बिलासपुर/दुर्ग, 14 मार्च। त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने की ऐतिहासिक पहल के तहत वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ शनिवार को दुर्ग जिला न्यायालय में किया गया। इसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने किया। इस अवसर पर पोर्टफोलियो न्यायाधीश न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी भी गरिमामयी उपस्थिति में मौजूद रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान पूरे प्रदेश में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 71,94,079 मामलों का निराकरण किया गया, जिनमें आपराधिक शमनीय मामले, दीवानी प्रकरण, राजस्व प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, यातायात चालान तथा मुकदमा पूर्व प्रकरण शामिल रहे। इन मामलों में कुल 37,32,45,02,059 रुपए (लगभग 3732 करोड़ रुपए से अधिक) की राशि का अवॉर्ड पारित किया गया।
न्यायिक अधिकारियों व विभागों से की चर्चा
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दुर्ग जिला न्यायालय के साथ ही रायपुर जिला न्यायालय में चल रही राष्ट्रीय लोक अदालत की कार्यवाही का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंकिंग संस्थानों और विद्युत विभाग के अधिकारियों से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि न्यायिक मामलों के लंबित बोझ को कम करने और विवादों के प्रभावी समाधान के लिए सभी हितधारकों के बीच सामूहिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने लोक अदालत की प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों के प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया, ताकि पक्षकारों को त्वरित और सार्थक न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति को सभी के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए लोक अदालत तंत्र को वादी-अनुकूल और सुलभ मंच के रूप में मजबूत करने की सामूहिक प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई।
पंडवानी शैली में तैयार थीम सांग का शुभारंभ
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने दुर्ग जिला न्यायालय में लोक अदालत एवं मध्यस्थता जागरूकता के लिए तैयार “थीम सांग” का भी उद्घाटन किया। यह गीत छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी शैली में तैयार किया गया है, ताकि वैकल्पिक विवाद समाधान का संदेश स्थानीय संस्कृति और शैली के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हाईकोर्ट में गठित दोनों खंडपीठों के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद से भी वर्चुअल चर्चा की। उन्होंने विवादों के समाधान को सुगम बनाने और सौहार्दपूर्ण निपटारे की भावना को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रभावी प्रयासों की सराहना की।
इसके साथ ही राज्य के सभी जिलों के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत की कार्यवाहियों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य न्यायाधीश ने त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में राष्ट्रीय लोक अदालत की भूमिका को रेखांकित करते हुए न्यायिक अधिकारियों द्वारा अधिकतम मामलों के निपटारे के लिए किए जा रहे प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।
हाईकोर्ट में पारिवारिक विवाद का हुआ समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में एक पारिवारिक विवाद का भी सफल समाधान किया गया। यह मामला पति-पत्नी के बीच उत्पन्न वैवाहिक मतभेद से जुड़ा था। परिवार न्यायालय बिलासपुर ने पहले तलाक की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ प्रथम अपील दायर की गई थी।
लोक अदालत के दौरान न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष दोनों पक्षकारों ने अपने मतभेद दूर करते हुए पुनः साथ रहने पर सहमति व्यक्त की। समझौते के अनुसार पति-पत्नी अपने बच्चों के साथ एक ही छत के नीचे निवास करेंगे और पति पत्नी व बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी वहन करेगा। इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से पारिवारिक विवाद का सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो सका।
लोक अदालत को ऐतिहासिक सफलता बनाने में सभी का योगदान
उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने लोक अदालत की प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश की जनता को शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने को निरंतर उच्च प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में लोक अदालतों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने और आम लोगों की न्याय तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य भर में प्रधान जिला न्यायाधीशों की नियमित समीक्षा बैठकें और मार्गदर्शन लगातार किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश ने छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू, सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, परिवार न्यायालयों के न्यायाधीशों, लोक अदालत की खंडपीठों के पीठासीन अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों और अन्य सभी हितधारकों के प्रति आभार और सराहना व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि इन सभी के प्रत्यक्ष और परोक्ष सहयोग से ही राष्ट्रीय लोक अदालत को ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है और बड़ी संख्या में मामलों का सौहार्दपूर्ण निराकरण संभव हो सका है।



