मुंगेली | विशेष संवाददाता
मुंगेली जिले के फ़ास्टरपुर क्षेत्र में प्रस्तावित आर एस एल डी बायोफ़्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड के 600 केएलडी डिस्टिलरी (शराब फैक्ट्री), इथेनॉल प्लांट, शुगर फैक्ट्री और पावर प्लांट के खिलाफ विरोध अब ग्रामीण स्तर से निकलकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप लेने लगा है। ग्राम पंचायत सिल्ली के आश्रित गांव नवागांव कैथ में प्रस्तावित परियोजना के विरोध में 15 से अधिक प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एक मंच पर आ गए हैं। बैठक में प्लांट का पुरजोर विरोध करने और मामले को रायपुर से लेकर नई दिल्ली तक उठाने का निर्णय लिया गया।




प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं मुंगेली जिले के संगठन प्रभारी रहे अर्जुन तिवारी की पहल पर ग्राम सिल्ली में आयोजित बैठक में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ कांग्रेस, भाजपा, बसपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित डिस्टिलरी और इथेनॉल प्लांट का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सहित चार मंत्रियों से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
बैठक में तय किया गया कि सर्वदलीय और सर्वसमाज प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी से रायपुर में मुलाकात कर परियोजना का विरोध दर्ज कराएगा और प्लांट की स्वीकृति पर पुनर्विचार की मांग करेगा।
साथ ही सभी राजनीतिक दल अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व से भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह करेंगे।
पर्यावरणीय स्वीकृति पर उठाए सवाल
बैठक में आरोप लगाया गया कि कंपनी प्रबंधन ने जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग के सहयोग से कथित रूप से निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) में वास्तविक तथ्यों को छिपाकर जनसुनवाई कराई और उसके आधार पर भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त कर ली।
बैठक में निर्णय लिया गया कि परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज और तथ्यों का संकलन कर उन्हें वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
NGT में भी दी जाएगी चुनौती
सर्वदलीय बैठक में यह भी तय हुआ कि परियोजना से संबंधित सभी तथ्यों और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में चुनौती दी जाएगी। इसके लिए कानूनी तैयारी शुरू करने पर भी सहमति बनी।
‘भूजल दोहन से पूरा क्षेत्र हो जाएगा बंजर’
बैठक में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि ग्राम पंचायत सिल्ली और आसपास के 15 से 20 गांव पहले से ही पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। यदि प्रस्तावित उद्योग को बड़े पैमाने पर भूजल दोहन की अनुमति दी गई तो फ़ास्टरपुर–श्वेतगंगा क्षेत्र में जल संकट और गंभीर हो जाएगा तथा कृषि और जनजीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करने के लिए नई दिल्ली भी जाएगा।
31 जुलाई को नागोपहरी में होगी अगली रणनीतिक बैठक
बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए 31 जुलाई को ग्राम पंचायत नागोपहरी में अगली सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।



