Latest news

राज्य प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति फिर 50%: साय सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

40% से बढ़ाकर पुनः 50% किया गया अनुपात, तहसीलदार–नायब तहसीलदारों में उत्साह
रायपुर। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक 91 [ESTB-101(1)/7/2024-GAD-4] के माध्यम से राज्य प्रशासनिक सेवा में भर्ती हेतु पदोन्नति का प्रतिशत 40 प्रतिशत से बढ़ाकर पुनः 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 के पूर्व राज्य प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति एवं सीधी भर्ती का अनुपात 50-50 प्रतिशत था। बाद में इसे घटाकर 40-60 कर दिया गया था, जिससे फील्ड में लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई थी।


छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ लगातार शासन से मांग करता रहा कि पदोन्नति एवं सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों का अनुपात पूर्ववत 50-50 प्रतिशत किया जाए, ताकि सेवाकालीन अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का समुचित सम्मान सुनिश्चित हो सके। संघ की इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पदोन्नति का प्रतिशत पुनः 50 प्रतिशत बहाल कर दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
राज्य प्रशासनिक सेवा में तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति पाने वाले अधिकारी औसतन 10–12 वर्षों का जमीनी अनुभव रखते हैं। यह अनुभव केवल राजस्व प्रकरणों तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, निर्वाचन दायित्व, लोकसेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन और आमजन से सीधा संवाद शामिल होता है।
ऐसे अधिकारी गांव और तहसील स्तर पर शासन की योजनाओं को लागू करने की वास्तविक चुनौतियों से भली-भांति परिचित होते हैं। उनके पास भूमि विवादों के निराकरण, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, राहत वितरण और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत एवं पुनर्वास कार्यों का व्यावहारिक अनुभव होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब ऐसे अधिकारी उच्च प्रशासनिक पदों पर पदोन्नत होते हैं तो वे नीतियों के क्रियान्वयन में अधिक संवेदनशील, त्वरित और परिणाममुखी दृष्टिकोण अपनाते हैं। इससे प्रशासनिक निर्णयों में जमीनी हकीकत का बेहतर समावेश संभव हो पाता है।
अनुभव और ऊर्जा का संतुलन
पदोन्नति का अनुपात 50 प्रतिशत किए जाने से प्रशासनिक तंत्र में अनुभव और नई ऊर्जा का संतुलित समन्वय सुनिश्चित होगा। सीधी भर्ती से आने वाले अधिकारियों के पास नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोण और आधुनिक प्रशासनिक समझ होती है, वहीं पदोन्नत अधिकारी वर्षों के फील्ड अनुभव और स्थानीय परिस्थितियों की गहरी समझ लेकर आते हैं।
दोनों के समन्वय से:
नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा
राजस्व प्रकरणों का त्वरित निराकरण होगा
आमजन की शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित होगा
आपदा की स्थिति में बेहतर समन्वय स्थापित होगा
फील्ड प्रशासन में निरंतरता बनी रहेगी
जवाबदेही और पारदर्शिता में वृद्धि होगी
संघ ने जताया आभार
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने शासन के इस महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सहित मंत्रिपरिषद के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया है।
संघ का कहना है कि यह निर्णय न केवल अधिकारियों के मनोबल को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सुशासन की दिशा में भी एक मजबूत कदम सिद्ध होगा।
के. के. लहरे, प्रांताध्यक्ष
प्रश्न: संघ इस निर्णय को किस रूप में देखता है?
के. के. लहरे: यह निर्णय हमारे लिए अत्यंत संतोषजनक है। वर्षों से हम यह मांग कर रहे थे कि पदोन्नति का अनुपात पुनः 50 प्रतिशत किया जाए। शासन ने हमारे तर्कों और मांगों पर सकारात्मक विचार किया, इसके लिए हम आभारी हैं।
प्रश्न: इससे अधिकारियों के मनोबल पर क्या असर पड़ेगा?
लहरे: जब किसी अधिकारी को यह भरोसा होता है कि उसके अनुभव और मेहनत को उचित अवसर मिलेगा, तो उसका मनोबल स्वतः बढ़ता है। यह निर्णय फील्ड में काम कर रहे तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के लिए प्रेरणादायक है।
प्रश्न: प्रशासनिक कार्यप्रणाली में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे?
लहरे: पदोन्नत अधिकारी 10–12 वर्षों का जमीनी अनुभव लेकर आते हैं। वे राजस्व, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों में व्यावहारिक समझ रखते हैं। इससे नीतियों का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और परिणाममुखी होगा।
प्रश्न: क्या इसे सुशासन की दिशा में कदम माना जा सकता है?
लहरे: बिल्कुल। अनुभव और ऊर्जा का संतुलन ही सशक्त प्रशासन की पहचान है। यह निर्णय प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करेगा।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।