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62 साल पुराने कम्पोजिट भवन की बदहाली पर फूटा कर्मचारियों का गुस्सा, छत से झड़ रहा प्लास्टर, बारिश में टपक रहा पानी; कलेक्टर से बोले– हादसे से पहले कराएं जीर्णोद्धार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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लिपिक कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन, रजिस्ट्री, डीईओ, कृषि, समाज कल्याण समेत कई सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर उठाए सवाल
बिलासपुर। शहर के पुराने कम्पोजिट भवन की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर अब शासकीय कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने मंगलवार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए भवन के तत्काल जीर्णोद्धार, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और कर्मचारियों व आम नागरिकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
संघ का कहना है कि लगभग वर्ष 1962 में निर्मित यह भवन आज भी जिले के कई महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन सैकड़ों कर्मचारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक विभिन्न कार्यों के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन भवन की जर्जर हालत किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।


कई महत्वपूर्ण विभाग इसी भवन से संचालित
पुराने कम्पोजिट भवन में वर्तमान में कई प्रमुख सरकारी कार्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें—
रजिस्ट्री कार्यालय
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय
कृषि विभाग
पंचायत विभाग
समाज कल्याण विभाग
आदिवासी विकास विभाग
अन्य शासकीय कार्यालय
शामिल हैं। इन कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है।
छत से झड़ रहा प्लास्टर, बारिश में टपक रहा पानी
ज्ञापन में कर्मचारी संघ ने बताया कि भवन की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। कई स्थानों पर छतों का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहा है, जिससे कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
बरसात के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। छत से लगातार पानी टपकने के कारण कार्यालयों के भीतर और गलियारों में जलभराव हो जाता है। इससे कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों के फिसलकर घायल होने की आशंका बनी रहती है। कई बार कार्यालयीन कार्य भी प्रभावित होते हैं।
मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
संघ ने ज्ञापन में बताया कि भवन में कई आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। लंबे समय से इन समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत और आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
कर्मचारी संघ ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं—
भवन की जर्जर छतों का तत्काल जीर्णोद्धार एवं मरम्मत।
महिला एवं पुरुष कर्मचारियों तथा आम नागरिकों के लिए अलग-अलग सुलभ शौचालयों की व्यवस्था।
पूरे भवन की रंगाई-पुताई एवं आवश्यक मरम्मत कार्य।
कार्यालयों के लिए अलग विद्युत ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराया जाए।
भवन के पीछे व्यवस्थित वाहन पार्किंग (वाहन स्टैंड) का निर्माण।
कर्मचारियों एवं आम नागरिकों के लिए स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था।
कर्मचारियों के कल्याण के लिए जर्जर पुराने वाहन स्टैंड के एक कक्ष का संघ को आवंटन।
‘सुरक्षा और जनसुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता हो’
संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. सुनील कुमार यादव ने कहा कि यह केवल कर्मचारियों की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि प्रतिदिन यहां आने वाले हजारों नागरिकों की सुरक्षा का भी मामला है। भवन की जर्जर स्थिति किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कर्मचारियों के हित और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुराने कम्पोजिट भवन का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाए तथा सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
हादसे से पहले कार्रवाई की उम्मीद
कर्मचारी संघ ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन जाएगा।

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