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डिस्टलरी-इथेनॉल प्लांट विवाद: प्रभावितों को मंत्री ओपी चौधरी का बुलावा, 4 अगस्त को मंत्रालय में होगी अहम बैठक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मुंगेली के फ़ास्टरपुर क्षेत्र में प्रस्तावित 600 KLD डिस्टलरी, इथेनॉल, शुगर फैक्ट्री और पावर प्लांट का ग्रामीण कर रहे विरोध; दस्तावेज और साक्ष्यों के साथ मंत्रालय पहुंचेंगे प्रतिनिधि
मुंगेली। मुंगेली जिले के फ़ास्टरपुर क्षेत्र में प्रस्तावित आरएसएलडी बायोफ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड की 600 केएलडी क्षमता वाली डिस्टलरी, इथेनॉल फैक्ट्री, शुगर फैक्ट्री और पावर प्लांट परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रभावित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को प्रदेश के मंत्री ओपी चौधरी ने मंत्रालय में चर्चा के लिए बुलाया है। यह बैठक 4 अगस्त को शाम 4 बजे मंत्रालय स्थित विभागीय सभाकक्ष में आयोजित होगी।
जानकारी के अनुसार, पंजाब के एक उद्योगपति के स्वामित्व वाली आरएसएलडी बायोफ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मुंगेली जिले के फ़ास्टरपुर क्षेत्र अंतर्गत सिल्ली ग्राम पंचायत के आश्रित गांव नवागांव कैथ में 600 केएलडी क्षमता की डिस्टलरी, इथेनॉल प्लांट, शुगर फैक्ट्री और पावर प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
चार महीने से जारी है विरोध
प्रस्तावित परियोजना का पिछले लगभग चार महीनों से आसपास की 10 ग्राम पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि विरोध कर रहे हैं। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र के जल स्रोतों और पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र में हर वर्ष मार्च महीने से पेयजल संकट शुरू हो जाता है और गर्मी के मौसम में स्थिति गंभीर हो जाती है। उनका दावा है कि डिस्टलरी और इथेनॉल प्लांट के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जबकि क्षेत्र में न तो कोई नदी है और न ही कोई बड़ा जलाशय उपलब्ध है।
प्रतिनिधियों का आरोप है कि कंपनी अपनी जल आवश्यकता की पूर्ति के लिए भूमिगत जल का उपयोग करेगी और आधुनिक तकनीक के माध्यम से गहराई से पानी का दोहन करेगी। उनका कहना है कि इससे आसपास के 20 से अधिक गांवों में भूजल स्तर प्रभावित होने की आशंका है।
पर्यावरण अनुमति और भूमि को लेकर भी आपत्ति
विरोध कर रहे प्रतिनिधियों का आरोप है कि कंपनी ने पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन किए बिना तथा कई तथ्यों को छिपाकर पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की है। उनका यह भी कहना है कि पर्यावरण अनुमति से संबंधित नोटिस अब तक चस्पा नहीं किया गया है।
इसके अलावा प्रतिनिधियों का दावा है कि जिस भूमि पर परियोजना प्रस्तावित है, वह अभी कंपनी के नाम पंजीकृत नहीं है।
उच्च स्तर पर की गई शिकायत
परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रभावित पक्ष ने प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय, मुख्यमंत्री तथा छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरण मंत्री को शिकायत भेजी है। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात का भी अनुरोध किया गया था।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मंत्रालय में बैठक
प्रभावित पक्ष के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले में मंत्री ओपी चौधरी को प्रभावितों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं पर चर्चा करने के निर्देश दिए। इसके बाद मंत्री कार्यालय से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हेमंत अहिरे, अल्फ़ाज़ मसीह और प्रशांत मसीह से संपर्क कर उन्हें पंचायत प्रतिनिधियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ दस्तावेज और साक्ष्य लेकर 4 अगस्त को शाम 4 बजे मंत्रालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
बैठक में प्रस्तावित परियोजना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं और प्रभावित पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर चर्चा होने की संभावना है।

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