





बिलासपुर। अपराधियों के लिए अब न अंधेरा सुरक्षित है, न भीड़ और न ही गली-मोहल्ले। बिलासपुर जिले में कानून-व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए पुलिस ने ड्रोन तकनीक और सुदृढ़ बीट सिस्टम के जरिए ऐसा ऑपरेशन छेड़ा है, जिसने असामाजिक तत्वों में सीधा खौफ पैदा कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिलेभर में नशाखोरी, अड्डेबाजी, आपराधिक गतिविधियों और यातायात अव्यवस्था पर करारा प्रहार किया जा रहा है—वह भी आसमान से लेकर जमीन तक एक साथ।
ड्रोन आधारित विशेष अभियान के तहत पुलिस को लाइव फीड के माध्यम से हर गतिविधि पर सीधी नजर मिल रही है। सिरगिट्टी क्षेत्र में ड्रोन से मिली तात्कालिक जानकारी के आधार पर चिन्हित स्थानों पर दबिश दी गई, जहां नशा और अड्डेबाजी में लिप्त 15 संदिग्धों पर वैधानिक कार्रवाई की गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति रही और पुलिस की तकनीकी ताकत का स्पष्ट संदेश गया।
वहीं सरकण्डा क्षेत्र के साइंस कॉलेज परिसर में आयोजित व्यापार मेले के दौरान ड्रोन के जरिए यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को संभाला गया। ऊपर से की गई निगरानी के चलते पार्किंग, प्रवेश-निकास और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था सुचारु बनी रही, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था को पहले ही रोका जा सका।
ड्रोन निगरानी अभियान को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। जिले के प्रत्येक थाना क्षेत्र में इस तकनीक का विस्तार किया जा रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था पर निरंतर और प्रभावी नियंत्रण बना रहे।
इसी के समानांतर जिले में अपराध नियंत्रण और आम जनता से मजबूत समन्वय के उद्देश्य से बीट प्रणाली को मानक कार्यप्रणाली (SOP) के अनुसार प्रभावी रूप से लागू किया गया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुदृढ़ की गई इस बीट प्रणाली के तहत 24×7 गश्त, अपराध नियंत्रण और सामुदायिक पुलिसिंग पर विशेष जोर दिया गया है।
प्रत्येक बीट क्षेत्र में 6 आरक्षकों की तैनाती की गई है, जो प्रातः, सायं और रात्रि—तीन शिफ्टों में लगातार निगरानी और गश्त करेंगे। शहरी बीट क्षेत्रों में बाजार, भीड़भाड़ वाले इलाके, स्लम बस्तियां, स्कूल–कॉलेज, एटीएम, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थलों को शामिल किया गया है। वहीं ग्रामीण बीट प्रणाली के अंतर्गत 3 से 6 गांव, खेत-खलिहान, जलस्रोत, वन सीमा क्षेत्र, बंदोबस्त इलाके और दुर्घटनाजन्य स्थानों को कवर किया जा रहा है।
बीट अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों, असामाजिक तत्वों, हिस्ट्रीशीटरों, बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही, किरायेदारों और नवागंतुकों की पूरी जानकारी संधारित करें। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों से सतत संवाद स्थापित कर प्रारंभिक सूचनाएं एकत्र की जाएं, ताकि अपराध को जड़ में ही रोका जा सके।
बीट में आवंटित प्रत्येक मोटरसाइकिल में जीपीएस लगाया गया है, जिससे पुलिस की निरंतर उपस्थिति और मूवमेंट पर सीधी निगरानी संभव हो रही है। इससे पुलिस की दृश्यता बढ़ी है और त्वरित कार्रवाई की क्षमता में इजाफा हुआ है।
नशा, जुआ-सट्टा, चोरी, नकबजनी, छेड़छाड़ और गुंडागर्दी जैसी गतिविधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर उनके नेटवर्क को जड़ से तोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। बीट अधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, दुकानदारों, चौकीदारों, सरपंचों, कोटवारों और शिक्षकों से लगातार संपर्क में रहकर भूमि विवाद, पारिवारिक विवाद और संवेदनशील मामलों की समय रहते जानकारी जुटा रहे हैं।
रात्रिकालीन गश्त को विशेष रूप से रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच और अधिक प्रभावी बनाया गया है। प्रत्येक बीट में बीट रजिस्टर और बीट डायरी का नियमित संधारण, अपराध मानचित्रण, घटनाओं का विश्लेषण तथा प्रमुख स्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरों और क्यूआर कोड के माध्यम से पुलिस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है।



