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कोटा में महिला शक्ति का सम्मान: जज, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षिकाओं और मितानिनों को किया गया सम्मानित

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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कोटा , बिलासपुर।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर करगी रोड कोटा स्थित अग्रसेन भवन में महिलाओं के सम्मान में भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि विधायक अटल श्रीवास्तव ने महिलाओं को समाज की आधारशिला बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।
कोटा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नगर के अग्रसेन भवन में महिला सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। कार्यक्रम में जज, डॉक्टर, इंजीनियर, महिला प्राचार्य, शिक्षिकाओं तथा मितानिनों सहित कई महिलाओं को शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर ससम्मान सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएं समाज की आधारशिला हैं, जो अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के बल पर समाज के हर क्षेत्र में अपना मुकाम हासिल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला दिवस के अवसर पर महिला शक्ति को सम्मानित कर हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
विधायक श्रीवास्तव ने कहा कि आज की नारी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी शक्ति, बुद्धिमत्ता और संघर्षशीलता के बल पर समाज को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने सभी से ऐसा वातावरण बनाने का आह्वान किया, जिसमें हर नारी बिना किसी भेदभाव और बाधा के अपने सपनों को साकार कर सके।
अपने उद्बोधन में विधायक श्रीवास्तव ने रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महिलाओं की अहम भूमिका रही है। इसलिए समाज का दायित्व है कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर प्रदान किए जाएं, जिससे एक सशक्त और समानता पर आधारित समाज का निर्माण हो सके।
इस अवसर पर समाजसेवी आदित्य दीक्षित ने कहा कि नारी त्याग, ममता और शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नारी के रूप में कभी सीता का धैर्य, कभी राधा का प्रेम और कभी शक्ति का स्वरूप देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि समाज में कई महिलाएं ऐसी हैं जो सुबह से ही मजदूरी के लिए अपने घरों से निकल जाती हैं, ताकि उनके परिवार के लोग भूखे न सोएं। घर का सारा काम करने के बाद भी वे अपनी थकान और तकलीफ को छिपाकर चेहरे पर मुस्कान बनाए रखती हैं।
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं हमारे घरों के डस्टबिन में पड़े कचरे को उठाने के लिए घर-घर दस्तक देती हैं और अपने परिश्रम से परिवार का पालन-पोषण करती हैं। ऐसे समर्पण और संघर्ष के कारण भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है।
आदित्य दीक्षित ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों की पत्नियां भी अपने पति को देश की रक्षा के लिए समर्पित कर देती हैं। वे अपने माथे का सिंदूर और अपनी गोद तक सूनी कर देती हैं, ताकि देश सुरक्षित रह सके और हम अपने घरों, गांवों और शहरों में सुरक्षित जीवन जी सकें।
उन्होंने कहा कि इस समारोह का उद्देश्य नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को समाज के सामने लाना और उन्हें आगे भी समाज सेवा के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी आदित्य दीक्षित ने अपना जन्मदिन भी समारोह के दौरान केक काटकर मनाया।
इस अवसर पर नगर के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, महिला संगठनों की सदस्याएं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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