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₹80000 लेकर खाकी हुई बदनाम… हवलदार और आरक्षक सस्पेंड, थाना प्रभारी पर कार्रवाई की लटकी तलवार, जानिए एसएसपी ने क्या कहा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

Bilaspur।

बिलासपुर से एक बार फिर खाकी की साख पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। नशे के खिलाफ अभियान का दम भरने वाली पुलिस के ही एक हिस्से पर 80 हजार रुपये लेकर गांजा तस्करी में पकड़े गए नाबालिग को छोड़ने का आरोप लगा है। मामला सामने आते ही एसएसपी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए हवलदार और आरक्षक को निलंबित कर दिया, जबकि थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आरोपी दिनभर की तलाश के बाद भी हाथ नहीं आया।


13 साल का बेटा, 500 ग्राम गांजा और 80 हजार की डील
शनिवार को कोटा थाना पुलिस ने रानीसागर गांव में एक कथित गांजा व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे को पकड़ा। उसके पास से 500 ग्राम गांजा बरामद किया गया। नियमों के तहत किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन आरोप है कि थाने में ही 80 हजार रुपये की मांग कर दी गई।
परिवार ने गांव के एक व्यक्ति से कर्ज लेकर 80 हजार रुपये जुटाए और थाने पहुंचाए। आरोप है कि रकम मिलते ही नाबालिग को गांजे सहित छोड़ दिया गया। न तो विधिवत जब्ती की कार्रवाई हुई, न ही किशोर बोर्ड के समक्ष पेशी।
रविवार सुबह खुलासा, डीएसआर मीटिंग में फटकार
रविवार सुबह मामला रजनेश सिंह तक पहुंचा। डीएसआर मीटिंग में एसएसपी ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। हवलदार प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर को निलंबित कर दिया गया। थाना प्रभारी नरेश चौहान से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम आरोपी के घर पहुंची, लेकिन वह फरार मिला। दिनभर सर्चिंग के बावजूद पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। अब मोबाइल लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
अवैध शराब में भी ‘कमाई’ का आरोप
कोटा थाना पर पहले भी उगाही के आरोप लगते रहे हैं। अवैध शराब बेचने वालों की धरपकड़ के नाम पर मोटी रकम लेकर छोड़ने की शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं। एक मामले में अफसरों की फटकार के बाद वसूली गई रकम वापस कराई गई थी। इसके बावजूद हालात नहीं बदले—और अब गांजा मामले ने खाकी की छवि पर नया दाग लगा दिया है।
सवालों के घेरे में पूरी थानेदारी
इस पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी, हवलदार और आरक्षक की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एसएसपी खुद नशे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, तब थाना स्तर पर ऐसे ‘सौदे’ कैसे हो रहे हैं? क्या बिना मिलीभगत के नाबालिग को गांजे सहित छोड़ा जा सकता है?
खाकी की साख दांव पर है। एक ओर नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात, दूसरी ओर 80 हजार में कानून का सौदा—यह दोहरा चेहरा अब उजागर हो चुका है। फिलहाल दो सस्पेंशन हुए हैं, टीआई पर कार्रवाई लंबित है और मुख्य आरोपी फरार। अब देखना यह है कि जांच की धार नीचे तक जाती है या मामला सिर्फ निलंबन तक सिमट कर रह जाता है।

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