00 कलेक्टर के आदेश पर हुई कार्रवाई

बिलासपुर जिले में अवैध खनिज खनन एक प्रमुख समस्या बन गई है, जो न केवल प्रशासन के लिए चुनौती है बल्कि पर्यावरण और सामाजिक ढांचे के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है। हाल ही में कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देशानुसार, जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, मिट्टी, और मुरुम के उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने का प्रयास किया। इस कार्रवाई में दो हाइवा, दो टिप्पर और एक जेसीबी मशीन जब्त की गईं।
लगातार कार्रवाई का दावा
जिला खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा लगातार पूरे जिला में खनिजों के अवैध उत्खनन,परिवहन,भंडारण के संबंध नियमित सघन जांच किया जा रहा है। इस कड़ी में आज खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा खनिज रेत के अवैध परिवहन करते पाये जाने पर 2 हाईवा को जप्त कर 1 हाईवा को पुलिस थाना कोनी में और 1 हाईवा को थाना सकरी मे अभिरक्षा में रखा गया है। इसी प्रकार उड़नदस्ता दल द्वारा केंदा क्षेत्र में खनिज मिट्टी और मुरूम के अवैध उत्खनन करते पाये जाने पर 1 जेसीबी और 2 टिप्पर को जप्तकर पुलिस थाना केन्दा में अभिरक्षा मे रखा गया है l खनिज विभाग की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
अरपा नदी पर संकट:
बिलासपुर की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरपा नदी अवैध रेत खनन की चपेट में है। लगातार अवैध खनन के कारण नदी का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। रेत निकालने से नदी का तल गहराता जा रहा है, जिससे जलस्तर गिरता जा रहा है। यह न केवल जल संकट को जन्म देता है, बल्कि नदी किनारे की पारिस्थितिकी को भी नष्ट कर रहा है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
खनन माफिया की सक्रियता
जिले में अवैध खनन माफिया अत्यधिक संगठित है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई के बावजूद, ये माफिया नए-नए तरीके अपनाकर खनन कार्य जारी रखते हैं। अवैध खनन से न केवल सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होती है।
प्रशासन की रणनीति:
खनिज विभाग और जिला प्रशासन अब सख्ती के मूड में है। हालिया कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कलेक्टर अवनीश शरण ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उड़नदस्ता दल द्वारा की जा रही नियमित छापेमारी इस बात का प्रमाण है।
स्थानीय सहयोग की आवश्यकता:
अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है। नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी संदिग्ध खनन गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। साथ ही, टेक्नोलॉजी जैसे ड्रोन निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
जल स्रोतों पर पड़ सकता है प्रभाव
बिलासपुर में अवैध खनन के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए यह जरूरी है कि इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिले। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जिले की पारिस्थितिकी और जलस्रोतों पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।



