नक्सलवाद के खात्मे के दावे, सुशासन के मंच पर संग्राम: कहीं अफसरों की फटकार, कहीं कर्मचारियों की बगावत, कहीं जनता का गुस्सा
जंगलों में नक्सल मोर्चे पर जीत का दावा, लेकिन जमीन पर राजस्व, सड़क, बिजली, भ्रष्टाचार और अफसरशाही के सवालों से घिरा सिस्टम; सुशासन तिहार में खुलकर सामने आई हकीकत
मोहम्मद इसराइल| बिलासपुर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में इन दिनों दो तस्वीरें समानांतर चल रही हैं। पहली तस्वीर बस्तर और नक्सल प्रभावित इलाकों की है, जहां केंद्र और राज्य सरकार लगातार नक्सलवाद के खात्मे का दावा कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री और राज्य सरकार के बयान बता रहे हैं कि नक्सलियों के खिलाफ जीत हुई है।
दूसरी तस्वीर सुशासन तिहार की है। यह तस्वीर सरकारी मंचों, जनचौपालों, समाधान शिविरों, तहसील दफ्तरों, पंचायत परिसरों और गांव-कस्बों से निकलकर सामने आई है। इस तस्वीर में नक्सलियों की गोलियां नहीं हैं, लेकिन जनता की शिकायतें हैं। यहां बारूदी सुरंगें नहीं हैं, लेकिन नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, डायवर्सन, बिजली संकट, जर्जर सड़कें, अवैध प्लाटिंग, भ्रष्टाचार और बेलगाम अफसरशाही को लेकर गुस्सा है।
सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की समस्याओं को सुनना और समाधान देना बताया गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो घटनाक्रम सामने आए, उन्होंने पूरे आयोजन को विवादों, टकरावों और सवालों के घेरे में ला खड़ा किया।
सबसे ज्यादा कठघरे में राजस्व विभाग
प्रदेश के किसी भी जिले में चले जाइए, शिकायतों का सबसे बड़ा अंबार राजस्व विभाग के सामने दिखाई देता है। नामांतरण के लिए महीनों इंतजार, बंटवारे के लिए चक्कर पर चक्कर, डायवर्सन के लिए फाइलों का अटकना और सीमांकन के लिए भटकते ग्रामीण।
सुशासन तिहार के दौरान भी सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से जुड़ी सामने आईं। यही वजह रही कि कई मंचों पर अधिकारियों और कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों के गुस्से का सामना करना पड़ा।
जब सांसद ने मंच से पूछा- कितना पैसा लेते हो?
रायपुर जिले के समोदा में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में शिकायतों का ढेर देखकर सांसद Brijmohan Agrawal भड़क उठे। नायब तहसीलदार गजानंद सिदार को मंच से फटकार लगाते हुए उन्होंने सवाल दाग दिए। कार्यक्रम का वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पूरे प्रदेश में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर जनता की शिकायतें इतनी अधिक क्यों हैं।
मंत्री ने मंच से ही पटवारी को निलंबित करने का आदेश दिया
तिल्दा-नेवरा के समाधान शिविर में एक छोटे किसान की शिकायत सामने आई। आरोप था कि उसे जमीन के रिकॉर्ड संबंधी मामले में लगातार भटकाया गया। शिकायत सुनते ही राजस्व मंत्री Tank Ram Verma ने मंच से ही संबंधित पटवारी के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन के निर्देश दे दिए। यह घटना भी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी।
विधायक की टिप्पणी से भड़का विवाद
गरियाबंद जिले के पाटसिवनी में आयोजित कार्यक्रम में विधायक Rohit Sahu की पटवारी को लेकर की गई टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया। वीडियो वायरल हुआ और इसके विरोध में पटवारी संघ मैदान में उतर आया। संघ ने इसे कर्मचारियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।
अफसर और नेता आमने-सामने
दुर्ग जिले से आई तस्वीरों ने सुशासन तिहार की दूसरी तस्वीर दिखाई। यहां जनपद पंचायत के सीईओ और भाजपा नेता के बीच खुले मंच पर बहस हो गई। वीडियो में अधिकारी को यह कहते सुना गया कि “जो करना है कर लो”। मामला बढ़ा और प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया।
