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फ्रंटलाइन वारियर बोलीं – ‘सम्मान नहीं, सिर्फ प्रोत्साहन! अब जीने लायक मानदेय दो’, घेरा कलेक्ट्रेट

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मितानिन यूनियन का सीएम के नाम ज्ञापन, 10 हजार मानदेय, 5 लाख रिटायरमेंट और शासकीय दर्जा देने की मांग
बिलासपुर/रायपुर, 12 फरवरी 2026।
कोविड काल में ‘फ्रंटलाइन वारियर’ कहकर सम्मानित की गईं मितानिन (आशा कार्यकर्ता) अब अपने हक के लिए मुखर हो गई हैं। छत्तीसगढ़ मितानिन (आशा) यूनियन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव, संचालक स्वास्थ्य, एनएचएम और कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट कहा है— “हम दिन-रात सेवा देते हैं, लेकिन हमें कर्मचारी का दर्जा तक नहीं मिला। अब सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा चाहिए।”
यूनियन का कहना है कि वर्ष 2003 से आशा कार्यक्रम के तहत वे स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर काम कर रही हैं। पल्स पोलियो अभियान, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, महामारी नियंत्रण—हर मोर्चे पर मितानिनों की अहम भूमिका रही है। कोविड महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन आज भी उन्हें “मामूली प्रोत्साहन राशि” पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
“न कर्मचारी, न मजदूर… तो हम हैं क्या?”


यूनियन ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो शासकीय कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही मजदूर की श्रेणी में रखा गया है। न्यूनतम मजदूरी के बराबर भी भुगतान नहीं हो रहा। पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी कोई सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
राज्यांश और केंद्रांश की राशि अलग-अलग और अनियमित मिलती है। दावा पत्र की प्रोत्साहन राशि वर्षों से नहीं बढ़ी, बल्कि कुछ मदों में घट गई है। रविवार को भी मीटिंग और प्रशिक्षण रखे जाने से पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है।


बिलासपुर में 2 साल का भुगतान लंबित
ज्ञापन में खासतौर पर उल्लेख किया गया है कि फाइलेरिया, निक्षय निरामय और कुष्ठ सर्वे का दो वर्षों का भुगतान बिलासपुर जिले की मितानिनों को नहीं मिला। विभाग द्वारा राशि “लेप्स” होने की बात कही जा रही है, जबकि कार्यकर्ताओं ने रिपोर्ट समय पर जमा की है। यूनियन ने तत्काल भुगतान की मांग की है।
प्रमुख मांगें एक नजर में
राज्य मानदेय 2200 से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रतिमाह किया जाए
राज्यांश 75% से बढ़ाकर 100% किया जाए
प्रोत्साहन राशि कम से कम दोगुनी की जाए
हर माह की 6 तारीख तक एकमुश्त भुगतान
मितानिन ऑनलाइन पासबुक व्यवस्था शुरू हो
रिटायरमेंट पर 5 लाख रुपए और पेंशन योजना लागू हो
पीएफ, ग्रेच्युटी लागू की जाए
कोरोना वारियर के रूप में घोषित 1000 रुपए अतिरिक्त प्रोत्साहन का बकाया भुगतान
आकस्मिक मृत्यु पर 4 लाख (केंद्र योजना अनुसार) और ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर 10 लाख व एक सदस्य को नौकरी
शासकीय स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा
एएनएम/जीएनएम प्रशिक्षण प्राप्त मितानिनों की शीघ्र नियुक्ति
फोटो कॉपी/स्टेशनरी हेतु 1000 रुपए प्रतिमाह
यूनिफॉर्म हेतु 4000 रुपए प्रतिवर्ष
“सम्मान चाहिए, सिर्फ तालियां नहीं”
यूनियन के सलाहकार विश्वजीत हारोडे, कार्यकारी अध्यक्ष बबीता सोना, उपाध्यक्ष ममता एक्का और नीरा देवी साहू ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं की प्रशंसा तो होती है, लेकिन जमीन पर आर्थिक स्थिति दयनीय है।
उनका कहना है—
“जब देश महामारी से जूझ रहा था, हम सैनिकों की तरह डटे थे। आज भी 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। लेकिन हमारे परिवारों का भरण-पोषण मुश्किल हो रहा है। अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय चाहिए।”
सरकार पर बढ़ेगा दबाव?
स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियाद मानी जाने वाली मितानिनों की ये मांगें अगर लंबित रहीं तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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