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सिम्स की ग्रेजुएशन सेरेमनी में 173 नए डॉक्टरों ने पहना जिम्मेदारियों का सफेद कोट

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर।
देश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती देने वाली नई पीढ़ी के डॉक्टरों का एक अहम पड़ाव सोमवार को पूरा हुआ, जब छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में एमबीबीएस बैच-2020 के 173 विद्यार्थियों ने “Graduation Ceremony 2026” में सफेद कोट पहनकर चिकित्सा सेवा की औपचारिक जिम्मेदारी संभाली। सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में संघर्ष, समर्पण, कोविड जैसे चुनौतीपूर्ण दौर के अनुभव और वर्षों की मेहनत एक साथ मंच पर सजीव नजर आई, जहां छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला।
सफर का उत्सव: किताबों से अस्पताल तक की कहानी
यह आयोजन केवल डिग्री वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन अनगिनत रातों, संघर्षों और अनुभवों का उत्सव बना, जो विद्यार्थियों ने मेडिकल शिक्षा के दौरान जिए। कभी नींद से समझौता कर पढ़ाई, तो कभी अस्पतालों में मरीजों की पीड़ा के बीच सीख—हर अनुभव ने इस बैच को एक नई पहचान दी।
कार्यक्रम की शुरुआत से ही सभागार भावनात्मक माहौल में डूब गया। जब विद्यार्थियों के सफर का जिक्र हुआ, तो कई आंखें नम हो गईं। जो विद्यार्थी कभी सपनों और आशंकाओं के साथ कॉलेज पहुंचे थे, वे अब डॉक्टर बनकर समाज की सेवा के लिए तैयार खड़े थे।
कोविड काल ने दी असली सीख
इस बैच की पढ़ाई का बड़ा हिस्सा कोविड महामारी के कठिन दौर में बीता। विद्यार्थियों ने न सिर्फ पढ़ाई जारी रखी, बल्कि अस्पतालों के वास्तविक हालात को भी करीब से देखा।
कई छात्रों ने साझा किया कि उन्होंने पहली बार जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष को इतने करीब से महसूस किया—कहीं मरीज की उम्मीद, तो कहीं अपनों को खोने का दर्द। इन अनुभवों ने उन्हें सिर्फ डॉक्टर नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान भी बनाया।
अतिथियों का संदेश: सेवा ही चिकित्सा का मूल
समारोह में उपस्थित अतिथियों—श्री दीपक श्रीवास्तव, डॉ. आरती पांडे, डॉ. राजीव रतन तिवारी, श्री अशोक दिल्लीवार और डॉ. संदीप सोमवार—ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए चिकित्सा को मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि समाज डॉक्टरों को केवल इलाज के लिए नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखता है।
अधिष्ठाता का संबोधन: डिग्री नहीं, जिम्मेदारी का दिन


सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि यह दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करने का दिन है।
उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि एक डॉक्टर के हाथों में सिर्फ स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि मरीजों का विश्वास, परिवारों की उम्मीद और दुआएं भी होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता उतनी ही जरूरी है—एक अच्छा व्यवहार और सहानुभूति मरीज के उपचार का अहम हिस्सा होता है।
हर दिन नई चुनौती: चिकित्सा अधीक्षक


चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर बनने का सफर कभी समाप्त नहीं होता।
हर दिन नई चुनौतियां, नए अनुभव और नई सीख लेकर आता है। आने वाले समय में यही विद्यार्थी हजारों लोगों के जीवन से जुड़ेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।
वरिष्ठ चिकित्सकों की उपस्थिति
कार्यक्रम में डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. केशव कश्यप, डॉ. मनीष साहू, डॉ. श्रेया तोड़ी, डॉ. रेखा बारापात्रे, डॉ. ओपी राज, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. संगीता जोगी, डॉ. चंद्रहास ध्रुव, डॉ. जे.पी. स्वइन और डॉ. सागरिका प्रधान सहित संस्थान के कई वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक और अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
भावनात्मक पल: जब सपनों ने आकार लिया
समारोह के दौरान कई भावुक क्षण सामने आए। जब विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, तो कई अभिभावकों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए।
किसी किसान पिता का सपना पूरा हुआ, तो किसी मां की वर्षों की प्रार्थनाएं साकार हुईं।
विद्यार्थियों ने मंच से अपने शिक्षकों का आभार जताते हुए कहा कि सिम्स ने उन्हें सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं सिखाया, बल्कि इंसानियत और सेवा का मूल्य भी समझाया।
उत्साह, आत्मीयता और संकल्प का संगम
पूरे कार्यक्रम में उत्साह, अपनापन और गर्व का माहौल रहा। सभागार में मौजूद हर व्यक्ति इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बना।
सफेद कोट पहने इन 173 युवा डॉक्टरों के चेहरों पर आत्मविश्वास और दिलों में समाज की सेवा का संकल्प स्पष्ट नजर आया।
नई पहचान के साथ आगे बढ़ते कदम
“Graduation Ceremony 2026” एक ऐसे पड़ाव के रूप में सामने आई, जहां संघर्ष, सपनों और सेवा का संगम दिखाई दिया।
अब ये 173 युवा डॉक्टर केवल अपने परिवार या संस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक समाज की उम्मीद के रूप में सामने आए हैं—जहां चिकित्सा के साथ संवेदनाएं और विश्वास भी जुड़ा है।

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