मंच पर ही भिड़ गए जनप्रतिनिधि और अधिकारी
मंदिर हसौद में आयोजित शिविर में कांग्रेस समर्थित नगर पालिका अध्यक्ष और एडीएम के बीच तीखी बहस हो गई। प्रोटोकॉल से लेकर व्यवस्थाओं तक पर सवाल उठे। मंच पर मौजूद लोगों के सामने हुई यह बहस भी सुर्खियां बन गई।
रेंजर पर कार्रवाई की मांग
गोबरा नवापारा के शिविर में जब वन विभाग से जुड़ी शिकायत सामने आई और संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं मिला तो सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई और निलंबन की बात कही।
अब कर्मचारियों ने खोल दिया मोर्चा
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन खुलकर मैदान में उतर आया है। संगठन का दावा है कि उसके साथ प्रदेश के लगभग 5 लाख कर्मचारी और अधिकारी जुड़े हैं।
फेडरेशन के महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक मंचों पर कर्मचारियों को अपमानित किया जा रहा है। उनका कहना है कि कार्रवाई और जवाबदेही अलग विषय है, लेकिन कैमरों के सामने फटकार और चेतावनी कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रही है। संगठन ने आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है।
सुशासन तिहार के दौरान सामने आईं ये चौंकाने वाली तस्वीरें
सुशासन तिहार के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कई ऐसी घटनाएं भी सामने आईं जिन्होंने शासन-प्रशासन की चुनौतियों को उजागर किया।
- डोंगरगढ़ में नाराज लोगों ने अधिकारियों को करीब डेढ़ घंटे तक घेरकर रखा।
- जांजगीर-चांपा में जनप्रतिनिधि और प्रशासन आमने-सामने दिखाई दिए।
- सरगुजा में 500 रुपये पेंशन के लिए एक महिला अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर बैंक पहुंची।
- सूरजपुर में नायब तहसीलदार से जुड़ा विवाद सुर्खियों में रहा।
- डोंगरगढ़ में मंच के पास चाकूबाजी की वारदात सामने आई।
- गरियाबंद में कार्यक्रम स्थल पर पेड़ गिरने से कई लोग घायल हुए।
- बिलासपुर समेत कई क्षेत्रों में बिजली संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए।
- बिलासपुर में पानी और विकास कार्यों को लेकर सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई।
- जीपीएम जिले में ज्वेलर्स कारोबारी की हत्या और लूट ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
- कांकेर और अन्य क्षेत्रों से मानव तस्करी और युवतियों को बहला-फुसलाकर ले जाने जैसी घटनाएं भी सामने आईं।
सड़क, बिजली और भ्रष्टाचार पर भी बरसे सवाल
सुशासन तिहार के दौरान केवल राजस्व विभाग ही नहीं, बल्कि सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवालों की बौछार हुई। कई जिलों से निर्माणाधीन सड़कों के उखड़ने, ठेकेदारी व्यवस्था पर सवाल उठने और जनसुविधाओं में लापरवाही की शिकायतें सामने आईं।
बिजली कटौती, पेयजल संकट और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत समस्याओं को लेकर लोगों का आक्रोश कई जगह खुलकर दिखाई दिया।
नक्सल मोर्चे की सफलता और सुशासन की चुनौती
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है और इस मोर्चे पर लगातार उपलब्धियों का दावा भी किया जा रहा है। लेकिन सुशासन तिहार के दौरान सामने आई तस्वीरों ने यह भी दिखाया कि आम जनता की लड़ाई केवल नक्सलवाद से नहीं है। जनता राजस्व दफ्तरों के चक्कर, अधूरी सड़कें, बिजली संकट, प्रशासनिक उदासीनता, भ्रष्टाचार के आरोप और धीमी सरकारी प्रक्रियाओं से भी जूझ रही है।
इसी वजह से सुशासन तिहार केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे, जनप्रतिनिधियों की नाराजगी, कर्मचारियों के असंतोष और जनता की अपेक्षाओं का सबसे बड़ा सार्वजनिक मंच बनकर उभरा है।

