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सिम्स में ICD-10 और ICF पर एकदिवसीय प्रशिक्षण, WHO के मानक कोडिंग सिस्टम से चिकित्सकों को कराया अवगत

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। सिम्स चिकित्सा महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण (ICD-10) एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षमता, अक्षमता व स्वास्थ्य वर्गीकरण (ICF) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरुवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। अधिष्ठाता डॉ. रमनेश मूर्ति के प्रयासों से आयोजित इस प्रशिक्षण में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित मानक कोडिंग प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।

दिनांक 12 फरवरी 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में भारत सरकार के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ इंटेलिजेंस (CBHI) से उप-निदेशक सुष्री हर्षिता नंदलाल छाजेड़ (भोपाल, मप्र) विशेष रूप से शामिल हुईं। उनके साथ गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल (मप्र) के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. अतुल श्रीवास्तव, श्री अंकुर वर्मा, श्री आकाश सराफ और श्री पंकज कुमार भी मौजूद रहे।
प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण का 10वां संशोधन (ICD-10) विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विकसित एक मानक अल्फान्यूमेरिक कोडिंग सिस्टम है। यह प्रणाली रोगों, लक्षणों, चोटों और मृत्यु के कारणों को विशिष्ट कोड प्रदान करती है। इसके माध्यम से चिकित्सा डेटा प्रबंधन, बिलिंग प्रक्रिया, बीमा दावों और मृत्यु दर की निगरानी में सटीकता लाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षमता, अक्षमता एवं स्वास्थ्य वर्गीकरण (ICF) की भी जानकारी दी। यह ढांचा केवल बीमारी तक सीमित न रहकर व्यक्ति के स्वास्थ्य के कार्यात्मक पहलुओं पर केंद्रित है। इसमें शारीरिक संरचना, गतिविधियां, भागीदारी और पर्यावरणीय कारकों को समाहित करते हुए स्वास्थ्य की समग्र तस्वीर प्रस्तुत की जाती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिष्ठाता डॉ. मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप, निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अमित सिंह, डॉ. एस.के. नायक, डॉ. आरती पाण्डेय, डॉ. संगीता जोगी, डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने कोडिंग प्रणाली की व्यवहारिक उपयोगिता, डेटा संधारण और स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुधार से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा संस्थान में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करना रहा।

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