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बिलासपुर के किसानों के साथ बड़ा अन्याय, धान पंजीयन में बड़ी गड़बड़ी…  56 हजार से ज्यादा किसानों का रिकॉर्ड बिगड़ा, 291 का रकबा शून्य… 20 हजार का कम, 35 हजार के धान की जगह दूसरी फसल दर्ज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Bilaspur बिलासपुर। न्यूज़ डॉन छत्तीसगढ़
खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के लिए धान पंजीयन प्रक्रिया में बिलासपुर जिले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि हजारों किसानों के रकबे और फसल विवरण में गंभीर त्रुटियां दर्ज हुई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 56 हजार से अधिक किसानों के पंजीयन रिकॉर्ड प्रभावित हुए, जिनमें कई किसानों का रकबा शून्य हो गया, हजारों किसानों का रकबा कम दर्ज हुआ और बड़ी संख्या में किसानों के धान की जगह दूसरी फसल दर्ज कर दी गई।
विधानसभा में उठा किसानों का मुद्दा


कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने विधानसभा में प्रश्न लगाकर खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 में पंजीकृत किसानों के रकबे में आई समस्याओं की जानकारी मांगी। विधायक ने सरकार से यह जानना चाहा कि
कितने किसानों का रकबा शून्य हो गया
कितने किसानों का रकबा कम दर्ज हुआ
कितने किसानों के धान की जगह अन्य फसल दर्ज हो गई
और इन समस्याओं में से कितनों का निराकरण किया गया
इस प्रश्न के उत्तर में खाद्य मंत्री ने विधानसभा में जिले से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए।


बिलासपुर जिले के सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सरकार द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार बिलासपुर जिले में धान पंजीयन के दौरान बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आईं।
291 किसानों का रकबा शून्य दर्ज हो गया
20,172 किसानों का रकबा कम दर्ज हुआ
35,808 किसानों के धान की फसल की जगह अन्य फसल की प्रविष्टि हो गई
इन सभी मामलों को मिलाकर 56 हजार से अधिक किसानों के पंजीयन रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई।
कितनी समस्याओं का हुआ निराकरण
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रभावित किसानों के मामलों में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई है।
अब तक 31,054 किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जा चुका है
शेष मामलों में सुधार की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
क्यों गंभीर है यह गड़बड़ी
धान पंजीयन में दर्ज रकबा और फसल विवरण के आधार पर ही किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के पात्र होते हैं। यदि किसी किसान का रकबा शून्य दर्ज हो जाए या धान की जगह दूसरी फसल दर्ज हो जाए तो उसे धान बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों के लिए क्या असर
धान पंजीयन की प्रक्रिया में हुई इस तरह की त्रुटियां सीधे किसानों की उपज की बिक्री और भुगतान को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में हजारों किसानों के रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ी को लेकर यह मुद्दा गंभीर माना जा रहा है।
आंकड़ों में पूरी स्थिति
रकबा शून्य291रकबा कम दर्ज20,172धान की जगह अन्य फसल दर्ज35,808कुल प्रभावित किसान56,000+समस्याओं का निराकरण31,054

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