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पेंशन और टीईटी को लेकर शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन… डीपीआई का घेराव, शासन के सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चाओं के बीच बढ़ा दबाव

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार पूर्व सेवा की गणना कर पूर्ण पेंशन देने की मांग; बिलासपुर संभाग के 17 हजार शिक्षकों को टीईटी की चुनौती

बिलासपुर/रायपुर। संविलियन पूर्व सेवा की गणना कर पूर्ण पेंशन देने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के याचिकाकर्ता शिक्षकों ने राजधानी में बड़ा प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में शिक्षक प्रतिनिधियों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) का घेराव कर उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप तत्काल नीति निर्धारण और आदेश जारी करने की मांग उठाई। इस दौरान शिक्षकों ने विभागीय अधिकारियों और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए पेंशन, टीईटी परीक्षा और राजपत्र संशोधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

इस बीच विभागीय स्तर पर यह जानकारी भी सामने आई है कि उच्च न्यायालय के फैसले के आधार पर तत्काल पेंशन संबंधी निर्णय लेने के बजाय शासन स्तर पर मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी पर विचार किया जा रहा है। इसी संभावना को देखते हुए याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ा दिया है।

हाईकोर्ट के फैसले का हवाला, 120 दिनों में स्पीकिंग ऑर्डर की मांग

शिक्षक संगठन ने ज्ञापन में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने रमेश चंद्रवंशी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (WPS 2255/2021) और ऋषिदेव सिंह बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (WPS 5699/2021) सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए एक कल्याणकारी उपाय है। संविलियन से पूर्व दी गई लंबी सेवा को पूरी तरह शून्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने शासन को सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति, प्रशासनिक नियंत्रण और संवैधानिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए 120 दिनों के भीतर कारणयुक्त और स्पष्ट आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षक संगठन का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप संविलियन पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए।

सचिव स्कूल शिक्षा से हुई विस्तृत चर्चा

डीपीआई घेराव के बाद प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह, उप संचालक अशोक नारायण बंजारा तथा लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक डॉ. महेश नायक से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सेवा से पेंशन, विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित करने तथा आवश्यक राजपत्र संशोधन की मांग रखी। सचिव स्कूल शिक्षा ने शिक्षकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि टीईटी परीक्षा के संबंध में वैधानिक सलाह लेकर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। वहीं पेंशन मामले में न्यायालयीन आदेश और शासन की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है तथा शिक्षकों का पक्ष भी शासन के संज्ञान में है।

बिलासपुर संभाग के 17 हजार शिक्षकों के सामने टीईटी की चुनौती

बैठक में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों को टीईटी अर्हता प्राप्त करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिए जाने के बाद परीक्षा को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि केवल बिलासपुर संभाग में ही लगभग 17 हजार सहायक शिक्षक और शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में समय पर परीक्षा आयोजित करना और पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है।

इन-सर्विस शिक्षकों के लिए अलग टीईटी की मांग

शिक्षक संगठन ने शासन से मांग की है कि सेवाकालीन शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पृथक विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए। संगठन का तर्क है कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों की परिस्थितियां सामान्य अभ्यर्थियों से अलग हैं, इसलिए उनके लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही टीईटी परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी करने तथा नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित करने की भी मांग उठाई गई, ताकि शिक्षकों को समय पर पात्रता हासिल करने का अवसर मिल सके।

हर साल 2 से 3 हजार शिक्षकों की होगी सेवानिवृत्ति

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रदेश में लगभग 1.40 लाख एल.बी. संवर्ग के शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से प्रतिवर्ष औसतन 2 हजार से 3 हजार शिक्षक ही सेवानिवृत्त होंगे। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति की यह प्रक्रिया क्रमिक है, इसलिए पूर्व सेवा जोड़कर पेंशन देने से शासन पर एकमुश्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा और बजट प्रबंधन भी प्रभावित नहीं होगा।

सभी जिलों से पहुंचे पदाधिकारी

डीपीआई घेराव कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक पदाधिकारी और याचिकाकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने उच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप पेंशन संबंधी नीति जल्द लागू करने और टीईटी परीक्षा को लेकर स्पष्ट रोडमैप जारी करने की मांग दोहराई।

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