रायपुर। छत्तीसगढ़ में पशुपालकों के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं कागज़ों तक सीमित तो नहीं हैं—इसी की पड़ताल के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नई दिल्ली ने राज्य में संचालित केंद्रीय योजनाओं की जमीनी समीक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर का विशेष मॉनिटरिंग दल भेजा है, जो दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों में योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की पड़ताल करेगा।
रायपुर, 10 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ में केंद्र प्रायोजित पशुपालन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पशुपालकों तक उनके वास्तविक लाभ पहुंचने की स्थिति का आकलन करने के लिए भारत सरकार ने तीन नेशनल लेवल मॉनिटर (NLM) नियुक्त किए हैं। यह दल 9 से 14 फरवरी 2026 तक राज्य के दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों का दौरा कर योजनाओं की प्रगति का मौके पर जाकर निरीक्षण करेगा।
निरीक्षण के दायरे में राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों, लाभार्थियों की स्थिति, फील्ड लेवल इम्प्लीमेंटेशन और विभागीय समन्वय की विस्तार से जांच की जाएगी। भ्रमण दल में भारत सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जो सीधे फील्ड से फीडबैक लेंगे।
संचालनालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
केंद्रीय दल के भ्रमण की शुरुआत संचालनालय स्तर पर आयोजित ब्रीफिंग सत्र से हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, पशुधन विकास विभाग शामिल हुए, जबकि भारत सरकार के नोडल अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने केंद्र से आए अधिकारियों और नेशनल लेवल मॉनिटर दल को राज्य में योजनाओं की प्रगति, उपलब्धियों और चुनौतियों से अवगत कराया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने योजनाओं का संक्षिप्त लेकिन तथ्यात्मक प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी श्री मुकेश शर्मा ने योजनाओं की समीक्षा करते हुए राज्य स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।
गोकुल मिशन से लेकर पशुधन स्वास्थ्य तक की समीक्षा
बैठक में राष्ट्रीय गोकुल मिशन और राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश स्तरीय नोडल अधिकारियों ने विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। वहीं पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों, टीकाकरण, रोग नियंत्रण, नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन से जुड़े आंकड़ों की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का मूल उद्देश्य पशुपालकों को समय पर लाभ, पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक बिना किसी बाधा के पहुंचे।
1962 कॉल सेंटर का निरीक्षण
नेशनल लेवल मॉनिटर और भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने संचालनालय परिसर में स्थित मोबाइल वेटेनरी यूनिट के कॉल सेंटर 1962 का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कॉल सेंटर के संचालन, रिस्पॉन्स टाइम, आपात सेवाओं और पशुपालकों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली और सेवा गुणवत्ता पर संतोष जताया।
फील्ड रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी आगे की नीतियां
केंद्रीय दल की यह मॉनिटरिंग केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि भविष्य की नीतियों और फंडिंग के लिए फील्ड रिपोर्ट आधारित निर्णयों की दिशा में अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा से मिलने वाला फीडबैक राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पशुपालन योजनाओं की दिशा तय कर सकता है।

