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रेल यात्रा में बदले नियम और बढ़ी तकनीक की भूमिका… व्हाट्सएप टिकट पर लगा जुर्माना, भूला हुआ काउंटर टिकट भी बचा सकता है यात्रा, बिलासपुर मंडल ने टिकट जांच में उतारे बॉडी कैमरे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्रियों को डिजिटल टिकट के नियमों से कर रहा जागरूक, काउंटर टिकट भूलने पर भी उपलब्ध है विशेष सुविधा, टिकट जांच कर्मचारियों को मिले बॉडी वॉर्न कैमरे
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्रियों की सुविधा, टिकट जांच व्यवस्था में पारदर्शिता और डिजिटल प्रणाली को प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है। एक ओर रेलवे डिजिटल टिकट के नियमों को लेकर यात्रियों को जागरूक कर रहा है तो दूसरी ओर टिकट जांच कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। इसी क्रम में व्हाट्सएप पर भेजे गए टिकट के आधार पर यात्रा करने वाली एक महिला यात्री पर जुर्माना लगाए जाने का मामला सामने आया, वहीं रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि काउंटर से खरीदा गया आरक्षित टिकट यदि यात्रा के दौरान भूल जाए तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत राहत मिल सकती है। इसके साथ ही बिलासपुर मंडल में सभी महिला कर्मचारियों सहित 140 टिकट जांच कर्मचारियों को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं।
केस-1 : व्हाट्सएप पर आया टिकट नहीं माना गया वैध, महिला यात्री पर लगा जुर्माना
कोरबा से रायपुर जा रही गाड़ी संख्या 18517 कोरबा–विशाखापत्तनम लिंक एक्सप्रेस में यात्रा कर रही एक महिला यात्री को डिजिटल टिकट संबंधी नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण जुर्माना भरना पड़ा।
रेलवे के अनुसार महिला यात्री कुमारी अंकिता (बदला हुआ नाम) ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रही थीं। टिकट जांच कर्मचारी (टीटीई) को अपनी ओर आते देख उन्होंने अपने भाई को फोन कर तत्काल टिकट बनाने के लिए कहा। भाई ने RailOne App के माध्यम से कोरबा से रायपुर तक का अनारक्षित टिकट बुक किया और उसका स्क्रीनशॉट व्हाट्सएप पर भेज दिया।
जब टीटीई ने टिकट की जांच की तो पता चला कि ट्रेन कोरबा स्टेशन से शाम 4:10 बजे रवाना हो चुकी थी, जबकि टिकट शाम 4:45 बजे जारी किया गया था। इसके अलावा यात्री के पास केवल व्हाट्सएप पर प्राप्त स्क्रीनशॉट था।
रेलवे नियमों के अनुसार RailOne App से बनाया गया अनारक्षित टिकट केवल उसी मोबाइल फोन में वैध माना जाता है, जिसमें ऐप पंजीकृत हो और जिससे टिकट बुक किया गया हो। केवल स्क्रीनशॉट, व्हाट्सएप या किसी अन्य माध्यम से प्राप्त प्रति वैध यात्रा प्राधिकार नहीं मानी जाती। इसी आधार पर टिकट को अमान्य घोषित करते हुए नियमानुसार जुर्माना वसूला गया।
पूछताछ के दौरान महिला यात्री ने स्वीकार किया कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी।
डिजिटल टिकट के लिए रेलवे ने बताए अहम नियम
रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि—
यात्रा शुरू होने से पहले ही वैध टिकट लेना आवश्यक है।
RailOne App से टिकट उसी मोबाइल में बनाया जाए, जिसमें ऐप रजिस्टर्ड हो।
टिकट का स्क्रीनशॉट या व्हाट्सएप कॉपी मान्य नहीं है।
यात्रा के दौरान वही मोबाइल साथ रखें जिसमें टिकट उपलब्ध हो।
टिकट जांच के समय मोबाइल पर्याप्त चार्ज होना चाहिए।
रजिस्टर्ड मोबाइल से बुक किया गया टिकट उसी मोबाइल धारक के लिए मान्य होता है।
रेलवे ने यह भी बताया कि 19 जून 2026 से बिना वैध टिकट अथवा अनियमित टिकट के यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है।
केस-2 : यात्रा में काउंटर टिकट भूल गए तो घबराने की जरूरत नहीं, रेलवे के नियम में है राहत
रेलवे ने यात्रियों को यह भी बताया है कि यदि कोई यात्री रेलवे आरक्षण काउंटर (पीआरएस) से खरीदा गया मूल आरक्षित टिकट घर या स्टेशन पर भूल जाता है, तब भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे यात्रा जारी रखने में सहायता मिल सकती है।
रेलवे के अनुसार यदि यात्री ट्रेन में सफर कर रहा हो और उसके पास मूल टिकट न हो, तो उसके परिजन या अधिकृत प्रतिनिधि संबंधित प्रस्थान स्टेशन के स्टेशन मास्टर के समक्ष मूल टिकट प्रस्तुत कर सकते हैं।
स्टेशन मास्टर टिकट का सत्यापन करने के बाद संबंधित अग्रिम स्टेशन को आवश्यक सूचना भेजते हैं। इसके आधार पर रेलवे अधिकारी नियमों के अनुरूप वास्तविक यात्री को यात्रा जारी रखने में सहायता प्रदान करते हैं।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल पीआरएस काउंटर से जारी मूल आरक्षित टिकट पर लागू होती है। IRCTC से बुक किए गए ई-टिकट पर यह व्यवस्था लागू नहीं है।
ऐसी स्थिति में यात्री को ट्रेन में मौजूद टीटीई को तुरंत जानकारी देने की सलाह दी गई है ताकि आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
रेलवे हेल्पलाइन 139 पर चौबीसों घंटे सहायता उपलब्ध है।
केस-3 : टिकट जांच अब कैमरे की निगरानी में, बिलासपुर मंडल के 140 कर्मचारियों को मिले बॉडी वॉर्न कैमरे
टिकट जांच प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने के लिए बिलासपुर मंडल ने सभी महिला टिकट जांच कर्मचारियों सहित 140 टिकट चेकिंग कर्मचारियों को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए हैं।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह द्वारा पहले 50 कर्मचारियों को कैमरे दिए गए थे। इसके बाद 4 जुलाई 2026 को 90 अतिरिक्त कैमरों का वितरण किया गया।
इन कैमरों के उपयोग से टिकट जांच के दौरान होने वाली पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड होगी। किसी विवाद, शिकायत या आरोप की स्थिति में रिकॉर्ड किए गए वीडियो के आधार पर निष्पक्ष सत्यापन किया जा सकेगा।
रेल प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था यात्रियों और टिकट जांच कर्मचारियों दोनों के हितों की सुरक्षा करेगी। विशेष रूप से महिला कर्मचारियों के लिए यह पहल सुरक्षा और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
बिलासपुर मंडल आधुनिक तकनीक के माध्यम से टिकट जांच व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

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