शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की उपलब्धि, 18 लाख से 66 लाख उपभोक्ताओं तक पहुंची बिजली : उपमुख्यमंत्री अरुण साव
बिलासपुर। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में विद्युत विभाग की भूमिका को रेखांकित करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि बीते 25 वर्ष केवल एक समयावधि नहीं, बल्कि उपलब्धियों से भरा वह स्वर्णिम कालखंड है, जिसने राज्य के विकास की दिशा और दशा बदल दी है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित रजत जयंती महोत्सव कार्यक्रम में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर विद्युत विभाग की 25 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया गया।





छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद विद्युत वितरण कंपनी ने निरंतर प्रगति करते हुए बिजली को सुविधा, सुरक्षा और विकास के सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित किया है। ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक विद्युत आपूर्ति के विस्तार और सुदृढ़ीकरण ने जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। इन्हीं उपलब्धियों को सम्मान देने और उपभोक्ताओं के सहयोग को रेखांकित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि यह आयोजन उन उपभोक्ताओं के सम्मान का अवसर है, जिनके विश्वास और सहयोग से विद्युत विभाग निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी उपभोक्ताओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में राज्य गठन के समय 17 हजार 108 गांव विद्युतीकृत थे, जबकि आज 19 हजार 609 गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है, जिससे छत्तीसगढ़ शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की उपलब्धि हासिल कर चुका है। बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 18 लाख से बढ़कर 66 लाख तक पहुंच गई है। अति उच्चदाब केंद्रों की संख्या 26 से बढ़कर 137 हो गई है, वहीं 33/11 केव्ही विद्युत उपकेंद्रों की संख्या 248 से बढ़कर 1478 हो चुकी है, जो विद्युत क्षेत्र में मजबूत बुनियादी ढांचे का प्रमाण है।
उपमुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण इसलिए किया गया था ताकि यहां के संसाधनों का उपयोग यहीं के लोगों के विकास के लिए हो सके। विद्युत क्षेत्र में आए व्यापक और सकारात्मक बदलाव इस सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब एक विद्युत कनेक्शन भी बड़ी उपलब्धि माना जाता था, जबकि आज बिजली के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों में बिजली के बिना पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो सकतीं। एक घंटे की बिजली बाधित होने पर ही उसकी वास्तविक अहमियत का अहसास हो जाता है। ऐसे में उपभोक्ताओं में विद्युत के प्रति जागरूकता और विद्युत विभाग के कर्मचारियों के प्रति सम्मान की भावना आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं से सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे उपभोक्ता ऊर्जा उपभोग के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी भागीदार बन रहे हैं।
कार्यक्रम में बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद विद्युत मंडल के पृथक होने से बिजली के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन आया है। आज बिजली हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में विद्युत क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कृषि पंपों की संख्या 73 हजार से बढ़कर 8 लाख 28 हजार हो गई है। एकल बत्ती कनेक्शन धारकों की संख्या 6 लाख से बढ़कर 15 लाख तक पहुंच गई है। वर्तमान में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसी मजबूत आधार पर विद्युत व्यवस्था को और अधिक सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सजग प्रहरी के रूप में कार्य करते हैं और समाज को उनका सम्मान करना चाहिए।
कार्यक्रम में विधायकगण श्री सुशांत शुक्ला एवं श्री दिलीप लहरिया, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे, श्री दीपक सिंह, श्री मोहित जायसवाल, श्री रामदेव कुमावत, श्री राजेश सिंह, सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी कार्यपालक निदेशक श्री डी.के. भोजक, अधीक्षण अभियंता श्री सुरेश जांगड़े, श्री पी.आर. साहू, श्री आर.के. झा, कार्यपालन अभियंता श्री अनुपम सरकार, श्री डी.पी. नेताम, जनसंपर्क अधिकारी श्री मुकेश माथुर सहित विद्युत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण प्रभारी कार्यपालक निदेशक श्री डी.के. भोजक ने दिया। रजत जयंती महोत्सव के अवसर पर विद्युत विभाग के उत्कृष्ट उपभोक्ताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 13 वर्षीय सुश्री कनक साहू द्वारा प्रस्तुत वंदे मातरम के सुमधुर गायन ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया।



