नगर निगम में विलय के बाद भी गोकुल नगर समेत आसपास के इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का संकट बरकरार, बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल… सड़क, नाली, पानी और स्ट्रीट लाइट के लिए भटक रहे हजारों रहवासी
बिलासपुर।
शहर का हिस्सा बनने का सपना दिखाकर नगर निगम में शामिल किए गए पूर्व ग्राम पंचायत और नगर पंचायत क्षेत्रों के हजारों रहवासी आज भी बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। निगम में विलय हुए छह साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई वार्डों की तस्वीर आज भी गांवों से बदतर नजर आती है। सड़कें टूटी हुई हैं, नालियां अधूरी हैं, पेयजल व्यवस्था लड़खड़ा रही है और स्ट्रीट लाइट के अभाव में रात होते ही अंधेरा दुर्घटनाओं को न्योता देने लगता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम इन क्षेत्रों से नियमित रूप से संपत्ति कर और अन्य टैक्स वसूल रहा है, तो बदले में नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं आखिर क्यों नहीं मिल पा रही हैं? स्थानीय लोगों का आरोप है कि टैक्स लेने में निगम कभी देरी नहीं करता, लेकिन सड़क, पानी और रोशनी की मांग पर सिर्फ आश्वासन मिलता है।
बारिश ने खोल दी विकास की हकीकत, हर रास्ता बना खतरे का रास्ता
लगातार हो रही बारिश ने इन इलाकों की बदहाली को और उजागर कर दिया है। जगह-जगह सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इन गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से यह पता ही नहीं चलता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसल रहे हैं, पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। कई कॉलोनियों में कीचड़ और जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना भी चुनौती बन गया है।
रात होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं कई वार्ड
समस्या केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें या तो लगी ही नहीं हैं या वर्षों से बंद पड़ी हैं। ऐसे में रात के समय दुर्घटनाओं और आपराधिक घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का निकलना जोखिम भरा हो गया है।
टीएनसी की मंजूरी बना विकास में सबसे बड़ा रोड़ा
नगर निगम का तर्क है कि जिन नई कॉलोनियों को टीएनसी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से स्वीकृति नहीं मिली है, वहां स्थायी विकास कार्य कराने में तकनीकी और कानूनी बाधाएं हैं। लेकिन रहवासियों का सवाल है कि यदि टैक्स लिया जा सकता है तो कम से कम बुनियादी सुविधाएं देने से पीछे क्यों हट रहा है निगम? लोगों का कहना है कि स्थायी निर्माण नहीं हो सकता तो अस्थायी मरम्मत कर उन्हें राहत जरूर दी जा सकती है।
जनप्रतिनिधि भी नाराज, बोले—बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हो रही सुनवाई
स्थानीय पार्षदों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम प्रशासन के सामने इन समस्याओं को रखा है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि हर बारिश में वही हालात दोहराए जाते हैं और लोग नारकीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हो जाते हैं।
वार्ड क्रमांक-4 गोकुल नगर के पार्षद महाबली कोसले ने क्षेत्र की स्थिति को “नरक नगर” बताते हुए कहा कि यहां लोगों को चलने तक में डर लगता है। उनके अनुसार सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं और रहवासी लगातार परेशान हैं।
निगम आयुक्त का दावा—जोन कार्यालयों को दिए गए हैं निर्देश
नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे का कहना है कि सभी जोन कार्यालयों को आवश्यक मरम्मत और मूलभूत सुविधाओं के कार्यों के लिए राशि आवंटित कर निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्राथमिकता के आधार पर जरूरी काम कराए जाएंगे।
सबसे बड़ा सवाल
नगर निगम में शामिल होने के छह साल बाद भी यदि नागरिकों को सड़क, नाली, पानी और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो आखिर शहर में शामिल होने का लाभ उन्हें मिला क्या? बारिश ने एक बार फिर विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ कर दिया है। फिलहाल रहवासियों की मांग सिर्फ इतनी है कि स्थायी समाधान में समय लगे तो लगे, लेकिन कम से कम टूटी सड़कों की मरम्मत, जलभराव से राहत और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, ताकि “नरक नगर” जैसी पहचान से उन्हें छुटकारा मिल सके।



