बिलासपुर, रायपुर ,दुर्ग।छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मक्के की फसल के बीच अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस और एफएसएल टीम की कार्रवाई में करीब 5 से 6 एकड़ क्षेत्र में उगाई गई अफीम की फसल का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान सामने आया कि यह खेती उस जमीन पर की जा रही थी, जिसका संबंध स्थानीय भाजपा नेता के परिवार से बताया जा रहा है। मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस की दबिश
दुर्ग जिले के जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के समोदा गांव में खेत के अंदर अवैध रूप से मादक पदार्थ की खेती किए जाने की सूचना पुलिस को मुखबिर के माध्यम से मिली थी। सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और बताए गए स्थान पर दबिश दी।
जांच के दौरान खेत के अंदर मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए जाने की पुष्टि हुई। एफएसएल टीम ने मौके पर ही परीक्षण किया, जिसमें मादक पदार्थ की खेती होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने के बाद टीम ने कार्रवाई की और खेत में अवैध रूप से मादक पदार्थ उगाया जाना पाया गया। हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वह अफीम की खेती कर रहा था, लेकिन उसके पास खेती से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला है।
मक्के की फसल के बीच छिपाकर उगाई जा रही थी अफीम
पुलिस के अनुसार अफीम की खेती को इस तरह से किया गया था कि बाहर से देखने पर यह सामान्य मक्के का खेत दिखाई दे। मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि किसी को संदेह न हो।
मौके पर लगभग 5 से 6 एकड़ क्षेत्र में फैली अफीम की खेती पाई गई। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस अवैध फसल की बाजार कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है।
जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज नाम
राजस्व विभाग के अनुसार जिस जमीन पर यह खेती की जा रही थी, उसका खसरा नंबर 310 ग्राम झेंझरी में दर्ज है। लगभग 9 एकड़ भूमि मधुमति ताम्रकार और प्रीतिबाला ताम्रकार के नाम दर्ज बताई जा रही है।
राजस्व निरीक्षक रेखा शुक्ला ने बताया कि जमीन के रिकॉर्ड में यही नाम दर्ज हैं और उसी भूमि पर मक्के की फसल के साथ अफीम की मिश्रित खेती पाए जाने की जानकारी मिली है।
सरपंच ने दी थी पुलिस को सूचना
ग्राम समोदा के सरपंच अरुण गौतम के अनुसार उन्हें दो दिन पहले इस खेती की जानकारी मिली थी। उन्होंने बताया कि उनके पास एक फोटो आया था, जिसे उन्होंने इंटरनेट पर सर्च किया। सर्च करने पर उन्हें पता चला कि यह अफीम का पौधा है।
सरपंच के अनुसार मक्के की फसल के बीच यह खेती की जा रही थी और इसमें विनायक ताम्रकार तथा बृजेश ताम्रकार के शामिल होने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि जिस खेत में यह खेती की जा रही थी, वह जमीन उनके परिवार की बहन के नाम पर दर्ज बताई जा रही है।
किसान का अलग दावा
मामले में किसान विनायक ताम्रकार ने अलग बयान दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को खेती के लिए दी थी।
उनके अनुसार उनके खेत में चने की फसल लगी है और फसल खराब होने के डर से उन्होंने खेत में लोगों को घुसने से रोका था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बगल वाले गांव झिंझरी में स्थित मधुबाला और प्रीतिबाला के खेत में राजस्थान से आए कुछ लोग अफीम की खेती कर रहे थे।
मौके पर पहुंचे कलेक्टर
मामले की जानकारी मिलने के बाद दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह भी ग्राम समोदा क्षेत्र पहुंचे और खेत का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि अफीम की खेती की सूचना मिलने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है।
कलेक्टर के अनुसार प्रारंभिक जांच में यहां अफीम की खेती किए जाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि जमीन कुछ लोगों को विरासत में मिली है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच
पुलिस के अनुसार अभी तक किसी की औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दुर्ग जिले में इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का यह पहला मामला बताया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की टीम मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

