अब 11 डायलिसिस मशीनों से हर दिन मिल रहा जीवनदान, महानगरों की दौड़ से बच रहे किडनी मरीज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में धीरे-धीरे बदलाव की तस्वीर दिखाई देने लगी है। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सिम्स अस्पताल बिलासपुर में अब किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस सुविधाओं का बड़ा विस्तार किया गया है। पहले जहां सीमित मशीनों के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब नई अत्याधुनिक मशीनों के जुड़ने से उपचार की रफ्तार और क्षमता दोनों बढ़ गई हैं।
प्रदेश का दूसरा मेडिकल कॉलेज होने के साथ-साथ सिम्स पर केवल बिलासपुर ही नहीं, बल्कि सरगुजा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी दबाव रहता है। रोजाना 1800 से 2200 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि 150 से अधिक मरीज भर्ती होकर इलाज लेते हैं। ऐसे में किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस यूनिट का विस्तार स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
7 से बढ़कर हुईं 11 मशीनें
सिम्स की डायलिसिस यूनिट में पहले 7 मशीनें संचालित थीं। अब 3 नई मशीनों की स्थापना और अतिरिक्त संसाधनों के साथ कुल 11 मशीनें उपलब्ध हो गई हैं। इससे मरीजों को समय पर स्लॉट मिलने लगे हैं और गंभीर रोगियों की प्रतीक्षा अवधि भी कम हुई है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यूनिट में प्रतिदिन तीन शिफ्टों में लगभग 18 से 20 मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। पिछले एक वर्ष में यहां 8230 सफल डायलिसिस प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जो सरकारी अस्पताल में बढ़ती चिकित्सा क्षमता को दर्शाती हैं।
गरीब मरीजों को मिल रही बड़ी राहत
किडनी रोगियों के लिए नियमित डायलिसिस आर्थिक रूप से बेहद महंगा उपचार माना जाता है। निजी अस्पतालों में एक सत्र पर हजारों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में आयुष्मान भारत योजना और सरकारी सुविधाओं के तहत सिम्स में निशुल्क या रियायती उपचार मिलने से गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।
यूनिट में केवल डायलिसिस ही नहीं, बल्कि हीमोग्लोबिन नियंत्रण के लिए इरिथ्रो प्रोटीन इंजेक्शन और आयरन थेरेपी की सुविधा भी दी जा रही है। गंभीर मरीजों के लिए प्लाज्माफेरेसिस जैसी विशेष चिकित्सा सेवा उपलब्ध होने से अब कई मरीजों को रायपुर, नागपुर या दिल्ली जैसे महानगरों का रुख नहीं करना पड़ रहा।
मशीनें बढ़ीं, जिम्मेदारी भी बढ़ी
डायलिसिस यूनिट प्रभारी डॉ. आशुतोष कोरी के नेतृत्व में पूरी टीम लगातार सेवाएं संचालित कर रही है। सिस्टर इंचार्ज वंदना घोष, डायलिसिस टेक्निशियन रोशन, अजय, नेहा, सतीश सहित हाउसकीपिंग स्टाफ मरीजों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति का कहना है कि अस्पताल लगातार आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में काम कर रहा है, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिल सके। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को जरूरी बताया।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अनियमित जीवनशैली के कारण डायलिसिस पर निर्भर मरीजों की संख्या में तेजी आई है। ऐसे में संभागीय स्तर पर सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस सुविधाओं का विस्तार हजारों परिवारों के लिए राहत भरा कदम साबित हो सकता है।
सिम्स में बढ़ी मशीनों की संख्या केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन मरीजों के लिए उम्मीद भी है, जिन्हें हर सप्ताह जीवन बचाने के लिए डायलिसिस मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

