
हमर पहुना में एसएसपी रजनेश सिंह: “अपराधियों पर सख्ती, जनता से साझेदारी और युवाओं की सकारात्मक शक्ति ही सुरक्षित समाज की पहचान”
बिलासपुर। पुलिस की वर्दी के पीछे छिपी जिम्मेदारियां, चुनौतियां, संवेदनाएं और सफलता की कहानियां उस समय जीवंत हो उठीं, जब बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह प्रेस क्लब के लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम “हमर पहुना” में शामिल हुए। यह केवल औपचारिक मुलाकात नहीं रही, बल्कि पुलिसिंग के अनुभवों, व्यक्तिगत संघर्षों, उपलब्धियों और भविष्य की सोच को करीब से जानने का अवसर बन गई।
बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचने पर अध्यक्ष अजीत मिश्रा ने पुष्पगुच्छ भेंटकर एसएसपी रजनेश सिंह का आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद पत्रकारों के साथ खुले संवाद में उन्होंने बिलासपुर पुलिस की कार्यशैली, अपराध नियंत्रण, साइबर अपराध, नशे के खिलाफ अभियान, महिला सुरक्षा, स्मार्ट पुलिसिंग और पुलिस परिवार के कल्याण जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
अपराध नियंत्रण में मजबूत प्रदर्शन, 22 अपराधियों को दिलाई उम्रकैद

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि बिलासपुर पुलिस ने गंभीर अपराधों के मामलों में प्रभावी अनुसंधान और मजबूत पैरवी के माध्यम से 22 अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण भी पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने बताया कि अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों की करीब 9.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने की इस रणनीति को अपराध नियंत्रण का प्रभावी माध्यम बताया गया।
महिला सुरक्षा और नशे के खिलाफ लगातार अभियान
एसएसपी ने कहा कि महिला एवं बाल अपराधों की रोकथाम बिलासपुर पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश अपराधों की जड़ कहीं न कहीं नशे से जुड़ी हुई दिखाई देती है। इसी कारण पुलिस द्वारा नशे के कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है और इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
सबसे बड़ी चुनौती साइबर अपराध, गांव-गांव तक पहुंच रही जागरूकता
रजनेश सिंह ने वर्तमान समय में साइबर अपराध को पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों से बढ़ रही ठगी की घटनाओं को देखते हुए केवल कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर अपराधों से बचाव के लिए थाना स्तर पर “हमर संगवारी” समूह बनाए गए हैं। इन समूहों के माध्यम से ग्रामीणों को साइबर ठगी के तरीकों, सावधानियों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि लोग समय रहते सतर्क रह सकें।
बचपन में एसपी कार्यालय देखकर बना पुलिस अधिकारी बनने का सपना
संवाद के दौरान एसएसपी रजनेश सिंह ने अपने जीवन के प्रेरक प्रसंग भी साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके स्कूल के पास एसपी कार्यालय था। वहां पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली और अनुशासन को देखकर उनके मन में पुलिस सेवा के प्रति आकर्षण पैदा हुआ।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर और सिंगरौली में हुई। इसके बाद वे रायपुर पहुंचे, जहां एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। लोक सेवा आयोग के माध्यम से पुलिस सेवा में चयन होने के बाद उन्हें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित कई जिलों में काम करने का अवसर मिला और वर्तमान में वे बिलासपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
दुर्ग में 16 डकैती का खुलासा, रणनीति और तकनीक बनी सफलता की कुंजी
अपने सेवा अनुभव साझा करते हुए उन्होंने दुर्ग जिले में पदस्थापना के दौरान 16 डकैती मामलों के सफल खुलासे का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन मामलों में विशेष रणनीति तैयार की गई, तकनीकी संसाधनों और मजबूत सूचना तंत्र का प्रभावी उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों तक पहुंचना संभव हो सका।
स्मार्ट पुलिसिंग का मतलब केवल तकनीक नहीं, जनता का भरोसा भी जरूरी
स्मार्ट पुलिसिंग की अवधारणा पर बोलते हुए एसएसपी ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके लिए मजबूत सूचना तंत्र, जनता का विश्वास और पुलिस बल को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि पुलिस परिवार के कल्याण के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। पुलिस अस्पताल और पुलिस कैंटीन जैसी सुविधाएं या तो शुरू हो चुकी हैं अथवा उन्हें प्रारंभ करने की प्रक्रिया जारी है, जिससे पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
युवाओं से कहा— अपनी ऊर्जा समाज और कानून की रक्षा में लगाएं
कार्यक्रम के दौरान एसएसपी रजनेश सिंह ने समाज और युवाओं के नाम विशेष संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। अपराधियों की सूचना देकर नागरिक अपने सामाजिक दायित्व का प्रभावी निर्वहन कर सकते हैं।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनमें अपार ऊर्जा, क्षमता और इच्छाशक्ति होती है। यदि इस शक्ति का उपयोग समाज सेवा, न्याय और कानून की रक्षा के लिए किया जाए तो एक सुरक्षित, सशक्त और बेहतर समाज का निर्माण संभव है।
प्रेस क्लब ने किया सम्मान



कार्यक्रम के समापन पर बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजीत मिश्रा ने एसएसपी रजनेश सिंह को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सह सचिव हरि किशन गंगवानी, कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब के सदस्य उपस्थित रहे।



