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सच…अचानकमार के जंगल में खून से सनी जंग: दो साल के बाघ की गर्दन तोड़ दी, आपसी भिड़ंत में गई जान, लापरवाही… अधिकारी रहे बेखबर, पेट्रोलिंग दस्ते पर भी सवाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर/अचानकमार।
छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और चर्चित अचानकमार बाघ अभयारण्य के जंगलों से एक बार फिर झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। सारसडोल इलाके में दो वर्षीय नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग से लेकर वन्यजीव तंत्र तक में हड़कंप मच गया। पोस्टमार्टम, मौके की जांच और फील्ड एविडेंस ने जो तस्वीर सामने रखी है, वह जंगल के भीतर चल रही उस खामोश लेकिन बेहद हिंसक जंग को उजागर करती है, जहां इलाके और प्रभुत्व की लड़ाई में एक युवा बाघ को अपनी जान गंवानी पड़ी।
गश्त के दौरान दिखा शव, जंगल में मची अफरा-तफरी
रविवार को नियमित गश्त पर निकले वनकर्मियों की नजर सारसडोल क्षेत्र के घने जंगल में पड़े बाघ के शव पर पड़ी। शव की स्थिति और आसपास के हालात सामान्य नहीं थे। तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। मौके को घेराबंदी में लेकर जांच शुरू की गई। प्रारंभिक आकलन में मृत बाघ की उम्र करीब दो वर्ष बताई गई, जो हाल ही में स्वतंत्र रूप से जंगल में विचरण करने की अवस्था में था।
NTCA गाइडलाइन के तहत पोस्टमार्टम, चौंकाने वाले खुलासे
सोमवार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइन के अनुसार गठित समिति की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में सामने आया कि बाघ की गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी। गर्दन के निचले हिस्से पर दूसरे नर बाघ के दांतों के गहरे और साफ निशान मिले। यह संकेत थे कि हमला सीधा, ताकतवर और जानलेवा था।
अवैध शिकार के आरोप खारिज, सभी अंग सुरक्षित
पोस्टमार्टम और मौके की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मृत बाघ के दांत, नाखून, पंजे और शरीर के अन्य सभी अंग पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी भी तरह की कटाई, अंग गायब होने या इंसानी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले। इससे अवैध शिकार की आशंका पूरी तरह खत्म हो गई।
संघर्ष के पुख्ता सबूत मौके पर बिखरे मिले
जिस स्थान पर बाघ का शव मिला, वहां संघर्ष के कई ठोस प्रमाण पाए गए।
आसपास की झाड़ियां और पौधों की टहनियां टूटी हुई थीं
जमीन पर गहरे खरोंच के निशान थे
बिखरे हुए बाघों के बाल मिले
मृत बाघ के पंजों में दूसरे बाघ के बाल फंसे पाए गए
मौके पर बाघ का मल भी मौजूद था
इन सबूतों ने साफ कर दिया कि दोनों बाघों के बीच लंबे समय तक भीषण संघर्ष हुआ।
इलाके की लड़ाई में जान गई
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों और जानकारों के मुताबिक, बाघों के बीच इस तरह की हिंसक भिड़ंत इलाके और प्रभुत्व को लेकर होती है। खासकर युवा नर बाघ जब अपना क्षेत्र तय करने निकलते हैं, तो पहले से मौजूद ताकतवर बाघों से सीधा टकराव होता है। दो साल की उम्र ऐसा नाजुक दौर होता है, जब बाघ शारीरिक रूप से सक्रिय तो होता है, लेकिन पूरी तरह ताकतवर नहीं होता।
अचानकमार में बढ़ता दबाव
अचानकमार बाघ अभयारण्य में बाघों की संख्या और उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सीमित क्षेत्र, शिकार की उपलब्धता और बाघों की बढ़ती मूवमेंट के चलते कई इलाकों में उनका इलाका एक-दूसरे से टकरा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी एक-दूसरे पर दबाव बना रही है, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।
घटना के बाद बढ़ाई गई निगरानी
बाघ शावक की मौत के बाद सारसडोल और आसपास के जंगलों में गश्त और कड़ी कर दी गई है। कैमरा ट्रैप्स की नियमित मॉनिटरिंग, फील्ड स्टाफ की अतिरिक्त तैनाती और बाघों की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है। पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है।

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