बिलासपुर से उठे सवाल, देश की निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस तेज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि अस्पताल की दोनों एम्बुलेंस पिछले करीब तीन महीने से बंद पड़ी थीं और गंभीर मरीज को हायर सेंटर भेजने के दौरान अस्पताल ने न तो वैकल्पिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई और न ही मरीज के साथ डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ भेजा। आरोप है कि इस लापरवाही के कारण मरीज को एयर एम्बुलेंस तक सुरक्षित नहीं पहुंचाया जा सका और परिजनों पर करीब ₹9.5 लाख का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया।

प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की अनुपस्थिति पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इतने गंभीर मामले में अस्पताल का शीर्ष प्रबंधन सामने तक नहीं आया, जिससे अस्पताल की जवाबदेही पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
क्या हुआ पूरा मामला?
कांग्रेस नेताओं के अनुसार गंभीर रूप से बीमार राजकुमार अग्रवाल को बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर किया गया था। आरोप है कि अस्पताल की दोनों एम्बुलेंस खराब होने के कारण परिजनों को निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ी।
प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि अस्पताल ने केवल निजी एम्बुलेंस संचालक का नंबर उपलब्ध कराया, लेकिन मरीज के साथ अस्पताल का कोई डॉक्टर, नर्स या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ चकरभाठा एयरपोर्ट तक नहीं भेजा गया। अस्पताल प्रबंधन ने इसे अपनी आंतरिक नीति बताया।
एयरपोर्ट पर बिगड़ी स्थिति, एयरलिफ्ट टला
आरोप है कि चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंचने पर हैदराबाद से आई एयर एम्बुलेंस की मेडिकल टीम ने मरीज का ऑक्सीजन स्तर बेहद कम पाया। मरीज की हालत एयर ट्रांसफर के लिए उपयुक्त नहीं होने के कारण एयरलिफ्ट तत्काल रोकना पड़ा और मरीज को वापस अस्पताल लाना पड़ा।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार इसके बाद एयर एम्बुलेंस को एक रात रोकना पड़ा, जिससे लगभग ₹2.5 लाख का अतिरिक्त खर्च आया। अगले दिन विशेष मेडिकल टीम बुलाने पर करीब ₹7 लाख और खर्च हुए। इस तरह केवल कथित अव्यवस्था के कारण परिजनों पर लगभग ₹9.5 लाख का अतिरिक्त बोझ पड़ा। मरीज की स्थिति अभी भी गंभीर बताई जा रही है।
‘इतने बड़े अस्पताल में एक भी चालू एम्बुलेंस नहीं?’
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि देश के बड़े निजी अस्पतालों में शामिल एक अस्पताल अपनी दोनों एम्बुलेंस तीन महीने तक चालू नहीं रख पाता और वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं करता, तो आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि किसी भी गंभीर मरीज को रेफर करने की प्रक्रिया केवल कागजी औपचारिकता नहीं होती, बल्कि उसकी सुरक्षित मेडिकल ट्रांसफर की जिम्मेदारी भी अस्पताल की होती है।
फिर घिरे अपोलो अस्पताल
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है। उन्होंने हाल में सामने आए कथित फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस मामले में डॉक्टर के साथ अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके अलावा राजेंद्र प्रसाद शुक्ला प्रकरण का हवाला देते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए।
आयुष्मान योजना पर भी उठे सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज को लेकर भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार की योजना होने के बावजूद गरीब मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
17 जुलाई को CEO से मांगा जाएगा जवाब
कांग्रेस ने घोषणा की है कि 17 जुलाई को फिर अस्पताल प्रबंधन, विशेषकर CEO, से मुलाकात कर निम्न प्रमुख सवालों के जवाब मांगे जाएंगे—
तीन महीने तक दोनों एम्बुलेंस खराब क्यों रहीं?
वैकल्पिक एम्बुलेंस की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
गंभीर मरीज के साथ अस्पताल का मेडिकल स्टाफ क्यों नहीं भेजा गया?
एयर एम्बुलेंस तक सुरक्षित मेडिकल ट्रांसफर की जिम्मेदारी किसकी थी?
परिजनों पर ₹9.5 लाख का अतिरिक्त आर्थिक बोझ क्यों पड़ा?
भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए?
आयुष्मान कार्डधारकों को इलाज में आ रही शिकायतों का समाधान कैसे होगा?
अस्पताल का पक्ष
इस मामले में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने बातचीत के दौरान मरीज के साथ एयर एम्बुलेंस तक मेडिकल स्टाफ नहीं भेजने को अपनी नीति बताया। विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया या लिखित स्पष्टीकरण फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुआ है। यदि अस्पताल प्रबंधन अपनी ओर से कोई विस्तृत पक्ष जारी करता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधि मंडल में ये थे शामिल
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मरीज सुरक्षा के प्रति गंभीर उदासीनता का मामला है। अस्पताल प्रबंधन को अब जवाब देना ही होगा।
प्रतिनिधिमंडल में ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष ( शहर ) सिधांशू मिश्रा, पूर्ब विधायक शैलेश पांडेय, पूर्ब ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष व बेलतरा से विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी, कांग्रेस नेता विजय पांडेय, राजेश पांडेय, प्रमोद नायक, राकेश शर्मा, शहर कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष समीर अहमद, जितेंद्र पांडेय, नरेंद्र बोलर , संतोष गर्ग, तजम्मुल हक, हितेश देवांगन, सकेश मिश्रा, सुनील सोनकर, अनिल यादव ,अजय यादव, लक्की मिश्रा, संदीप यादव, कमल कश्यप, शेर सिंह, विक्की यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।



