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बिलासपुर। गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना में कथित ‘मरीज माफिया’ की संभावित सक्रियता को लेकर बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। उसलापुर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में बेमेतरा जिले से मरीजों को एक साथ लाए जाने की सूचना मिलने के बाद मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दस्तावेजों सहित विभिन्न बिंदुओं की जांच शुरू कर दी।
फिलहाल जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट आने के बाद ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई या तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे। शुरुआती स्तर पर विभाग ने किसी भी अस्पताल या व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया है।

जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत वर्तमान में 72 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि विभिन्न कारणों से 8 अस्पतालों का पंजीयन फिलहाल निलंबित है। योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों, विशेषकर सिम्स और जिला अस्पताल में हजारों मरीज इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।
इसी बीच निजी अस्पतालों में योजना के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग शिकायत मिलने पर जांच की प्रक्रिया शुरू करता है।
सीएमएचओ के निर्देश पर कई अस्पतालों की जांच

मंगलवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभ्रा ग्रेवाल के निर्देश पर विभागीय टीम दो से तीन अस्पतालों के निरीक्षण के लिए निकली। इसी दौरान उसलापुर स्थित निजी नर्सिंग होम में बड़ी संख्या में मरीजों के एक साथ भर्ती होने की सूचना के आधार पर टीम ने जांच शुरू की।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच में मरीजों के रिकॉर्ड, भर्ती प्रक्रिया, आयुष्मान योजना से जुड़े दस्तावेज और अन्य आवश्यक पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है।
शिकायत के आधार पर कार्रवाई, रिपोर्ट का इंतजार
सीएमएचओ डॉ. शुभ्रा ग्रेवाल का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ जिले में बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच रहा है। यदि कहीं भी नियमों के उल्लंघन या किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाती है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल उसलापुर स्थित निजी नर्सिंग होम के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है, जिसकी जांच जारी है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल किसी भी तरह के कथित ‘मरीज माफिया’ या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं की है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत तथ्यात्मक है या नहीं। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



