पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे कांग्रेस-NSUI कार्यकर्ता, अब बलवा और रास्ता जाम करने की धाराओं में दर्ज हुआ मामला
बिलासपुर। NEET पेपर लीक को लेकर बिलासपुर में हुआ हाईवोल्टेज राजनीतिक प्रदर्शन अब कानूनी मोड़ ले चुका है। केंद्रीय राज्य मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू के बंगले का घेराव करने निकले कांग्रेस और NSUI नेताओं पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले में देवेंद्र यादव, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, जिला शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा समेत अन्य नेताओं को आरोपी बनाया गया है।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की
धारा 126(2), 190, 191(2), 292 और 293 के तहत अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, सार्वजनिक मार्ग बाधित किया गया और पुलिस की रोक के बावजूद भीड़ ने आगे बढ़ने का प्रयास किया।
सांसद बंगले के घेराव से भड़का टकराव, पुलिस और कार्यकर्ता आमने-सामने
3 जून को NEET पेपर लीक के विरोध में NSUI और कांग्रेस ने सांसद तोखन साहू के निवास का घेराव करने का ऐलान किया था। निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रैली निकालकर सांसद निवास की ओर बढ़े, लेकिन प्रशासन पहले से अलर्ट मोड में था।
सांसद निवास तक पहुंचने वाले सभी मार्गों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई थी। भारी पुलिस बल तैनात था और वरिष्ठ अधिकारी खुद मोर्चा संभाले हुए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी बैरिकेड तक पहुंचे, उन्होंने आगे बढ़ने का प्रयास शुरू कर दिया। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए तो कुछ ने उसे हटाने की कोशिश की।
इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात तेजी से तनावपूर्ण हो गए और सड़क आंदोलन के अखाड़े में तब्दील हो गई।
पानी की बौछारें, नारेबाजी और सड़क पर सियासी संग्राम
जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। तेज पानी की बौछारों के बीच भी प्रदर्शनकारी सड़क पर डटे रहे और केंद्र सरकार तथा परीक्षा एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विधायक देवेंद्र यादव भी बैरिकेड तक पहुंचे। इसी दौरान हुई धक्का-मुक्की में उनका कुर्ता फट गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने की कार्रवाई बताया, जबकि पुलिस ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया आवश्यक कदम करार दिया।
कलेक्ट्रेट तक पहुंचा प्रदर्शन, यातायात भी हुआ प्रभावित
सांसद निवास तक नहीं पहुंच पाने के बाद प्रदर्शनकारियों का रुख कलेक्ट्रेट की ओर हो गया। आरोप है कि इस दौरान मुख्य मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित हुई। पुलिस ने इसी आधार पर प्रदर्शन के आयोजकों और प्रमुख नेताओं के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब कानूनी लड़ाई में भी बदलता दिखाई दे रहा है।
छात्रों के भविष्य बनाम कानून-व्यवस्था की बहस
NSUI और कांग्रेस का कहना है कि NEET पेपर लीक देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है और इसी जवाबदेही की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था। दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने और सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की गई।
अब आगे क्या?
पुलिस की एफआईआर के बाद मामला राजनीतिक रूप से और गर्माने के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस और NSUI जहां इसे छात्र हितों की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे कानून हाथ में लेने की कोशिश करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सड़क से लेकर अदालत और विधानसभा तक गूंज सकता है।
घटनाक्रम एक नजर में
NEET पेपर लीक के विरोध में NSUI-कांग्रेस का प्रदर्शन।
सांसद तोखन साहू के बंगले के घेराव का प्रयास।
पुलिस की बहुस्तरीय बैरिकेडिंग के सामने प्रदर्शनकारी अड़े।
बैरिकेड पार करने की कोशिश पर पुलिस-कार्यकर्ता भिड़े।
हालात बिगड़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल।
धक्का-मुक्की में विधायक देवेंद्र यादव का कुर्ता फटा।
प्रदर्शन के बाद सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज।
देवेंद्र यादव, विनोद जाखड़, नीरज पांडेय, सिद्धांशु मिश्रा समेत अन्य आरोपी।
बलवा, रास्ता बाधित करने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की धाराएं लगाई गईं।

