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रेलवे से चल रहा था नशे और अपराध का ‘साइलेंट कॉरिडोर’, अब CCTV, FRS और जॉइंट स्ट्राइक से अपराधियों पर शिकंजा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रेलवे स्टेशनों पर रात के अंधेरे में सक्रिय असामाजिक तत्व, ट्रेनों से ड्रग्स तस्करी और कबाड़ माफिया पर रेंज पुलिस का बड़ा ऑपरेशन प्लान… आईजी की हाईलेवल बैठक में कई अहम फैसले
बिलासपुर। रेलवे नेटवर्क को लंबे समय से अपराधियों का सबसे सुरक्षित ट्रांजिट रूट माना जाता रहा है। ट्रेनों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी, रेलवे संपत्ति की चोरी, कबाड़ नेटवर्क, संदिग्ध गतिविधियां और रात के समय स्टेशन परिसरों में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी जैसी चुनौतियों को देखते हुए अब बिलासपुर रेंज पुलिस ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है।
पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने रेलवे सुरक्षा को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF), शासकीय रेल पुलिस (GRP) और रेलवे लाइन से जुड़े जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक में स्पष्ट कर दिया कि अब रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों की आवाजाही का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि अपराधियों के लिए सबसे कठिन क्षेत्र बनाया जाएगा।
बैठक में रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील परिसरों में अत्याधुनिक CCTV कैमरे और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) लगाने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही जिला पुलिस को एक महीने के भीतर आदतन अपराधियों, नशा तस्करों और लापता बच्चों का डिजिटल डेटाबेस तैयार कर RPF को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्टेशन पर पहुंचते ही संदिग्ध चेहरों की पहचान हो सके।
रेलवे के जरिए गांजा, हेरोइन, सिंथेटिक ड्रग्स, नशीली टेबलेट और इंजेक्शन की तस्करी पर रोक लगाने के लिए RPF, GRP और जिला पुलिस की संयुक्त सरप्राइज चेकिंग टीम गठित करने का निर्णय लिया गया। यह टीम ट्रेनों और रेलवे परिसरों में लगातार संयुक्त कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही रेलवे सामग्री चोरी कर अवैध कबाड़ कारोबार करने वाले नेटवर्क पर भी विशेष अभियान चलाकर RPUP एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में रात के समय रेलवे स्टेशनों पर असामाजिक तत्वों के जमावड़े को गंभीर सुरक्षा चुनौती मानते हुए रात्रिकालीन गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से रात में रुकने वाली ट्रेनों की 100 प्रतिशत चेकिंग, स्टेशन परिसरों में खड़े लावारिस वाहनों की सघन जांच और संवेदनशील स्टेशनों पर अतिरिक्त सतर्कता लागू करने का फैसला लिया गया।
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘रेल मदद’ ऐप और RPF के सूचना नेटवर्क की भी समीक्षा की गई। महिला अपराध, चोरी, मानव तस्करी और अन्य आपराधिक घटनाओं में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए इस डिजिटल व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में रेलवे से जुड़े कई इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सक्ती के जेठा स्टेशन अंडरब्रिज की तकनीकी खामियों की संयुक्त जांच, पेंड्रा, खरसिया और सक्ती में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए ओवरब्रिज प्रस्ताव तथा बाराद्वार में संडे मार्केट के दौरान रेलवे फाटक पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए रेलवे वाई-फाई का दुरुपयोग कर भड़काऊ या आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वालों की पहचान के लिए विशेष साइबर मॉक ड्रिल आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य डिजिटल माध्यम से संचालित अपराधों पर त्वरित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
उच्चस्तरीय बैठक में एडीआरएम, RPF, GRP तथा बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सक्ती जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान रेलवे सुरक्षा को लेकर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और संयुक्त कार्रवाई की रणनीति पर विस्तृत समीक्षा की गई।

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