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चमकेगी छत्तीसगढ़ की संस्कृति, महोत्सव का लेंगे आनंद….

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 सुआ नाच महोत्सव 2024 का भव्य आयोजन, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को मिलेगा बढ़ावा

बिलासपुर।  छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस वर्ष 30 नवंबर 2024 को 6वें सुआ नाच महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव बिलासपुर में तोरवा धान मंडी स्थित सज्जा बाजार ग्राउंड में शाम 5 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम के आयोजक भोजली महोत्सव समिति हैं, जिन्होंने इस आयोजन को सांस्कृतिक जागरूकता के मंच के रूप में स्थापित किया है।

सुआ नाच महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को प्रदर्शित करेंगी। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है,

क्या है खास

सुआ नाच (या सुआ गीत) छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोक नृत्य और गीत है, जिसे खासतौर पर दीपावली के समय महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित है और यह स्त्रियों की भावनाओं, सामाजिक मुद्दों, प्रेम और व्यथा को व्यक्त करता है।

“सुआ” का अर्थ:

“सुआ” का मतलब तोता होता है। इस नृत्य में महिलाएं मिट्टी या लकड़ी से बने तोते (सुआ) को बीच में रखकर उसके चारों ओर नृत्य करती हैं। यह नृत्य और गीत प्रायः प्रेम, पीड़ा, या किसी के वियोग को दर्शाते हैं।

सुआ नाच क्यों मनाया जाता है:

1. सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाएं:
इस नृत्य के माध्यम से महिलाएं अपनी भावनाओं को व्यक्त करती हैं। यह उनके लिए एक तरह से अपनी व्यथा और सुख-दुख साझा करने का माध्यम है।

2. फसल कटाई का पर्व:
सुआ नाच मुख्य रूप से फसल कटाई के मौसम से जुड़ा है। इसे कृषि से भी जोड़ा जाता है और यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक तरीका है।

3. आर्थिक और सामाजिक एकता:
महिलाएं समूह बनाकर गाँव-गाँव जाकर सुआ नृत्य प्रस्तुत करती हैं और घर-घर से अन्न या धन एकत्र करती हैं। यह उनके आर्थिक और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।

4. पति की लंबी उम्र की कामना:
कुछ स्थानों पर यह भी मान्यता है कि इस नृत्य के माध्यम से महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।

नृत्य की शैली:

महिलाएं गोल घेरा बनाकर मिट्टी के सुआ के चारों ओर नाचती हैं।

वे “सुआ” गीत गाते हुए ताली बजाती हैं।

गीतों में स्थानीय बोलचाल और जनजीवन से जुड़े प्रसंग होते हैं।

सुआ नाच छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सामाजिक एकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सुंदर उदाहरण है।

विशेष आकर्षण:

प्रमुख अतिथि: लोक कलाकार एवं सांस्कृतिक हस्तियां

नृत्य प्रस्तुतियां: छत्तीसगढ़ी सुआ नाच

संपर्क: शंकर यादव (अध्यक्ष) – 9827490637

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोककला के प्रति जागरूकता लाना और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

कहां होगा आयोजन

दिनांक: 30 नवंबर 2024

समय: शाम 5:00 बजे से

स्थान: तोरवा धान मंडी, सज्जा बाजार ग्राउंड, बिलासपुर

आयोजक: भोजली महोत्सव समिति

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