी 17 मांगें शामिल हैं।
‘स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने का संकल्प’
जेेडीए का कहना है कि उनकी 17 सूत्रीय मांगें केवल डॉक्टरों के हित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने से भी जुड़ी हुई हैं। संगठन के अनुसार यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन युवा डॉक्टरों पर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य टिका है, उन्हें अपने मूलभूत अधिकारों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
‘सरकार के खिलाफ नहीं, व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष’
संगठन ने कहा कि उनका संघर्ष सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए है। मरीजों को असुविधा पहुंचाना उनका उद्देश्य कभी नहीं रहा। डॉक्टर स्वयं समाज का हिस्सा हैं और मरीजों की पीड़ा को समझते हैं, लेकिन वर्षों तक संवाद, निवेदन और धैर्य के बाद भी समाधान नहीं निकलने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना उनका संवैधानिक अधिकार है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन का होगा अगला चरण
जेेडीए ने कहा है कि यदि समय रहते 17 सूत्रीय मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन के अगले चरणों की घोषणा की जाएगी। संगठन ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
डॉक्टरों का बयान
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा, “हम वे डॉक्टर हैं, जो हर दिन अनगिनत मरीजों की जिंदगी बचाने का प्रयास करते हैं। आज हमें अपनी आवाज़ बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हमारी मांगें विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं।”
यह जानकारी डॉ. रोहन कौशिक (जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन स्टूडेंट विंग, सिम्स बिलासपुर), डॉ. नागेंद्र साहू (JDA सिम्स बिलासपुर) और डॉ. योगेश्वर जायसवाल (जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़) की ओर से जारी की गई।



