

बिलासपुर। गले में गहरी और जानलेवा चोट… कुछ मिनटों की देरी और मरीज की सांसें हमेशा के लिए थम सकती थीं। लेकिन छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के ईएनटी विशेषज्ञों ने त्वरित निर्णय, सटीक सर्जरी और टीमवर्क के दम पर दो गंभीर मरीजों की जान बचा ली। एक मरीज ने खुद अपने गले पर वार किया था, जबकि दूसरे पर ब्लेड से हमला हुआ था। दोनों मामलों में गले की प्रमुख रक्त वाहिनियों और महत्वपूर्ण अंगों के बेहद करीब चोट थी। सफल इलाज के बाद दोनों मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
पहला केस: खुद काट लिया था गला, खुला घाव लेकर पहुंचा अस्पताल
पहला मामला 45 वर्षीय व्यक्ति का है, जिसे 18 जून को गले पर स्वयं द्वारा पहुंचाई गई गहरी चोट के साथ सिम्स लाया गया। जांच में गले के अगले हिस्से में इतना गहरा चीरा मिला कि अंदरूनी ऊतक तक दिखाई दे रहे थे।
ईएनटी विभाग की टीम ने बिना समय गंवाए लोकल एनेस्थीसिया के तहत नेक एक्सप्लोरेशन कर घाव की शल्य चिकित्सा की। समय पर उपचार मिलने से मरीज की हालत तेजी से सुधरी और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दूसरा केस: ब्लेड से हमले में फट गई थीं रक्त वाहिनियां
दूसरा मामला 30 वर्षीय युवक का है, जिसे 15 जून को ब्लेड से हुए हमले के बाद गंभीर हालत में सिम्स के आपातकालीन विभाग लाया गया। युवक के गले से लगातार अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था।
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि गले की प्रमुख रक्त वाहिनियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। विशेषज्ञों ने तत्काल वैस्कुलर लिगेशन कर रक्तस्राव पर नियंत्रण पाया और जीवनरक्षक उपचार शुरू किया। इलाज के बाद मरीज की स्थिति लगातार सुधरती गई और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
कुछ मिनट की देरी भी बन सकती थी मौत की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों मरीजों की चोटें गले की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं—कैरोटिड एवं जुगुलर रक्त वाहिनियों, श्वासनली, भोजन नली और प्रमुख तंत्रिकाओं—के बेहद करीब थीं। ऐसी स्थिति में थोड़ी-सी भी देरी मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। त्वरित निर्णय, सटीक सर्जरी और आधुनिक उपचार प्रणाली के कारण दोनों की जान बचाई जा सकी।
ईएनटी विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
दोनों मरीजों का सफल उपचार ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. आरती पाण्डेय, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वी.बी. साहू तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में किया गया। पूरी प्रक्रिया में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, उनकी टीम, आपातकालीन चिकित्सा विभाग, ऑपरेशन थिएटर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहयोगी विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अधिष्ठाता बोले- सिम्स गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह सक्षम
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे जटिल मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और टीमवर्क सिम्स की चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रमाण हैं।
चिकित्सा अधीक्षक ने बताया सफलता का राज
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान दी गई त्वरित चिकित्सा और विभिन्न विभागों के प्रभावी समन्वय से दोनों मरीजों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि सिम्स का आपातकालीन चिकित्सा तंत्र 24 घंटे गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।गले की पेनिट्रेटिंग चोट चिकित्सा विज्ञान की सबसे चुनौतीपूर्ण आपात स्थितियों में मानी जाती है। इनमें कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा हो सकती है। ऐसे दो गंभीर मामलों में सफल सर्जरी कर मरीजों को सुरक्षित घर भेजना सिम्स की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता और टीमवर्क की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।



