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ये कैसा समाज कल्याण….दिव्यांग काउंसलर का वेतन काटा, 10 माह तक भुगतान रोका

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला तिफरा में लिपिक पर मनमानी और शोषण के गंभीर आरोप, कलेक्टर बिलासपुर तक पहुंची शिकायत
बिलासपुर।
दिव्यांगों के पुनर्वास और संरक्षण के उद्देश्य से संचालित शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला तिफरा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। यहां पदस्थ एक दिव्यांग कर्मचारी ने लिपिक पर मनमाने ढंग से वेतन कटौती करने और महीनों तक वेतन भुगतान रोके जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सीधे कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच गया है, जहां पूरे घटनाक्रम को लेकर विस्तृत लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई है।


शिकायतकर्ता अशोक कुमार देवांगन, जो स्वयं एक दिव्यांग व्यक्ति हैं और शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला तिफरा बिलासपुर में दिव्यांग बच्चों के काउंसलर के रूप में कार्यरत हैं, ने बताया कि कर्मशाला में पदस्थ लिपिक पर (कार्यालय सहायक वर्ग-03) द्वारा उनके वेतन में बिना किसी वैधानिक आदेश के कटौती की गई है।


शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मार्च 2025 से लगभग 10 माह तक कर्मशाला के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान ही नहीं किया गया। इस दौरान बार-बार यह कहा जाता रहा कि “बंटन नहीं आया है” और वेतन भुगतान के लिए संचालक, समाज कल्याण विभाग, माना कैम्प रायपुर को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव में किसी भी प्रकार की वेतन कटौती का उल्लेख नहीं होने के बावजूद शिकायतकर्ता के वेतन में कटौती की गई, जिसे उन्होंने पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दिव्यांगों के लिए संचालित शासकीय संस्था में ही एक दिव्यांग कर्मचारी के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाना बेहद गंभीर और संवेदनहीन है। वेतन से जुड़े मामले को लेकर 02 फरवरी 2026 को उन्होंने संयुक्त संचालक समाज कल्याण विभाग से भी मुलाकात की, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उल्लेखनीय है कि शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला तिफरा का वित्तीय प्रभार भी संयुक्त संचालक के पास ही है।
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि लिपिक पर पूर्व में शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला तिफरा में लाखों रुपये के घोटाले के आरोप लग चुके हैं। इस संबंध में दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की छायाप्रति भी शिकायत के साथ संलग्न की गई है। दोषी पाए जाने पर उन्हें एक समय संयुक्त संचालक कार्यालय में संलग्न किया गया था, लेकिन बाद में अधिकारियों की कथित मिलीभगत से उन्हें पुनः आश्रयदत्त कर्मशाला में पदस्थ कर दिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दिव्यांगों से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील संस्था में ऐसे कर्मचारी की पदस्थापना से न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि एक ओर जहां फर्जी बिलों के माध्यम से आर्थिक गड़बड़ियां की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर दिव्यांग कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर उनका शोषण किया जा रहा है।
पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने कलेक्टर बिलासपुर से अनुरोध किया है कि संचालक समाज कल्याण विभाग, माना कैम्प रायपुर को भेजे गए वेतन प्रस्ताव के अनुरूप ही उनका संपूर्ण वेतन भुगतान कराया जाए।
इस मामले की प्रतिलिपि मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, सचिव समाज कल्याण विभाग, कमिश्नर बिलासपुर संभाग, संचालक समाज कल्याण विभाग, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बिलासपुर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों और संगठनों को भी भेजी गई है।
इस मामले में समाज कल्याण विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर टी भावे का कहना है कि बजट के अभाव में भुगतान नहीं हो सका था। जल्द ही उन्हें राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

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