


महंगाई भत्ता, पदोन्नति और कर्मचारी हितों की 6 सूत्रीय मांगों को लेकर बिलासपुर में जंगी प्रदर्शन, रैली निकाल कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर, 10 जून। केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (डीए) देने सहित कर्मचारी हितों से जुड़ी छह सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को बिलासपुर में सरकारी कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ एवं संबद्ध संगठनों के संयुक्त आह्वान पर कर्मचारियों ने पहले पुराने कंपोजिट बिल्डिंग परिसर में सभा की, फिर विशाल रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।
कर्मचारियों ने राज्य सरकार पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी कर सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
कर्मचारियों का आरोप: अधिकारियों को डीए, कर्मचारियों को इंतजार
सभा को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, प्रदेश समन्वयक जी.आर. चंद्रा और जिला अध्यक्ष किशोर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता नहीं मिलने के कारण राज्य के लाखों कर्मचारी और पेंशनर आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं।
संघ नेताओं ने कहा कि राज्य शासन ने इसी प्रदेश में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा, बिजली विभाग और न्यायिक विभाग के अधिकारियों को महंगाई भत्ते का लाभ देने के आदेश जारी कर दिए हैं, जबकि अन्य विभागों के कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। इसे कर्मचारियों के साथ खुला भेदभाव बताते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जाएगी।
‘मोदी की गारंटी’ का वादा निभाने की मांग
संघ पदाधिकारियों ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान जारी जनघोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें कर्मचारियों से जुड़े कई वादे किए गए थे, जिन्हें “मोदी की गारंटी” के रूप में प्रचारित किया गया था। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद उन वादों को लागू नहीं किया गया है।
नेताओं ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र निर्णय नहीं लेती है तो कर्मचारियों को आगे और व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
भीषण गर्मी में उमड़ा कर्मचारियों का जनसैलाब
प्रदर्शन के दौरान भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी, पदाधिकारी और महिला कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने कंपोजिट बिल्डिंग से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
संघ का दावा है कि आंदोलन में विभिन्न विभागों के कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे कर्मचारियों के बीच व्याप्त नाराजगी स्पष्ट दिखाई दी।
छात्रावास अधीक्षक संघ ने भी सौंपा अलग ज्ञापन
मुख्य प्रदर्शन के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने भी अपनी लंबित मांगों को लेकर अलग ज्ञापन सौंपा। संघ ने छात्रावासों में विद्यार्थियों के लिए दी जाने वाली शिष्यवृत्ति एवं अनुरक्षण मद की राशि में वृद्धि की मांग करते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से प्रमुख रूप से—
केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता देने,
लंबित कर्मचारी हितों के मामलों का निराकरण,
चुनावी वादों को लागू करने,
वेतन एवं सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करने,
पेंशनरों के हितों की रक्षा,
अन्य लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने
की मांग की है।
आंदोलन में ये प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद
प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, प्रदेश समन्वयक जी.आर. चंद्रा, जिला अध्यक्ष किशोर शर्मा, महेंद्र तिवारी, राजेंद्र दवे, हिमाचल साहू, अनिल सिंह, ओम त्रिपाठी, दुर्गेश साहू, प्रवीण यादव, अश्वनी पांडे, अजय धुर्वे, राम कुमार मिश्रा, विजय श्रीवास, शशिकांत सोनी, नंद कुमार साहू, विकास तिवारी, राजेश्वर वस्त्रकार, गोविंद साहू, चंद्र प्रकाश साहू, अशोक बंजारे, सोमेश्वर सिंह, चंपा डहरवाल, अभिरंजन मिश्रा, सौरभ दीवान, विनोद तिवारी, अरुण पांडे, कैलाश गजभिए, रामजी ध्रुव, मनीष तिवारी और अभिषेक तिवारी सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
महिला कर्मचारियों की भी रही सक्रिय भागीदारी
प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इनमें मतीना बंजारे, आरती राय, रामबाई चौधरी, पूर्णिमा उपाध्याय, रेणुका बांसियार, इंदु यादव, आरती सिंह और ममता ठाकुर सहित बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी शामिल हुईं।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश स्तर पर अगली रणनीति तैयार की जा रही है।

