भौतिक सत्यापन की एक गलती ने किसान को कर्ज, संकट और अपमान की आग में झोंका
बिलासपुर।
सरकारी दावों, नियमों और फाइलों के बीच पिसता किसान एक बार फिर सिस्टम की बेरुखी का शिकार हुआ है। खरीफ सीजन 2025–26 में “एक-एक दाना खरीदी” के वादे जमीन पर बिखरते नजर आ रहे हैं। बिलासपुर जिले के एक गांव से सामने आया मामला यह बताने के लिए काफी है कि कैसे एक कागजी गलती ने किसान की पूरी मेहनत, उसकी फसल और उसका भविष्य दांव पर लगा दिया।
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा।
बिलासपुर जिले के ग्राम नगोई, तहसील बेलतरा, विकासखंड बिल्हा में धान खरीदी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। यहां एक किसान ने अपने परिवार की कुल 12 एकड़ 36 डिसमील भूमिस्वामी भूमि के आधार पर 255.20 क्विंटल धान विक्रय के लिए शासकीय उपार्जन केंद्र में विधिवत पंजीयन कराया था। इसी पंजीयन के आधार पर सेवा सहकारी समिति से खाद, बीज और नगद मिलाकर 2 लाख 20 हजार 742 रुपये का कर्ज भी दिया गया।
किसान भानूप्रताप।
लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान की गई एक बड़ी प्रशासनिक चूक ने पूरा गणित बिगाड़ दिया। जहां 255.20 क्विंटल धान दर्ज होना था, वहां केवल 46.80 क्विंटल दर्ज कर दिया गया। यह गलती उस वक्त सामने आई जब किसान अपनी उपज बेचने उपार्जन केंद्र पहुंचा। उसे साफ शब्दों में बताया गया कि उसके टोकन से केवल 46.80 क्विंटल धान ही खरीदा जाएगा।
यह सुनते ही किसान के सामने संकट का पहाड़ खड़ा हो गया। पूरी फसल तैयार, कर्ज सिर पर और सरकारी केंद्र पर खरीदी से इनकार जैसी स्थिति बन गई। बाद में स्वीकार किया गया कि भौतिक सत्यापन में गंभीर त्रुटि हुई है और धान की मात्रा गलत दर्ज कर दी गई। त्रुटि सुधार के लिए संबंधित स्तर पर आवेदन भी किया गया, पावती भी दी गई और यह भी दर्ज किया गया कि किसान का धान अब तक विक्रय नहीं हुआ है।
इसके बावजूद धान खरीदी की अंतिम तिथि गुजर जाने के बाद भी न तो पंजीयन में संशोधन किया गया और न ही नया टोकन जारी हुआ। नतीजा यह रहा कि किसान की पूरी उपज आज भी खरीदी से बाहर है और वह जिला सहकारी बैंक व सोसायटी के कर्ज के बोझ में फंसा हुआ है।
प्रशासनिक लापरवाही का असर:
धान खरीदी की समय-सीमा खत्म होने के बाद भी संशोधन न होना यह दर्शाता है कि व्यवस्था में सुधार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। एक तरफ किसान से कर्ज वसूली की तैयारी रहती है, दूसरी तरफ उसकी उपज खरीदने में सिस्टम हाथ खड़े कर देता है।
सड़क से दफ्तर तक आवाज:
धान खरीदी में हो रही इस तरह की गड़बड़ियों को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है। कलेक्टरेट तक शिकायत पहुंचाई गई है और पूरी उपज की खरीदी की मांग उठाई गई है। किसानों का कहना है कि यदि पंजीयन और सत्यापन में हुई गलती उनकी नहीं है, तो सजा उन्हें क्यों दी जा रही है।
प्रदेशव्यापी तस्वीर:
जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में बड़ी संख्या में किसान ऐसे हैं, जिनका धान अब तक नहीं खरीदा गया है। अंतिम तारीख बीत जाने के बाद भी किसान अपनी उपज लेकर भटकने को मजबूर हैं। धान खरीदी व्यवस्था में सामने आ रही ये गड़बड़ियां किसानों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचा रही हैं।



