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नेहरू चौक पर गरजी श्रमिक एकता, देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में प्रदर्शन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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लेबर कोड वापसी से 10 हजार पेंशन तक 10 सूत्रीय मांगों के साथ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
बिलासपुर, 12 फरवरी 2026। देशव्यापी आम हड़ताल के आह्वान के बीच गुरुवार को बिलासपुर का नेहरू चौक श्रमिक-किसान संगठनों की एकजुटता का केंद्र बना रहा। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, एटक जिला परिषद और विभिन्न फेडरेशनों के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी, किसान, नौजवान और महिला संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों और संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया।


नेहरू चौक पर सुबह 11 बजे से शुरू हुई आमसभा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर श्रम कानूनों में बदलाव, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और ठेकेदारी-संविदा प्रथा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। मंच से कहा गया कि “सैकड़ों वर्षों के संघर्ष और बलिदान से हासिल श्रम अधिकारों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
प्रदर्शनकारियों ने बैंक, बीमा, बिजली, स्टील, कोल, भेल, रेल, एयरलाइंस, डिफेंस, माइंस, सीमेंट, ईंट भट्ठा, हमाल, खेत मजदूर और किसान संगठनों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल श्रमिकों का नहीं, बल्कि जनाधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। सभा के बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाध्यक्ष के माध्यम से प्रेषित किया गया।

सभा में उठी ये प्रमुख मांगें

चार श्रम कानून (लेबर कोड) वापस लिए जाएं।
सरकारी उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगे; बैंक, बीमा, डाक, पोर्ट, एयरलाइंस, कोल, मेल, स्टील, सीमेंट, रेल, बीएसएनएल, जूट, टेक्सटाइल, टायर, स्वास्थ्य सेवा सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रों को निजीकरण से बचाया जाए।
स्मार्ट मीटर हटाए जाएं, बिजली का निजीकरण रोका जाए।
मनरेगा में 200 दिन काम और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित हो।
किसानों से हुए 7 सूत्रीय समझौते लागू हों; स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का वादा पूरा किया जाए।
शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी, बिजली और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था हो।
धार्मिक एवं जातिगत भेदभाव पर रोक लगे।
55 वर्ष के बाद मजदूर, किसान, विधवा, परित्यक्ता और विकलांग को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन मिले।
ठेकेदारी प्रथा समाप्त हो; संविदा कर्मियों को न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए।
इन संगठनों की रही मौजूदगी
प्रदर्शन में सुखंऊ निषाद (जिला सचिव, सीटू), राकेश शर्मा व अभयनारायण राय (इंटक), रवि बेनर्जी (अध्यक्ष, सीटू जिला समिति), पवन शर्मा (जिला सचिव, एटक), नंद कश्यप (प्रदेश किसान नेता), गरतलाल चुरी (अखिल भारतीय किसान सभा), दुर्गा प्रसाद मेरसा (छ.ग. किसान सभा), एच.डी. पाईक (अध्यक्ष, एटक जिला परिषद), विनय शर्मा (अखिल भारतीय नौजवान सभा), महेश्वर साहू (डीवाईएफआई), काशीराम ठाकुर (घर-खेती-रोजी बचाओ संघर्ष समिति), श्याम मुरित कौशिक (किसान मजदूर महासंघ), पुरईन साहू (महिला सभा), गणेश निषाद (किसान सभा बिल्हा), संत कुमार निराला (नौजवान सभा) और सरदार जसबीर सिंह चावला (जनचेतना भारत मंच) सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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