





Bilaspur।
बिलासपुर में एक बार फिर सड़क निर्माण की गुणवत्ता कठघरे में है। शहर में हुई पहली तेज बारिश ने ही उस सड़क की हकीकत सामने ला दी, जिसे विकास की बड़ी उपलब्धि बताया गया था। नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बने 33 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच वार्ड क्रमांक-23 मदर टेरेसा में सत्यम चौक से मगरपारा जाने वाली मुख्य सड़क अचानक धंस गई। सड़क के बीच बने गहरे गड्ढे ने लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के कई घंटे बाद तक न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए।
बीच शहर धंसी सड़क… स्कूल मार्ग पर मंडराने लगा बड़ा खतरा
घटना वार्ड क्रमांक-23 मदर टेरेसा की है। सत्यम चौक से मगरपारा जाने वाला यह मार्ग इलाके की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल है। इसी सड़क के किनारे आत्मानंद स्कूल संचालित होता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का आना-जाना रहता है।
लगातार बारिश के बीच सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे बीच सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया। सड़क धंसने के बाद आवागमन प्रभावित हो गया और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
दो ऑटो हादसे, बच्चों की जान पर बनी… फिर भी जिम्मेदार गायब
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सड़क धंसने के बाद अब तक दो ऑटो इस गड्ढे की चपेट में आ चुके हैं। इनमें स्कूली बच्चे भी सवार थे। इसके अलावा कई दोपहिया वाहन भी असंतुलित होकर दुर्घटनाग्रस्त हुए।
राहगीरों का आरोप है कि हादसे के बाद भी न तो किसी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही तत्काल सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग या वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा, बोले—शहर में सड़कें नहीं, हादसों के जाल बिछाए जा रहे हैं
घटना को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें पहली बारिश तक नहीं झेल पा रही हैं। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी नहीं हो रही, जिसका खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं।
पहले जलभराव… अब सड़क धंसने का संकट
बिलासपुर इस मानसून में पहले ही जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। शहर की कई कॉलोनियां और मुख्य सड़कें बारिश में पानी से भर गईं। अब उन्हीं सड़कों के धंसने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। इससे शहर के बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
33 करोड़ की सड़क पर उठे सवाल, पहली बारिश में ही क्यों खुलने लगी परतें?
नेहरू चौक से दर्रीघाट तक लगभग 33 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सड़क को शहर की प्रमुख परियोजनाओं में गिना गया था। लेकिन बारिश के बाद सामने आई सड़क धंसने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। शहर में सवाल उठ रहे हैं कि यदि नई सड़कें पहली ही बारिश में जवाब देने लगें तो उनकी उम्र कितनी होगी।
600 करोड़ की सड़क पर दरार… अब शहर की सड़क भी धंसी
यह पहला मामला नहीं है जब सड़क निर्माण सवालों में आया हो। कुछ ही दिन पहले लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे रतनपुर–गेंदा मार्ग पर भी दरारें दिखाई देने की खबर सामने आई थी। उस मामले ने भी निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब शहर के बीचोंबीच सड़क धंसने की घटना ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
बिलासपुर में हर बारिश के बाद क्यों खुल जाती है विकास की पोल?
बारिश आते ही शहर की कई सड़कें उखड़ जाती हैं, कहीं डामर बह जाता है, कहीं गड्ढे बन जाते हैं और कहीं पूरी सड़क ही धंस जाती है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद अब शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बिलासपुर में बनने वाली सड़कें एक मानसून भी मजबूती से क्यों नहीं झेल पातीं।
घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल
सड़क धंसने के कारण क्षेत्र के लोगों में लगातार भय बना हुआ है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, ऑटो चालकों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक सड़क की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती, तब तक हर गुजरने वाला व्यक्ति जोखिम उठाने को मजबूर रहेगा।



