



भारत ने फाइनल में जापान को 4-1 से हराया, बिलासपुर के डिफेंडर अवि मानिकपुरी रहे जीत के अहम सूत्रधार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ और बिलासपुर के खेल इतिहास में शुक्रवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। जापान के काकामिगाहारा में आयोजित Men’s U-18 Asia Cup 2026 के फाइनल में भारतीय टीम ने मेजबान जापान को 4-1 से हराकर एशियाई खिताब अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी खुशियों में एक नाम बिलासपुर के युवा हॉकी खिलाड़ी अवि मानिकपुरी का भी रहा, जिन्होंने भारतीय टीम के डिफेंडर के रूप में पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत की जीत की खबर मिलते ही बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड में नगर हॉकी संघ बिलासपुर के तत्वावधान में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने एकत्र होकर जीत का जश्न मनाया। हॉकी स्टिक लहराई गईं, मिठाइयां बांटी गईं और युवा खिलाड़ियों ने तिरंगे के साथ भारत माता के जयकारे लगाए। पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु बिलासपुर के लाल अवि मानिकपुरी रहे, जिनकी सफलता को शहर की सामूहिक उपलब्धि के रूप में देखा गया।
बिलासपुर से एशिया के शिखर तक पहुंचा अवि का सफर
बिलासपुर के साधारण परिवार से निकलकर भारतीय टीम की जर्सी पहनने तक का अवि मानिकपुरी का सफर संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत की मिसाल बन गया है। उनके पिता जितेंद्र मानिकपुरी और माता शशिकल मानिकपुरी ने शुरू से ही बेटे के खेल करियर को पूरा समर्थन दिया। सीमित संसाधनों के बीच भी परिवार ने कभी अवि के सपनों को छोटा नहीं होने दिया।
स्थानीय मैदानों से शुरुआत करने वाले अवि ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहचान बनाई। लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्होंने राष्ट्रीय चयन शिविर तक जगह बनाई और अंततः भारतीय अंडर-18 पुरुष हॉकी टीम में चयनित हुए।
कोच समीर दाद की मेहनत भी रंग लाई
अवि की सफलता के पीछे उनके कोच समीर दाद का योगदान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने शुरुआती दौर से ही अवि की प्रतिभा को पहचाना और उनके खेल को निखारने के लिए लगातार मेहनत की।
कोच के अनुसार अवि शुरू से ही अनुशासित खिलाड़ी रहे हैं। डिफेंस लाइन में उनकी मजबूत पकड़, तेज निर्णय क्षमता, फिटनेस और आक्रामक सोच उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। यही कारण रहा कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर उन पर गई और उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
ऑस्ट्रेलिया सीरीज में प्रदर्शन ने खोले एशिया कप के दरवाजे
एशिया कप से पहले हॉकी इंडिया ने भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाई-इंटेंसिटी सीरीज और विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया था। इसी शिविर में खिलाड़ियों की फिटनेस, मैच अवेयरनेस, तकनीकी दक्षता और दबाव में प्रदर्शन की बारीकी से जांच की गई।
अवि ने इस दौरान अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और अंतिम टीम में डिफेंडर के रूप में स्थान हासिल किया। भारतीय टीम की कप्तानी केतन कुशवाहा को सौंपी गई, जबकि अवि को टीम की रक्षापंक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
फाइनल में जापान पर भारत की दमदार जीत
एशिया कप के फाइनल मुकाबले में भारत ने मेजबान जापान के खिलाफ शानदार खेल दिखाया। भारतीय टीम ने आक्रामक शुरुआत करते हुए मैच पर लगातार दबाव बनाए रखा और 4-1 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम कर लिया।
पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम का प्रदर्शन संतुलित और प्रभावशाली रहा। डिफेंस और अटैक दोनों विभागों में खिलाड़ियों ने बेहतरीन तालमेल दिखाया। रक्षापंक्ति में अवि मानिकपुरी ने कई मौकों पर विपक्षी हमलों को विफल करते हुए टीम को मजबूती प्रदान की।
एशिया कप में भारत की चुनौतीपूर्ण राह
29 मई से 6 जून तक जापान के काकामिगाहारा शहर में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन जापान हॉकी एसोसिएशन और एशियन हॉकी फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
भारत को ग्रुप-ए में रखा गया था, जहां उसका मुकाबला जापान, दक्षिण कोरिया, चीनी ताइपे और कजाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों से हुआ। सभी मुकाबलों में भारतीय टीम ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया और अंततः खिताब अपने नाम कर लिया।
टूर्नामेंट के मुकाबले कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज हॉकी स्टेडियम में खेले गए, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने एशिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
भारतीय अंडर-18 टीम के खिलाड़ी
गोलकीपर
सावन कुमार
आयुष राजक
डिफेंडर्स
अंश बहुत्रा
अरमान सोरेंग
आशीष तानी पूर्ति
अर्शदीप सिंह
अवि मानिकपुरी
रोमित पाल
मिडफील्डर्स
राहुल यादव
प्रेमचंद सोय
वरिंदर सिंह
करण गौतम
सिद्धार्थ बेन
फॉरवर्ड्स
केतन कुशवाहा (कप्तान)
आकाश दीप
गाजी खान
शाहरुख अली
प्रह्लाद राजभर
पुलिस ग्राउंड में गूंजे जीत के जयकारे
भारत की जीत और अवि मानिकपुरी के शानदार प्रदर्शन के बाद बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड में नगर हॉकी संघ द्वारा विशेष आयोजन किया गया। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। युवा हॉकी खिलाड़ियों ने इसे अपने लिए प्रेरणादायक क्षण बताया।
खेल प्रेमियों का कहना है कि राष्ट्रीय टीम में बिलासपुर के खिलाड़ी की मौजूदगी और एशिया कप जैसे बड़े मंच पर उसकी सफलता ने जिले के खेल वातावरण को नई ऊर्जा दी है। हॉकी से जुड़े बच्चों और युवाओं में उत्साह बढ़ा है तथा वे भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना देख रहे हैं।
बिलासपुर के लिए गौरव का नया अध्याय
अवि मानिकपुरी की यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की उभरती खेल प्रतिभाओं की पहचान बनकर सामने आई है। भारतीय टीम के साथ एशिया कप जीतने वाले अवि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के दम पर छोटे शहरों से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया जा सकता है।
जापान में तिरंगा लहराने वाली इस जीत के साथ बिलासपुर का नाम भी एशियाई हॉकी के स्वर्णिम अध्याय में दर्ज हो गया है।

