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हेपेटाइटिस से जंग… सिम्स में 1189 वैक्सीन डोज, बैच देकर बढ़ा रहे जागरूकता

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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स्वास्थ्य कर्मियों और विद्यार्थियों को संक्रमण से बचाव के लिए चला विशेष अभियान, डीन बोले- जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने हेपेटाइटिस बी और सी जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए व्यापक जागरूकता और वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को संक्रमण के खतरे, लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। अब तक संस्थान में 1189 वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक हेपेटाइटिस बी और सी लीवर को प्रभावित करने वाली गंभीर संक्रमणजनित बीमारियां हैं, जो संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित सुई, असुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन और संक्रमित उपकरणों के जरिए फैलती हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों में इसका खतरा अधिक माना जाता है, क्योंकि वे लगातार मरीजों के संपर्क में रहते हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि बीमारी की शुरुआती अवस्था में कमजोरी, भूख कम लगना, उल्टी, बुखार, पेट दर्द, थकान और आंखों व त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में संक्रमण लंबे समय तक बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है और आगे चलकर लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
सिम्स प्रबंधन “0-1-6” वैक्सीनेशन शेड्यूल के तहत टीकाकरण कर रहा है। इसमें पहली डोज के बाद एक माह और फिर छह माह में अगली डोज लगाई जाती है। संस्थान ने अभियान को लगातार जारी रखने की तैयारी भी की है।
अभियान की खास बात यह है कि वैक्सीनेशन पूरा करने वाले कर्मचारियों और विद्यार्थियों को बैच देकर सम्मानित किया जा रहा है, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर टीकाकरण कराएं। इस दौरान नर्सिंग सुपरिटेंडेंट स्वाति कुमार और उज्ज्वला दास ने सिम्स के अधिष्ठाता और नोडल अधिकारियों को बैच लगाकर अभियान को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में सरिता बहादुर, ग्रेसी ममता, पुष्पलता शर्मा और भारती खरे सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहे।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है। समय पर टीकाकरण, सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों का पालन और स्वच्छता के प्रति सतर्कता अपनाकर संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि संस्थान केवल उपचार ही नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम के प्रति समाज को जागरूक करने की दिशा में भी लगातार काम कर रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों के लिए हेपेटाइटिस बी वैक्सीन बेहद जरूरी है। सुरक्षित इंजेक्शन, डिस्पोजेबल सिरिंज और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग संक्रमण रोकने में अहम भूमिका निभाता है।
वहीं, नोडल अधिकारी डॉ. भूपेन्द्र कश्यप ने बताया कि संस्थान में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पूर्ण वैक्सीनेशन के बाद बैच देने की पहल से बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से अभियान से जुड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा और रोगों की रोकथाम की दिशा में सिम्स की यह पहल अब एक सकारात्मक जनस्वास्थ्य अभियान के रूप में देखी जा रही है, जो समाज में जागरूकता का मजबूत संदेश दे रही है।

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