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बजट सत्र में ‘मोदी की गारंटी’ पूरी करने की मांग

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सहायक शिक्षक वेतन विसंगति पर फेडरेशन का दबाव, प्रदेश अध्यक्ष राठौर और जिला अध्यक्ष पांडेय ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के आगामी बजट सत्र को लेकर सहायक शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित वेतन विसंगति का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से बजट सत्र में ही “मोदी की गारंटी” के तहत सहायक शिक्षकों से किया गया वादा पूरा करने की मांग उठाई है। इसे लेकर फेडरेशन की ओर से विधिवत प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है।

प्रेस विज्ञप्ति में फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष श्री रविन्द्र राठौर एवं जिला अध्यक्ष बिलासपुर श्री सुनील पांडेय ने संयुक्त रूप से कहा कि सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति वर्षों से लंबित है और यह मांग लंबे समय से बहुप्रतीक्षित बनी हुई है। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में स्पष्ट रूप से यह वादा किया था कि सरकार बनते ही 100 दिनों के भीतर सहायक शिक्षकों के वेतनमान की विसंगति को दूर किया जाएगा

फेडरेशन पदाधिकारियों ने कहा कि अब सरकार को बने पर्याप्त समय बीत चुका है और शिक्षकों को इस वादे के पूरा होने की प्रतीक्षा है। ऐसे में बजट सत्र एक महत्वपूर्ण अवसर है, जब राज्य सरकार को अपने संकल्प पत्र में किए गए वचन का औपचारिक उल्लेख करते हुए सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति को दूर करने की घोषणा करनी चाहिए।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि फेडरेशन की मांग है कि सहायक शिक्षकों को वन टाइम रिलेक्सेशन प्रदान करते हुए क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही आर्थिक असमानता समाप्त हो सके। पदाधिकारियों ने इसे सहायक शिक्षकों के साथ न्याय का विषय बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षकों की उपेक्षा लंबे समय तक नहीं की जा सकती।

फेडरेशन ने यह भी रेखांकित किया कि सहायक शिक्षक लगातार शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, बावजूद इसके वेतन विसंगति के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव के दौरान किए गए वादे से शिक्षकों में उम्मीद जगी थी, जिसे अब बजट सत्र में ठोस रूप दिया जाना आवश्यक बताया गया है।

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन की ओर से जारी इस प्रेस विज्ञप्ति ने बजट सत्र से पहले शिक्षक समुदाय की अपेक्षाओं और सरकार पर बने दबाव को एक बार फिर सामने ला दिया है।

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