जनदर्शन पहुंचीं एक दर्जन से ज्यादा महिलाएं, बोलीं- न आवास मिला, न शौचालय, हर दिन शर्मिंदगी झेल रहे
बिलासपुर।
एक तरफ भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने पर “12 साल बेमिसाल” अभियान चला रही है, वहीं बिलासपुर जिले के ग्रामीण इलाकों से सामने आई तस्वीरों ने गांवों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में जैतपुर सहित विभिन्न गांवों से एक दर्जन से अधिक महिलाएं अपनी शिकायतें लेकर पहुंचीं। महिलाओं का कहना था कि उनके घरों में आज तक शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है। मजबूरी में उन्हें रोजाना खेतों, सड़क किनारे या खुले स्थानों में नित्यकर्म के लिए जाना पड़ता है। महिलाओं ने आवास, शौचालय और भूमिहीन योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत भी प्रशासन के सामने रखी।
“घर कच्चा है, शौचालय नहीं, खुले में जाना पड़ता है”
जैतपुर निवासी सुमित्रा केवट ने जनदर्शन में दिए आवेदन में बताया कि वह अत्यंत गरीब मजदूर परिवार से हैं और गरीबी रेखा के अंतर्गत जीवन यापन करती हैं। उनके पास रहने योग्य पक्का मकान नहीं है। परिवार आज भी खपरापोश कच्चे मकान में रह रहा है।
आवेदन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उन्हें आज तक नहीं मिला। ग्राम पंचायत की ओर से भी किसी प्रकार का आवास उपलब्ध नहीं कराया गया। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके घर में शौचालय तक नहीं है।
सुमित्रा ने शिकायत में उल्लेख किया कि कई वर्षों से ग्रामीण महिलाएं शौचालय निर्माण की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई निर्माण नहीं कराया गया। इसके कारण महिलाओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
महिलाओं ने सुनाई रोज की परेशानी
जनदर्शन में पहुंची महिलाओं ने बताया कि सुबह अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार खेतों और सुनसान इलाकों तक जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि खुले में शौच जाने के दौरान उन्हें असुरक्षा, शर्मिंदगी और असुविधा का सामना करना पड़ता है। परिवार की बुजुर्ग महिलाओं और किशोरियों को भी इसी स्थिति से गुजरना पड़ रहा है।
आवास और भूमिहीन योजना का लाभ नहीं मिलने का आरोप
सुमित्रा केवट ने अपने आवेदन में यह भी बताया कि वह भूमिहीन मजदूर हैं। उनके और परिवार के पास किसी प्रकार की भूमि संपत्ति नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि ग्राम पंचायत में कई बार भूमिहीन मजदूर योजना के लिए आवेदन और फार्म जमा किए गए, लेकिन आज तक किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला। न जमीन मिली, न आवास और न ही शौचालय।
जनदर्शन में एक साथ पहुंचीं कई महिलाएं
सूत्रों के अनुसार जनदर्शन के दौरान एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक महिलाएं इसी तरह की समस्याएं लेकर जिला प्रशासन के पास पहुंचीं। अधिकांश शिकायतें आवास, शौचालय और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी थीं।
महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
स्वच्छता अभियान और जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
देशभर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालय निर्माण के दावे किए जाते रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किए जाने की बातें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
लेकिन जनदर्शन में पहुंची महिलाओं की शिकायतों ने यह संकेत दिया है कि जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी ऐसे परिवार मौजूद हैं जिनके घरों में शौचालय नहीं है और वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने क्या कहा
मामले को लेकर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि शौचालय निर्माण का कार्य मांग और पात्रता के आधार पर किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनदर्शन में कुछ महिलाएं अपनी समस्याएं लेकर आई थीं। उनके आवेदन प्राप्त हुए हैं और संबंधित विभागों को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि जनदर्शन में प्राप्त ऐसे आवेदनों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।



