मां ने गृह मंत्री तक पहुंचाई शिकायत, FIR में देरी से लेकर सबूतों की अनदेखी तक गंभीर आरोप; विधानसभा में भी गूंज सकता है मामला
बिलासपुर। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में सात वर्षीय दो मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मामले की जांच और कार्रवाई में लापरवाही के आरोपों के बीच पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह को लाइन अटैच कर दिया है। इसी मामले में जांच से जुड़ी उप निरीक्षक संतोषी अग्रवाल को भी लाइन अटैच किया गया है। दोनों पर गंभीर प्रकरण में अपेक्षित संवेदनशीलता और जिम्मेदारी नहीं निभाने के आरोप हैं।
पुलिस विभाग के भीतर यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मामला दुष्कर्म जैसे अत्यंत संवेदनशील अपराध से जुड़ा है। आरोप है कि जांच प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर गंभीर चूक हुईं और उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। मामले की जांच अभी जारी है और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर पूरे प्रकरण की पड़ताल की जा रही है।



हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं चेते, अब कार्रवाई की गाज
सूत्रों के अनुसार इस मामले में पहले भी पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ चुके थे। आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी मामले में गंभीरता नहीं दिखाई गई। विभागीय स्तर पर लंबे समय से इस प्रकरण को लेकर चर्चा थी, लेकिन अब जाकर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी पर कार्रवाई हुई है।
दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में कथित लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैये को लेकर विभाग के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को लाइन अटैच कर दिया।
दो मासूम बच्चियों के मामले ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें
सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में सात वर्षीय दो मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। पीड़ित बच्चियों की मां ने इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मां ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री को विस्तृत शिकायत भेजते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने शुरू से मामले को गंभीरता से नहीं लिया। शिकायत में जांच प्रक्रिया, एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए गए हैं।
‘सुबह से रात तक भटकते रहे, तब जाकर दर्ज हुई FIR’
परिवार की शिकायत के अनुसार घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दे दी गई थी। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई।
परिजनों का आरोप है कि वे सुबह से देर रात तक थाने और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया।
एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी अब पूरे मामले का सबसे बड़ा विवादित बिंदु बन चुकी है।
‘रस्सी से बांधकर करता था गलत काम’, बच्चियों के बयान का भी जिक्र
पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में बच्चियों द्वारा बताए गए तथ्यों का भी उल्लेख किया है।
शिकायत के अनुसार बच्चियों ने बताया था कि आरोपी कथित रूप से उन्हें रस्सी से बांधकर गलत काम करता था। परिवार का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस को रस्सी सहित अन्य संभावित साक्ष्यों की जानकारी भी दी थी।
परिजनों का आरोप है कि इन महत्वपूर्ण जानकारियों और संभावित सबूतों के संबंध में समय रहते अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
गृह मंत्री तक पहुंची शिकायत, जांच पर उठे बड़े सवाल
मामले में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई से असंतुष्ट पीड़ित परिवार ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री को शिकायत भेजी है। शिकायत में पुलिस की जांच, एफआईआर प्रक्रिया और सबूतों के संकलन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग की है।
विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठ सकता है मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह प्रकरण अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार आगामी मानसून सत्र में यह मामला विधानसभा में भी उठ सकता है।
दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने पूरे विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विभागीय जांच के निष्कर्षों पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।
सिरगिट्टी और पचपेड़ी में नए थाना प्रभारियों की नियुक्ति
कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग ने थाना प्रभारियों के पदस्थापन में भी बदलाव किया है।
वाई. पी. सिंह को सिरगिट्टी थाना प्रभारी बनाया गया है।
कमला पुसाम को पचपेड़ी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मामले की विभागीय जांच जारी है और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है।



