8 माह से खुले आसमान के नीचे बैठीं महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे; निगम पर पट्टा देने के नाम पर राशि लेकर अब बेदखली की तैयारी का आरोप

बिलासपुर। शहर के लिंगियाडीह में अपने मकान और दुकानों को बचाने की लड़ाई अब लंबी जन लड़ाई का रूप ले चुकी है। महज 35 ग्रामीणों से शुरू हुआ लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अब सैकड़ों परिवारों का आंदोलन बन गया है। रविवार को आंदोलन के 240 दिन यानी पूरे 8 माह पूरे हो गए। इस दौरान भीषण गर्मी से लेकर लगातार हो रही बारिश तक आंदोलनकारी खुले आसमान के नीचे धरने पर डटे हुए हैं। उनका आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद शासन और प्रशासन ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।
आंदोलनकारियों के अनुसार, अपोलो रोड, दुर्गा चौक और राजकिशोर नगर क्षेत्र में सैकड़ों महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और परिवार पिछले आठ महीने से लगातार धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन अब केवल मकानों को बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि वर्षों से बसे लोगों के अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।
50 साल पुराने मकानों-दुकानों पर कार्रवाई की तैयारी का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि नगर निगम “गार्डन और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स” विकसित करने के नाम पर करीब 50 वर्षों से बसे मकानों और दुकानों को हटाने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि इससे पहले भी सड़क और नाली निर्माण के नाम पर कई मकान और दुकानें तोड़ी जा चुकी हैं। अब एक बार फिर विकास कार्यों के नाम पर सैकड़ों परिवारों को बेघर करने की तैयारी की जा रही है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई का लाभ कुछ व्यापारिक हितों को पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि वर्षों से रह रहे परिवारों के पुनर्वास और अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
‘पट्टा देने के नाम पर पैसे लिए, रसीद भी दी, अब उजाड़ने की तैयारी’
धरने पर बैठे लोगों ने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निगम ने पूर्व में भूमि का पट्टा देने के नाम पर मकान मालिकों से राशि जमा कराई थी और उसकी रसीद भी दी गई थी। इसके बावजूद आज तक पट्टा जारी नहीं किया गया। अब उसी जमीन से लोगों को बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार निगम प्रशासन को आवेदन और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
35 लोगों से शुरू हुआ आंदोलन, अब बन गया जनआंदोलन
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन की शुरुआत सीमित संख्या में ग्रामीणों ने की थी, लेकिन समय के साथ इसे स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने लगा। आंदोलनकारी दावा कर रहे हैं कि अब यह संघर्ष जनआंदोलन का रूप ले चुका है और लगातार लोगों का समर्थन बढ़ रहा है।
‘पट्टा मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा’
धरना स्थल से आंदोलनकारियों ने स्पष्ट घोषणा की कि जब तक भूमि का वैध पट्टा नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा तथा इसे बड़े जन आंदोलन में तब्दील किया जाएगा।
धरने में बड़ी संख्या में लोग शामिल
धरने में यशोदा पाटिल, डॉ. रघु साहू, श्यामसुंदर कौशिक, अन्नपूर्णा ध्रुव, सुखमति बाई, पिंकी देवांगन, प्रीति साहू, लता देवांगन, ललिता मानिकपुरी, रामबाई मानिकपुरी, कुमारी कश्यप, साधना यादव, कल्पना यादव, बुधवारा अहिरवार, जानकी देवांगन, कुंती प्रजापति, जानकी गोंड, जानू गोंड, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, पिली बाई चौहान, सुशीला दुर्गा श्रीवास, अनीता, लीला, उर्मिला पाटिल, सीता केंवट, सोनिया केंवट, कौशिल्या मानिकपुरी, अनुपा श्रीवास, शिवकुमार देवांगन, अर्पणा पटेल, कुमारी रजक, चंद्रकली केंवट, शीला सिंह, पुष्पा देवांगन, सरस्वती देवांगन, राजकुमारी देवांगन, जयकुमार अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, नंदकुमारी देवांगन, गायत्री देवांगन, मालती मानिकपुरी, सावित्री यादव, सावित्री साहू, दिनेश यादव, सविता डे, रूपा डे, वंदना डे, शिवकुमारी साहू, प्रशांत मिश्रा सहित सैकड़ों आंदोलनकारी पिछले 240 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।



